- स्कूल पर दोनों पक्षों का दावा
गर्मी की छुट्टी के बाद स्कूल खुलते ही सिलचर शहर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान – साउथ पॉइंट हाई स्कूल में विवाद फिर से बढ़ गया है। ज़मीन के मालिकाना हक और स्कूल प्रबंधन मुद्दे पर काफ़ी समय से पारिवारिक विवाद चल रहा है। मामला अदालत तक भी पहुंच गया है। फिर भी, इसका कोई हल नहीं निकल रहा है। स्कूल के छात्रों का भविष्य खतरे में है। शुक्रवार को जब स्कूल खुला, तो दोनों पक्ष स्कूल के समक्ष मौजूद थे।
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नई प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों ने पुरानी समिति की एमडी व इंचार्ज प्रिंसिपल कृष्णा डे को विद्यालय के अंदर प्रवेश करने से रोक दिया। बड़ी संख्या में अभिभावक कृष्णा डे पक्ष में था। इस दौरान माहौल थोड़ा गरमा गया। खबर मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुँच गई। हालाँकि, छात्र हमेशा की तरह स्कूल में दाखिल हुए। उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई। इस बीच, गुरुवार को अभिभावकों ने एक बैठक की थी। उन्होंने पूरी घटना पर अपनी चिंता व्यक्त की। अभिभावकों को डर है कि स्कूल की ज़मीन पर कब्जा करके उसे निजी व्यावसायिक हितों के लिए इस्तेमाल करने की क़ीमत सैकड़ों छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को चुकानी पड़ेगी।
एक चिंतित अभिभावक ने आज गार्जियन फ़ोरम की एक आपात बैठक में कहा कि 1982 में स्वर्गीय इंदुभूषण डे द्वारा स्थापित साउथ पॉइंट हाई स्कूल ने बराक घाटी के हजारों छात्रों का भविष्य गढ़ा है। इस संस्थान ने कई पीढ़ियों के परिवारों का विश्वास अर्जित किया है, खासकर अपनी अनुशासित और उच्च-गुणवत्ता वाली शिक्षा के लिए। आज, संस्थापक के महान सपने को संजोने के बजाय, स्कूल का पंजीकरण रद्द करने और ज़मीन पर कब्ज़ा करने के लिए कानूनी कदम उठाकर संस्थान के अस्तित्व को नष्ट करने की कोशिश की जा रही है।
अभिभावकों ने यह भी कहा कि असम उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद (AHSEC) से संबद्ध, बगल के हेमांगिनी डे मेमोरियल जूनियर साइंस कॉलेज को भी उन्हीं याचिकाकर्ताओं के अनुरोध पर बंद कर दिया गया है। बैठक में, अभिभावकों, पूर्व छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के एक बड़े वर्ग ने इस पहल का क़ानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने का संकल्प लिया। मीडिया कर्मियों के साथ बातचीत में कृष्णा डे ने कहा कि स्कूल के अंदर उन्हें जाने से रोक दिया गया।
उन्होंने दावा किया कि कानूनी तौर पर सभी वैध दस्तावेज उनके पास उपलब्ध है और विद्यालय पर उनका हक़ बनता है। वह छात्र – छात्राओं के जीवन के साथ खिलवाड़ होने नहीं देना चाहती। अदालत में जमीन पर स्कूल होने का कोई उल्लेख ही नहीं किया गया है। जबकि नई स्कूल प्रबंधन समिति बनने और उसके नवनिर्वाचित एमडी मृदुल धर ने मीडिया को बताया कि अदालत का निर्णय उनके पक्ष में है। यदि किसी को कुछ शिकायत या अपनी बात रखनी है, तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाए, चूँकि मामला न्यायालय अधीन है। वह बस इतना कह सकते है, छात्रों के जीवन के साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया जाएगा और न ही विद्यालय बंद हो रहा है।


