- मुख्य वक्ता के तौर पर उपस्थित रहे असमिया साहित्य के स्वनाम धन्य व्यक्तित्व शांतनु बरुआ जी
- कार्यक्रम का संचालन सीमा सिंह स्वस्तिका ने किया
पूर्वोत्तर हिंदी साहित्य अकादमी ने वीर लाचित बोरफुकन के जन्मदिवस 24 नवंबर को गूगल मीट पर ऑनलाइन बहुभाषिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर उपस्थित थे असमिया साहित्य के स्वनाम धन्य व्यक्तित्व शांतनु बरुआ जी।
अन्य आमंत्रित वक्ताओं में थे साहित्य साधक हरि लुइटेल जी, मृदुल सहरिया जी आदि। मुख्य अतिथि के रूप में भगवती प्रसाद निदारिया उपस्थित थे। बहुभाषिक कविगोष्ठी में भाग लेने वाले कवियों में प्रमुख थे नेपाली के डॉ. दैवकी तिस्मीना ,गीता लंबू आदि। असमिया के गायत्री बरठाकुर तथा हिंदी की कवियत्रियां थी अन्नपूर्णा वाजपेई, मनीषा पॉल, सरिता सिंह, सीमा सिंह ‘स्वस्तिका’, कागो मादो, रीता सिंह सर्जना और जयंत आचार्य आदि। सभी ने अपनी कविताओं के माध्यम से लाचित बरफुकन की वीर गाथा को याद किया।
कार्यक्रम में वक्तव्य पेश करते हुए मृदुल सहरिया ने कहा कि लाचित बरफुकन केवल असम के एक वीर ही नहीं थे बल्कि वह पूरे भारत को जोड़ने वाले एक धर्मनिरपेक्ष साहसी एवं निस्वार्थ सेवक थे जो सभी के लिए अनुकरणीय हैं। कार्यक्रम के शुरुआत में काव्यश्री आत्रेय ने सरस्वती वंदना पेश की।
अकादमी की अध्यक्ष रीता सिंह सर्जना के तत्वावधान में यह बहुभाषिक काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें उत्तर प्रदेश,अरुणाचल प्रदेश,असम, मेघालय आदि राज्यों के कवियों ने भाग लिया। सचिव कल्पना देवी आत्रेय ने सभा का उद्देश्य व्याख्या किया। संचालन सीमा सिंह स्वस्तिका ने किया तथा मनीष पॉल ने धन्यवाद ज्ञापन किया।


