- राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य पर शुभम सदस्यों द्वारा राजस्थानी लोक नृत्य की प्रस्तुति
- तीन राज्यों की विविध विरासत, परंपराओं और राष्ट्र की प्रगति में उनके योगदान को प्रदर्शित किया गया
मेघालय की राजधानी शिलोंग में राजभवन ने दरबार हॉल में राजस्थान दिवस और बिहार दिवस के साथ-साथ ओडिशा दिवस मनाया। इस उपलक्ष्य में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मेघालय की प्रथम महिला श्रीमती बबीता विजयशंकर, गणमान्य व्यक्तियों और सम्मानित अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। एक विशेष वीडियो प्रस्तुति में इन तीन राज्यों की विविध विरासत, परंपराओं और राष्ट्र की प्रगति में उनके योगदान को प्रदर्शित किया गया।
सांस्कृतिक खंड में बिहारी समाज शिलोंग से राजेश कुमार, दयानंद कुमार सिंह, राज कुमार राय (राज), चंदन ठाकुर, अशोक कुमार चौरसिया, नंदन ठाकुर, सुनील भारती, फिरोज़ आलम, शशिकांत राय, विनोद राय शामिल हुए। भोजपुरी नृत्य में मुस्कान खातून एवं समा खातून ने बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति की। भजन कीर्तन बुलन राय एवं बिनोद राय के टीम ने प्रस्तुत किए।
मेघालय राजभवन में राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें शुभम चैरिटेबल एसोसिएशन के सदस्यों ने राजस्थानी लोक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। इस अवसर पर पिंकी चाचान, कनक गोयल, वंदना चौधरी, सिल्की बाजाज और डॉली अग्रवाल ने राजस्थानी लोक नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया।
इसके अलावा, शुभम चैरिटेबल सदस्यों के छोटे छोटे राजस्थानी बच्चों द्वारा आत्म प्रशिक्षण का शानदार प्रदर्शन किया, जिसमें शिवांश चाचान, मिराया करगवाल, विराज जसरासरिया, ईवान अग्रवाल, दक्षिता हरलाल्का, आरव खेमानी, मयूर मस्करा ने भाग लिया।शुभम चैरिटेबल एसोसिएशन की सदस्या नीतू शर्मा और पायल बाजाज ने संस्था का परिचय प्रस्तुत किया।
शुभम चैरिटेबल अध्यक्ष पुष्पा बाजाज ने राजभवन मेघालय के प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्री डॉ. ब्रह्मदेव राम तिवारी का विशेष धन्यवाद किया, जिनके विशेष सहयोग से शुभम को यह अवसर लगातार दूसरे वर्ष प्राप्त हुआ। यह कार्यक्रम शुभम चैरिटेबल एसोसिएशन द्वारा समाज के विकास और सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों का एक हिस्सा है, जो महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन के क्षेत्रों में कार्यरत है।
इस अवसर एनईएचयू की प्रोफेसर श्रीमती चंद्रकांता की भी मौजूदगी रही। ओडिशा दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम हुए। केशव मिश्रा ने अपनी-अपनी परंपराओं की जीवंतता को प्रस्तुत करते हुए मनमोहक प्रदर्शन किया। समारोह में सांस्कृतिक और सामाजिक सद्भाव में योगदान देने वाले व्यक्तियों और संगठनों को सम्मानित करने के लिए एक सम्मान समारोह भी शामिल था। यह कार्यक्रम एक शानदार सफलता थी, जिसने समुदायों को उत्सव, सांस्कृतिक प्रशंसा और राष्ट्रीय एकता की भावना में एक साथ लाया।
योगेश दुबे