Friday, April 4, 2025

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के बयान पर असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने भी कह दी ये बात, जानिए क्या कहा ?

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गुवाहाटी/नई दिल्ली। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस के ताजा बयान पर असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने भी बड़ी बात कह दी है। उनके बयान को लेकर असम के मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि यूनुस के बयान को हल्के में नहीं ले सकते। मालूम हो कि भारत का सिलीगुड़ी कॉरिडोर, इसे लेकर फिर से चर्चा होने लगी है। ये सामरिक रूप से बेहद अहम है । इसे चिकन नेक भी कहते हैं। यह बहुत संकरा रास्ता है जिससे पूरा नॉर्थ ईस्ट देश के बाकी हिस्से से जुड़ता है।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद युनूस के एक बयान के बाद इस पर फिर से बहस होने लगी। सिलीगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल का 60 किलोमीटर लंबा और 21 किलोमीटर चौड़ा जमीन का हिस्सा है। इससे (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) भारत की सीमा बांग्लादेश, नेपाल से लगती है। सिक्किम, तिब्बत की चुंबी वैली और भूटान के डोकलाम का ट्राई जंक्शन इसके पास है। चीन की यात्रा पर गए यूनुस ने चीन को निवेश का न्योता देते हुए कहा था कि भारत के नॉर्थ-ईस्ट राज्य जिन्हें सेवन सिस्टर्स कहा जाता है लैंड लॉक्ड हैं। उनके पास समुद्र तक पहुंचने का रास्ता नहीं है। बांग्लादेश उस रीजन में समुद्र का एकमात्र गार्डियन है। इससे निवेश का बड़ा अवसर मिलता है।

असम के मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने कहा कि युनूस का यह बयान भारत के रणनीतिक चिकन ने कॉरिडोर से जुड़ी स्थायी संवेदनशीलता की मानसिकता को उजागर करता है। ऐतिहासिक रूप से, भारत के भीतर भी कुछ तत्वों ने इस महत्वपूर्ण गलियारे को काटने और पूर्वोत्तर को मुख्य भूमि से अलग-थलग करने की खतरनाक बातें की हैं। डॉ. शर्मा ने कहा कि चिकन नेक कॉरिडोर के नीचे और उसके चारों ओर अधिक मजबूत रेल और सड़क नेटवर्क विकसित करना जरूरी है। इसके अलावा ऐसे वैकल्पिक सड़क मार्गों की खोज को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो पूर्वोत्तर को सीधे भारत की मुख्य भूमि से जोड़ सकें और चिकन नेक की निर्भरता को कम कर सकें। उन्होंने कहा कि मोहम्मद यूनुस की इस तरह की भड़काऊ टिप्पणियों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए, क्योंकि वे गहरे रणनीतिक निहितार्थ और लंबे समय से चले आ रहे एजेंडा को दर्शाती हैं।

भारतीय सेना में डीजी इंफ्रेंट्री रहे लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी (रिटायर्ड) ने कहा कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर संवेदनशील है लेकिन कोई खतरे वाली बात नहीं है। उसके विकल्प पर काम हो रहा है, कालादान मल्टी मॉडल ट्रांजिट प्रोजेक्ट। यह प्रोजेक्ट कोलकाता से म्यांमार और फिर म्यांमार से मिजोरम तक का रास्ता है। इसमें समुद्र, नदी और जमीन तीनों रास्ते शामिल हैं। कोलकाता पोर्ट से समुद्र के रास्ते म्यांमार के सितवे पोर्ट तक का रास्ता, इससे आगे कालादान नदी का रास्ता और फिर म्यांमार से मिजोरम को जोड़ती सड़क।

हालांकि इस पर काम अभी स्लो चल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत और चीन की सेना के बीच डोकलाम में 2017 में जो 74 दिन का स्टैंडऑफ हुआ था वह सिलीगुड़ी कॉरिडोर की संवेदनशीलता को देखते हुए हुआ था। कुलकर्णी कहते हैं कि चीन भूटान में भी डोरे डालने की कोशिश करता है लेकिन इसके बावजूद हमारे भूटान के साथ रिश्ते अच्छे हैं तो हम उसे कंट्रोल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि चिकेन नेक सेंसिटिव (संवेदनशील) है लेकिन वर्नरेबल (असुरक्षित) नहीं है। वहां सब तरफ से पूरा प्रोटेक्शन है।

कुछ वक्त पहले ही भारतीय सेना के चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी कहा था कि सिलिगुड़ी कॉरिडोर हमारा कमजोर नहीं बल्कि मजबूत पक्ष है। चिकन नेक के पास भारतीय सेना का जमावड़ा तीन तरफ से है। पश्चिम बंगाल, सिक्किम और उत्तर पूर्व में तैनात सैनिकों की वजह से यह हमारा मजबूत पक्ष है। हमारी सेना किसी एक्शन या रिएक्शन के लिए पूरी तरह से तैयार है। साभार – एनबीटी

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