कांग्रेस से निष्काषित भाजपा में शामिल कामलाख्य को काटिगोरा सीट पर उतारा गया
- टिकट कटने पर निहार का पार्टी के प्रति दिखा गुस्सा

असम विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अपने की सूची जारी कर दी है। बराक घाटी में 13 में से 10 सीटों पर भाजपा ने अपने उम्मीदवार दिए। बराक घाटी में खेला हो गया है। भाजपा ने अपने दो कैबिनेट मंत्रियों, कौशिक राय, कृष्णेंदु पाल, पर पुनः भरोसा जताते हुए टिकट थमाया है, लेकिन तीन सेटिंग विधायकों के टिकट काट दिए गए है। वहीं राजदीप ग्वाला का राजनीतिक वनवास खत्म हुआ, उन्हें उधारबंद सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। ग्वाला लखीपुर के पूर्व विधायक है। वर्ष 2021 के विस चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए थे। इसबार भाजपा ने उन्हें पार्टी उम्मीदवार बनाया है।
फिलहाल कौशिक राय लखीपुर और कृष्णेंदु पाल पाथरकांदी से दोबारा अपनी किस्मत आजमाएंगे। पार्टी के वर्तमान तीन विधायक क्रमशः दीपायन चक्रवर्ती ( सिलचर) , मिहिर कांति सोम ( उधारबंद ) और निहार रंजन दास ( धोलाई, एससी) के टिकट काट दिए गए हैं। पूर्व सांसद डॉ राजदीप राय को सिलचर से उम्मीदवार बनाया गया है। डॉ राय सिलचर सीट पर पूर्व विधायक भी रह चुके है। मौजूदा समय में वह पार्टी संगठन में कम कर रहे थे। पीछले साल उपचुनाव में टिकट से वंचित अमिय कांति दास को धोलाई से चुनावी मुकाबले के लिए उम्मीदवार बनाया गया है।
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए करीमगंज उत्तर के विधायक कमलाख्य दे पुरकायस्थ को काटिगोरा सीट पर बतौर उम्मीदवार उतारा गया है। बड़खोला सीट पर पूर्व विधायक किशोर नाथ को चुनाव लड़ने का अवसर मिला है। भाजपा टिकट पाने के लिए उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। सोनाई में भाजपा ने उम्मीदवार नहीं दिया है। एनडीए सहयोगी अगप के लिए छोड़ा गया है।
करीमगंज उत्तर सीट पर सुब्रतो भट्टाचार्य को टिकट दिया गया। जबकि रामकृष्ण नगर ( एससी ) सीट पर सेटिंग विधायक विजय मालाकार पर पार्टी अपना विश्वास जताते हुए उन्हें दोबारा मौका दिया है। हैलाकांदी सीट पर डॉ मिलन दास को टिकट मिला है।
बराक घाटी में भाजपा ने कछार में 6, श्रीभूमि में तीन और हैलाकांदी में एक सीट पर उम्मीदवार दिया है । भाजपा ने तीन विधायकों समेत कई वरिष्ठ नेताओं को टिकट से वंचित कर पार्टी के भीतर विरोध को भी जन्म दे दिया है। निहार रंजन दास उपचुनाव में जीत कर आए थे। डेढ़ वर्ष विधायक रहे, लेकिन पार्टी ने टिकट नहीं दिया। निहार पार्टी से खासे नाराज है। उनका कहना था कि उन्होंने धोलाई क्षेत्र के विकास के लिए काम किया, बावजूद उनकी अनदेखी हुई। उपचुनाव के लिए मोहरा के रूप में प्रस्तुत कर अब उपेक्षा कर दी गई। निहार ने पार्टी से त्याग दे दिया।
- योगेश दुबे


