Friday, April 4, 2025

रोहिंग्या घुसपैठिये पर पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ के तीखे प्रश्न ? सीमा पार कर देश के एक छोर से दूसरे छोर जम्मू कश्मीर पहुंच कैसे सेटल हो हैं जाते ये लोग ? 

सरकारी तंत्र की विफलता और भारतीय नागरिकों में जागरूकता की कमी पर जताई चिंता 

राष्ट्रवादी विचारक और प्रखर वक्ता पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने रोहिंग्या घुसपैठिये पर जमकर हल्ला बोला। अवैध घुसपैठिए रह रहे हैं और उनमें से एक बड़ा हिस्सा पूर्वोत्तर के रास्ते देश में प्रवेश कर रहा है। सोमवार को रवाना होने से पहले उन्होंने स्थानीय पत्रकारों से बातचीत की। एनआईटी, सिलचर गेस्ट हाउस में पत्रकारों के साथ बातचीत में उन्होंने अवैध घुसपैठ पर करारा प्रहार किया। देश में जिन लोगों ने शासन किया, वो अपने स्वार्थ के लिए ऐसा होने दिया जो इस देश के हित में नहीं था। संचार क्रांति नहीं होने से लोगों का पता भी नहीं चलता।

1947 से लेकर 2025 तक अध्ययन किया जाए, तो आश्चर्यचकित होंगे। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह कैसा देश है ? इस देश में इतनी बड़ी सेना है, फौज है, बावजूद इस देश में बाहर से लोग आते है, दिल्ली चले जाते हैं, वहाँ से पठानकोट पहुंच जाते हैं और श्रीनगर पहुँच जाते। श्रीनगर के लोग उन्हें कश्मीर तरफ भगा देते हैं और यही घुसपैठिये जम्मू कश्मीर में सेटल हो जाते है। जम्मू कश्मीर उसी सोच के लोग रहते, जो उन्हें शरण दी। किसी के सहयोग के बिना यह संभव नहीं। भारत एक छोर (  पूर्वोत्तर भारत ) से रोहिंग्या दूसरे छोर जम्मू – कश्मीर तक पहुंच जा रहे हैं। राज्य एवं देश के लोगों को पता न हो यह किनकी की वजह से हुआ यह सवाल उठाए ? उदाहरण स्वरूप कहा, कुछ लोग म्यांमार से चले, सीमा पार किए, किसी ने तो स्वागत किया है।

एक दो आ गए हो तो माना भी जा सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक 5 करोड़ 2 लाख लोग देश में अवैध रूप से रह रहे हैं। भारत में ये कैसे बस गए। यहां की राशन, हवा पानी सब खा पी रहे। प्रश्न किए, किनकी गलतियों की वजह से ये सब संभव हुआ। राजनीतिक पार्टियों की चुप्पी पर प्रश्न उठाए। मान भी ले सरकार के जितने विभाग है, वह किन्ही कारणों से अथवा भ्रष्टाचार की वजह से समझौता कर लिया हो, लेकिन आम नागरिकों को तो इसपर बोलना चाहिए। हम क्या सरकार पर निर्भर हैं। जिम्मेदार नागरिकों की कोई कर्तव्य नहीं। अपने देश की संस्कृति – सभ्यता से प्रेम है और हमारी संस्कृति – सभ्यता को रौंदने वाला आ रहा, तो क्या समाज का यह जिम्मेदारी नहीं चुप्पी तोड़े, खुलकर बोले। हमारे बीच को अवैध नागरिक अचानक आ जाता है और रहने लगता है।

हमारा यह कर्तव्य नहीं बनता उनकी जानकारी संग्रह करे ये संदिग्ध लोग कौन है। इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस प्रशासन दे। सब कुछ सरकारी तंत्र के भरोसे नहीं रहा जा सकता। आम लोग जागरूक होंगे तो सरकारी तंत्र भी सही से काम करेगा। रोहिंग्या मुसलमान आधार कार्ड, वोटर कार्ड आदि दस्तावेज बनवा लेते हैं। यह सब कैसे संभव हो जाता है। भ्रष्ट लोगों के समर्थन से यह हो रहें हैं। सरकारी दस्तावेज से लेकर भूमि अधिकार तक पा लेते हैं। यह सब कैसे हो जाता है ? कहीं नहीं कहीं सरकारी तंत्र विफल हुआ है। सरकार, प्रशासन यदि विफल है, तो आवाज उठाने की जिम्मेदारी पूर्वोत्तर वासियों पर आ जाता है। यहां के लोगों को इस बारे में जागरूक होने के साथ अवैध घुसपैठ पर आवाज उठानी होगी।

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि भारतीय नागरिक जम्मू – कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकता था, चूंकि धारा 370 लागू था। फिर कैसे रोहिंग्या मुसलमानों को शरण दिया गया। वह सब कुछ अधिकार दे दिया गया, जो एक भारतीय नागरिक को नहीं मिल सकता था। लेकिन रोहिंग्याओं शरण दिया गया। म्यांमार से रोहिंग्या मुसलमान अवैध रूप से भारत में घुस आए और उन्हें जम्मू – कश्मीर में सुरक्षित शरण मिल गई। राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी यह एक बड़ी चुनौती है। केवल भारत माता के नारे लगाने से काम चलेगा क्या ? वह चाहते हैं कि आम लोग इन मुद्दों को समझें और आगामी चुनावों के दौरान अपने नेताओं से सवाल पूछें।

आपके इलाके में कहीं अचानक कुछ लोगों ने मकान बना लिए और आप चुप रहे, इससे आपका भविष्य बर्बाद हो जाएगा। इसलिए जागरूक रहें और अपने भविष्य की रक्षा करें। इस अवसर पर हिंदीभाषी चाय जनसमुदाय मंच के अध्यक्ष उदय शंकर गोस्वामी, महासचिव कंचन सिंह, प्रदीप गोस्वामी, मनीष पांडेय, जयप्रकाश गुप्ता, प्रमोद जायसवाल, एनआईटी के अधिकारी रूप ज्योति की उपस्थिति रही। मालूम हो कि पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ हिंदीभाषी चाय जनसमुदाय मंच, बराक घाटी के निमंत्रण पर सिलचर आए हुए थे। रविवार को उन्होंने एक कार्यक्रम को संबोधित भी किया था।

योगेश दुबे

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