- कंचन सिंह ने कहा, चाय बागानों के जो मूल निवासी नहीं, उन्हें हटाया जाना चाहिए
चाय बागानों के श्रमिकों को जमीन का मालिकाना हक दिलाने के लिए असम विधानसभा में एक विधेयक लाया जाएगा, उसके लिए भारतीय चाय मज़दूर संघ ने इस पहल का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा का आभार व्यक्त किया है।
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चाय मज़दूर संघ के महासचिव कंचन सिंह ने आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा का विधेयक लाने का निर्णय सही मायने में श्रमिकों के साथ उचित न्याय एवं सम्मान करना है। विधेयक स्वागत योग्य है। कंचन सिंह ने मुख्यमंत्री के समक्ष कुछ मांगों को भी उठाते हुए कई सुझाव भी रखा है। मालूम हो कि असम सरकार चाय बागान के श्रमिकों को भूमि का पट्टा देने के लिए एक विधेयक लाएगी, जो विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। यह कदम उन श्रमिकों को ज़मीन का मालिकाना हक देगा जो इन बागानों में सालों से रह रहे हैं।
इस पहल का उद्देश्य श्रमिकों को दीर्घकालिक सुरक्षा और सम्मान देना है। यह विधेयक 25 नवंबर से शुरू होने वाले असम विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। इसका लक्ष्य चाय बागान श्रमिकों को उन जमीनों पर मालिकाना हक देना है, जिन पर वे पीढ़ियों से रह रहे हैं। कंचन सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा के नेतृत्व वाली सरकार ही है, जो ऐसा कदम उठाने की हिम्मत की। अब तक किसी पूर्व सरकारों ने चाय बागानों के श्रमिकों के हितों के लिए ऐसा कदम नहीं उठाया है। असम विस में कानून आएगा और श्रमिकों को भूमि पट्टा मिलने वाला है।
सीएमओ की ओर श्रमिक संगठनों को बृहस्पतिवार को बुलाया गया था। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा मौजूद रहे। कंचन सिंह ने कहा कि भारतीय चाय मज़दूर संघ, बराक घाटी, महासचिव है और प्रतिनिधिमंडल में बराक घाटी से वह हिस्सा लिए। श्रमिकों को भूमि अधिकार दिलाने वाले विधेयक का चाय मज़दूर संघ स्वागत करता है। सभी राजनीतिक दलों को इस विधेयक का समर्थन करना चाहिए। कंचन ने कहा कि कुछ ज्वलंत मुद्दों को भी उन्होंने उठाते हुए मुख्यमंत्री से समाधान करने की मांग की। चाय बागानों में अतिक्रमण से मुक्त कराया आए।
चाय बागान के जो मूल निवासी नहीं है और बागान की जमीन पर रह रहे, ऐसे लोगों को हटाने की मांग की है। बंद चाय बागानों को खोलने, वहां के श्रमिकों को भी भूमि अधिकार देने और रास्ता घाट और उन्नत करने के भी मांग को पुरजोर तरीके से रखा है। सीमा परिसीमन बाद उधारबंद इलाके में समाहित बराक नदी किनारे बसे गंगापुर ( सिलचर शहर से सटा इलाका, जो बहुत पुराना चाय बागान था ) निवासियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नागाटीला की ओर से एक सेतु निर्माण की मांग की।
उनका मानना था कि बराक नदी पर एक सेतु बन जाने से गंगापुर के निवासी सहज रूप से शहर से जुड़ जाएंगे। किसानों, छात्रों का लाभ होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उनकी बातो को सुना है और यथा उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लाए जा रहे विधेयक के संबंध में कोई अन्य सुझाव या मांग हो तो मंत्री रुपेश ग्वाला और मंत्री केशव महंत को बता सकते है। सरकार सभी के सुझाव पर विचार कर एक उचित कदम उठाएगी।


