विभिन्न वक्ताओं ने रखे अपने विचार
धोलाई विधानसभा क्षेत्र के बेकिरपार में श्रीकृष्ण रुक्मिणी कलाक्षेत्र द्वारा आयोजित प्रथम अंतर्राष्ट्रीय संस्कृत अभिवर्ष उत्सव 2024-25 का भव्य समापन समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और लुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। समारोह का मुख्य विषय ‘मातृभाषा के माध्यम से संस्कृत सीखना, 2050 तक हर घर संस्कृत’ था।
समारोह का शुभारंभ श्रीकृष्ण रुक्मिणी कलाक्षेत्र के अध्यक्ष विधान सिंह के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने कहा, “आज का दिन हमारे लिए बहुत ही शुभ है। आज सती जयमनी, का जन्मदिन है, साथ ही असम के पूर्व शिक्षा मंत्री, जो जनजातीय समाज के पहले स्नातक थे, उनका भी जन्मदिन है। उनका सौभाग्य है कि आज के इस पावन अवसर पर यह आयोजन संपन्न हो रहा है। उन्होंने आगे कहा, यह श्रीकृष्ण रुक्मिणी कलाक्षेत्र देखने में भले छोटा हो, लेकिन इसमें बहुत बड़ी चेतना और गतिविधियाँ समाहित हैं।
सभी के सहयोग से इसे और आगे बढ़ाना चाहते हैं। उनका यह पहला अंतर्राष्ट्रीय संस्कृत अभिवर्ष उत्सव पिछले एक वर्ष से चल रहा था और आज इसके समापन की घोषणा की जा रही है। समारोह का उद्घाटन मुख्य अतिथि मुक्तेश्वर केम्पराई (अध्यक्ष, दीमासा राइटर्स फोरम) द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में संस्कृत भाषा और अन्य जनजातीय भाषाओं के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार दिलीप कुमार ने अपने संबोधन में संस्कृत और मातृभाषा संरक्षण के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, भाषा हमारी संस्कृति की आत्मा होती है और मातृभाषा का संरक्षण हमारा कर्तव्य है। उन्होंने भोजपुरी कवि दीपक जायसवाल की कविता का उल्लेख करते हुए मातृभाषा से जुड़ी भावनाओं को साझा किया और कहा कि भाषा ही हमारी पहचान है। संस्कृत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि भारत के प्राचीन ग्रंथ वेद, उपनिषद, रामायण और महाभारत संस्कृत में लिखे गए हैं। उन्होंने कहा, संस्कृत को बढ़ावा देना भारतीय संस्कृति को समझने और आत्मगौरव को पुनर्स्थापित करने के लिए आवश्यक है।
इसके अलावा, उन्होंने भाषाई इतिहास पर चर्चा करते हुए बताया कि डीमासा भाषा और संस्कृत का संबंध प्राचीन काल से है। उन्होंने कहा कि भाषा और लिपि किसी भी समुदाय की पहचान होती है, और हमें अपनी मातृभाषा और लिपि को संरक्षित करने के लिए जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। समारोह के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण संगोष्ठियाँ और कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें राज्य स्तरीय संगोष्ठी एवं जॉय भद्रा मेमोरियल व्याख्यान श्रृंखला विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। इस संगोष्ठी में विष्णुप्रिया मणिपुरी, दीमासा, हिंदी और संस्कृत को सहायक राजभाषा का दर्जा देने की मांग उठाई गई और मणिपुरी समुदाय की भाषाओं एवं संस्कृति पर विचार-विमर्श किया गया।
इसके अलावा, विश्व में लुप्तप्राय भाषा दिवस एवं उत्सव 2025 के आयोजन की भी घोषणा की गई। यह उत्सव 16 मार्च 2025 (शहीद सुदेष्णा सिन्हा के 30वें बलिदान दिवस) से 28 सितंबर 2025 (विश्व पर्यटन दिवस) तक चलेगा। यह आयोजन भारत की भाषाई विविधता और लुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण पर केंद्रित रहेगा तथा इसे भारत पर्यटन (खोमपाल, जनवरी से जनवरी) के सहयोग से आयोजित किया जाएगा।
समारोह में विभिन्न प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की उपस्थिति रही। मुख्य अतिथि:मुक्तेश्वर केम्पराई (अध्यक्ष, दीमासा राइटर्स फोरम), मुख्य वक्ता:दिलीप कुमार (प्रकाशक, प्रेरणा भारती), प्रमुख वक्ता:मोतीलाल बर्मन, विशिष्ट अतिथि: दिलीप कुमार सिन्हा, समरेन्द्र जिदुंग बर्मन, विशेष अतिथि सम्मानित व्यक्ति:नूपुर बर्मन (सहायक सचिव, दीमासा कचारी संगठन)लख्यजीत बर्मन (कार्यकारी सदस्य, दीमासा कछारी संगठन) महिम त्रिपुरा (अध्यक्ष, त्रिपुरा पंजे हलाम हिल ट्राइब डेवलपमेंट कमेटी)। इस समारोह का आयोजन श्री कृष्ण रुक्मिणी कलाक्षेत्र द्वारा किया गया था। सह-आयोजकों में दीमासा राइटर्स फोरम (असम), दीमासा कछारी संगठन (बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद), और त्रिपुरा पंजे हलाम हिल ट्राइब डेवलपमेंट कमेटी (त्रिपुरा, कछार, असम) शामिल थे।
समारोह में प्रमुख मीडिया सहयोगी के रूप में प्रेरणा भारती (हिंदी दैनिक) और पूर्वोत्तर हलचल (हिंदी) ने विशेष भूमिका निभाई। समापन और भविष्य की योजनाएँ कार्यक्रम का संचालन बिधान सिन्हा (अध्यक्ष, श्री कृष्ण रुक्मिणी कलाक्षेत्र) ने किया। इस समारोह में बड़ी संख्या में विद्वानों और पत्रकारों ने भाग लिया। प्रमुख प्रतिभागियों मुक्तेश्वर केम्पराई (अध्यक्ष, दीमासा राइटर्स फोरम) और दिलीप कुमार (प्रकाशक, प्रेरणा भारती, मेहरपुर) सहित कई लोगों को विशारद उपाधि से विभूषित किया गया। समारोह के प्रमुख प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। समारोह के सहभागियों के लिए मध्यान्ह भोजन की भी व्यवस्था की गई थी।