Tuesday, September 8, 2026

जनजातिकरण की मांग में कोच राजबोंगशी समुदाय ने दिया धरना

भाजपा सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप

 

कछार जिले के कोच राजबोंगशी समुदाय भाजपा सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए असम में उन्हें अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी में शामिल करने की मांग की। लखीपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नारायणपुर में धरना दिया । अखिल असम कोच राजबोंगशी सम्मिलनी, कछार इकाई के बैनर तले आयोजित धरना प्रदर्शन में इस समुदाय के बड़ी संख्या में लोग, विशेषकर महिलाओं, पहुंचे और कोच राजबोंगशी समुदाय को जल्द ही आदिवासी दर्जा दिया जाना चाहिए यह मांग की ।

धरना प्रदर्शन में संस्था के युवा और महिला समिति भी हिस्सा लिया । संस्था ने मुख्यालय चिलाराय भवन को खाली करने और उत्तरी गुवाहाटी में जमीन पर एसोसिएशन को बसाने की घोषणा की है। ओबीसी प्रमाणपत्रों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को रोकने और एसोसिएशन को पूर्ण पहचान की जिम्मेदारी सौंपें जाने की मांग की । रूपसी हवाई अड्डे का नाम बहाल रखने, कोच राजबंगशियों को भूमि अधिकार, भाषा संस्कृति का संरक्षण और सभी संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित करने की भी मांग को आगे बढ़ाया ।

Advertisement

उपरोक्त संस्था के नेता सुबल राजबोंगशी, राजीव राजबोंगशी और संदीप राजबोंगशी ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार उनके संवैधानिक अधिकारों की उपेक्षा कर रही है । सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक उन्नति के लिए उनके समुदाय को जनजातिकरण का दर्जा दिया जाना चाहिए। पूर्वोत्तर में उनके समुदाय का एक ऐतिहासिक इतिहास है । उज्जवल भविष्य हेतु राज्य और केंद्र सरकार को उनकी मांगों पर ध्यान केंद्रित करना होगा। समुदाय के ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण पर भी ध्यान होगा ।

मालूम हो कि दो घंटे तक धरना प्रदर्शन हुआ। धरने में कोच राजबोंगशी के नौ गांव से लोग हिस्सा लिया । उन्होंने एसटी हमें चाहिए, नो एसटी, नो रेस्ट, भाजपा सरकार सावधान जैसे नारे लगाए। समिति महासविव ने समुदाय के अधिकारों और कई सूत्री मांगों को उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा यदि नही चेते तो आगामी समय में और तीव्र आंदोलन की धमकी दी ।

जनजातिकरण का दर्जा नहीं मिला तो, आगामी विधानसभा चुनाव समय उन्हें क्या कदम उठाना चाहिए, एक राजनीतिक निर्णय लेंगे । इस बीच, प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका धरना लखीपुर सब डिवीजन कार्यालय के सामने होना था, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं दी गई । ऐसे में जिले के एक गांव में अपनी बातों को सरकार तक पहुंचाने के लिए धरना देना पड़ा ।

Yogesh Dubey 

Popular Articles