- कांग्रेस का हिंदीभाषी उम्मीदवार पर दाव
कांग्रेस ने 3 मार्च को 42 उम्मीदवारों की सूची जारी की। सूची में बड़खोला और उधारबंद सीट शामिल है। कांग्रेस ने दोनों ही सीट पर हिंदीभाषी उम्मीदवार पर दाव चला है।
पिछले दो बार से चुनाव हार रहे पूर्व मंत्री अजीत सिंह पर पुनः भरोसा जताते हुए पार्टी ने मैदान में उतारा है । बड़खोला में डॉ अमित कलवार के रूप में एक नए चेहरे को मैदान में उतारकर कांग्रेस ने भाजपा के सामने बड़ी चुनौती रख दी है । फिलहाल भाजपा ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की है। बड़खोला और उधारबंद में भाजपा उम्मीदवार कौन होगा इसको लेकर अभी कुछ भी खुलकर सामने नहीं आया है। ऐसा माना जा रहा जल्द ही भाजपा की सूची भी सामने आना वाला है। प्रदेश भाजपा के सूत्र बता रहे है कि उम्मीदवारों के नाम फाइनल है बस घोषणा होना बाकी है ।
हिंदीभाषी, चाय बागानो के मतदाताओं में स्थिति असमंजस जैसी है। 2021 के चुनाव में उधारबंद सीट पर अजीत सिंह कम मत से पराजित हुए थे। भाजपा के मिहिर कांति सोम लगातार दूसरी जीत हासिल की थी। सिंह पुनः मैदान में होंगे। भाजपा की तरफ से उनका मुकाबला करने कौन होगा इसको लेकर मतदाताओं में चर्चा तेज है।
उधारबंद में भाजपा की ओर से अनगिनत संभावित उम्मीदवारों के चेहरे तैर रहे। पार्टी किसे टिकट थमाएगी यह देखने योग्य होगा। पूर्व विधायक राजदीप ग्वाला उधारबंद सीट पर टिकट के लिए मैराथन कर रहे। पिछले अढ़ाई महीने से इस क्षेत्र में जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे। कई अन्य चेहरे भी, जिसमें वर्तमान विधायक मिहिर कांति सोम सहित मृदुल मजूमदार कंचन सिंह कुर्मी, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, प्रसन्नजीत भट्टाचार्य सह आदि है। ये सभी संभावित उम्मीदवार भी क्षेत्र में मतदाताओं के बीच उपस्थिति के साथ डटे हुए हैं।
बहरहाल अटकलों का बाजार गर्म है । बराक चाय श्रमिक यूनियन के दो बड़े नेताओं के बीच मुकाबला हो सकता है। यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष और महासचिव राजदीप ग्वाला के बीच कांटेदार टक्कर हो सकती है। दोनों के चाय बागानो में पहुंच अच्छी है। राजदीप यूनियन नेता के तौर पर पिछले कुछ वर्षों बागानों में गहरी पैठ बनाई है। श्रमिकों के विभिन्न समस्याओं और मुद्दों को उठाते आए हैं।
अटकलों के बाजार में यह भी चर्चा चल रही है कि मंत्री कौशिक राय को लखीपुर की बजाय बड़खोला से उतारा जा सकता है। कांग्रेस ने डॉ अमित कुमार कलवार को टिकट देकर हिंदीभाषी यानी चाय बागान के मतदाताओं में सेंधमारी के लिए बड़ा दाव चला है। भाजपा इसको लेकर मंथन कर रही है। लखीपुर में मंत्री राय ने पिछले लगभग पांच वर्ष में इतने ज्यादा काम कर दिए है कि पार्टी की जीत आसान है। बड़खोला में चुनावी मुकाबला थोड़ा कठिन हों गया है। जनता के बीच चल रहे चर्चाओं पर भरोसा किया जाए, तो उनके हिसाब से मंत्री राय को बड़खोला से लड़ाया जा सकता है या उन्हें लड़ना चाहिए। राजदीप ग्वाला को लखीपुर से लड़ाने पर विचार होना चाहिए।
मंत्री राय का बड़खोला गृह क्षेत्र भी है। तपांग के वर्षांगन बड़खोला में पड़ता है। इस सीट से उनकी जीत कठिन नहीं है। फिलहाल सूत्र बताते है कि मंत्री राय लखीपुर सीट छोड़ने वाले नहीं है। वह लखीपुर से ही अपनी उम्मीदवारी चाहते हैं। एक कद्दावर नेता रूप में उनकी छवि है। जनता का मानना है कि मंत्री राय में यह काबिलियत है कि वह किसी भी सीट से अपनी जीत सुनिश्चित करने में सक्षम है। फिलहाल उन्हें कहां से उतारा जाएगा, फैसला पार्टी नेतृत्व को करना है।
बड़खोला और उधारबंद सीट पर भाजपा का उम्मीदवार कौन होगा सबकी निगाहें टिकी हुई है। दोनों ही सीटों पर हिंदीभाषी उम्मीदवार होते है, तो मतदाता किसे चुने यह बड़ा मुद्दा है। भाजपा को फिलहाल जीत सुनिश्चित के लिए कुशल नेतृत्व, विकास और केंद्र। एवं राज्य की परियोजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर भरोसा है।
योगेश दुबे


