Saturday, April 18, 2026

सिलचर में खुलेआम मांस बिक्री पर उठे सवाल, आहत शाकाहारी समाज

  • ‎मंदिरों और विद्यालयों के आसपास हो रही पशु हत्या और मांस प्रदर्शन से आहत शाकाहारी समाज

नवरात्रि चल रहा। बड़ी संख्या में माता के भक्त व्रत रखते हैं। पूजा अर्चना चलता रहता है। ऐसे में शहर के विभिन्न हिस्सों में खुलेआम पशु हत्या और मांस की बिक्री ने शाकाहारी समाज और सभ्य नागरिकों को गहरी चिंता में डाल दिया है।

विशेषकर मंदिरों और विद्यालयों के आसपास खुलेआम मांस टांगे जाने और बिक्री की घटनाएँ न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत कर रही हैं, बल्कि बच्चों और स्थानीय शाकाहारी लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डाल रही हैं। ‎रविवार के दिन तो स्थिति और भी भयावह हो जाती है। शहर का वातावरण किसी बूचड़खाने की तरह प्रतीत होता है। खुलेआम सड़क किनारे बकरों को काटना और मांस लटकाकर बेचना आम दृश्य बन चुका है। इससे गुजरने वाले नागरिक, खासकर महिलाएं और बच्चे, मानसिक रूप से आहत होते हैं।

स्थानीय जैन और मारवाड़ी समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस स्थिति के चलते बाहर से आने वाले शाकाहारी पर्यटक शिलचर आना ही छोड़ रहे हैं। पर्यटन और व्यापार पर भी इसका सीधा असर देखा जा रहा है। नागरिकों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि मांस बिक्री के लिए निश्चित क्षेत्र (designated zones) तय किए जाएँ और धार्मिक एवं शैक्षणिक संस्थानों के आसपास इस पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाए।

सभ्य और शाकाहारी समाज का कहना है कि “हम किसी की भोजन की स्वतंत्रता का विरोध नहीं करते, परंतु सार्वजनिक स्थानों पर इस प्रकार की मांस बिक्री सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक वातावरण के लिए हानिकारक है। प्रशासन को जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।”

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