- ईस्ट खासी हिल्स में एचआईवीके मामलों की संख्या अब दोगुनी होकर 3,432 हो गई
- सबसे डरावनी स्थिति तो वेस्ट और ईस्ट जयंतिया हिल्स जिलों में है
मेघालय सरकार एचआईवी/एड्स के मामलों में, खासकर ईस्ट खासी हिल्स में, चिंताजनक वृद्धि को लेकर चिंता जता रही है, जहां पुष्ट मामलों की संख्या अब दोगुनी होकर 3,432 हो गई है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर तत्काल समाधान नहीं किया गया तो यह स्थिति एक व्यापक जन स्वास्थ्य संकट में बदल सकती है। मामलों में अचानक तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
सरकार की चिंता अब इतनी बढ़ गई है कि मेघालय की स्वास्थ्य मंत्री एंपरीन लिंगदोह ने साफ कहा है– “हमें अब इस समस्या को हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यह विचार कर रही है कि क्या शादी से पहले एचआईवी टेस्ट कराना जरूरी कर दिया जाए। यह बात उन्होंने गुरुवार को एक अहम बैठक के बाद मीडिया से कही। उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन तिनसॉन्ग की अध्यक्षता में ईस्ट खासी हिल्स के आठ विधायकों ने एक बैठक की, जहां यह संकट वर्तमान में सबसे अधिक गंभीर है।
हालांकि सभी विधायक इसमें शामिल नहीं हुए, लेकिन स्वास्थ्य मंत्री अम्पारीन लिंगदोह ने इसे एक महत्वपूर्ण शुरुआत बताया। सरकार इसी तरह के जिला-स्तरीय परामर्श आयोजित करने की योजना बना रही है, और विधानसभा अध्यक्ष के नेतृत्व में अगली बैठक पश्चिमी गारो हिल्स में आयोजित होने की उम्मीद है।बैठक के दौरान लिंगदोह ने कहा, “यह एक अच्छा रुझान नहीं है। यह एक संभावित स्वास्थ्य आपातकाल की ओर इशारा करता है जो पूरे राज्य में समुदायों को अपनी चपेट में ले सकता है।”एचआईवी से संबंधित मौतों के आंकड़े स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं, हाल के वर्षों में कम से कम 159 मौतें दर्ज की गई हैं, जिसका मुख्य कारण एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी (एआरटी) कार्यक्रम के तहत इलाज न मिल पाना है।स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ये बीमारी और फैल सकती है।
उन्होंने ये भी जोड़ा कि इस फैसले का मकसद किसी को शर्मिंदा करना नहीं है, बल्कि समाज को सुरक्षित रखना है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि केवल ईस्ट खासी हिल्स जिले में एचआईवी के मामले दोगुने होकर 3,432 तक पहुंच चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से सिर्फ 1,581 मरीज ही इलाज करवा रहे हैं। बाकी या तो इलाज के लिए लौटे ही नहीं या बीच में छोड़ दिया। करीब 681 मरीजों ने तो जांच के बाद दोबारा अस्पताल आना ही बंद कर दिया। आंकड़े दिखाते हैं कि राज्य में न सिर्फ बीमारी बढ़ रही है, बल्कि मरीजों को लगातार इलाज में बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
मीटिंग के दौरान मंत्री लिंगदोह ने कहा कि अभी हमने सिर्फ ईस्ट खासी हिल्स की बात की है, लेकिन सबसे डरावनी स्थिति तो वेस्ट और ईस्ट जयंतिया हिल्स जिलों में है। वहां के आंकड़े इतने खतरनाक हैं कि अब एचआईवी को एक गंभीर बीमारी नहीं, बल्कि एक सामाजिक आपदा की तरह देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अब समय आ गया है कि हम इस बीमारी को जड़ से पकड़ें, वरना बहुत देर हो जाएगी। राज्य सरकार इस बात पर गंभीरता से सोच रही है कि शादी से पहले एचआईवी टेस्ट को जरूरी बना दिया जाए।
मंत्री लिंगदोह का कहना है, “अगर गोवा ऐसा कर सकता है, तो मेघालय क्यों नहीं?” उनका मानना है कि इससे कम से कम नई शादियों में बीमारी फैलने की संभावना को रोका जा सकेगा। हालांकि ये कदम पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया से होकर निकलेगा. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और लीगल एक्सपर्ट्स की मदद ली जाएगी ताकि कोई भी कानून जल्दबाज़ी में और बिना सोचे-समझे न बनाया जाए।विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और यूएनएडीएस जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस बात के खिलाफ हैं कि किसी पर एचआईवी टेस्ट ज़बरदस्ती कराया जाए।
उनका कहना है कि टेस्ट तभी होना चाहिए जब कोई व्यक्ति खुद इसके लिए तैयार हो और उसे सारी जानकारी दे दी गई हो। कई विशेषज्ञों का मानना है कि शादी से पहले एचआईवी टेस्ट की अनिवार्यता से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि लोग पहले ही शारीरिक संबंध बना चुके हो सकते हैं। इसलिए असली ज़रूरत यह है कि लोगों को जानकारी दी जाए, जागरूक किया जाए और उन्हें डर के बजाय भरोसे के साथ टेस्ट और इलाज के लिए प्रेरित किया जाए। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि अब तक 159 ऐसे लोगों की मौत हो चुकी है जिन्होंने एचआईवी का इलाज शुरू तो किया, लेकिन बीच में ही छोड़ दिया।
मंत्री लिंगदोह का कहना है, एचआईवी कोई मौत की सजा नहीं है। इसे कैंसर या टीबी की तरह कंट्रोल किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए ज़रूरी है कि लोग डरें नहीं, बल्कि सामने आएं और इलाज करवाएं।” उन्होंने बताया कि इलाज के लिए एक तय प्रक्रिया होती है जिसे फॉलो करना होता है, और अगर मरीज समय पर दवाइयां लेता है तो वह लंबे समय तक सामान्य जिंदगी जी सकता है। मंत्री ने कहा कि समाज में आज भी एचआईवी को लेकर डर और शर्म है। बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर उन्होंने टेस्ट कराया और उन्हें पॉजिटिव पाया गया, तो लोग उन्हें अलग नज़र से देखेंगे।
इसी वजह से बहुत से लोग जांच नहीं करवाते। उन्होंने कहा, “यही सबसे डरावनी बात है कि हमारे बीच बहुत से लोग ऐसे हो सकते हैं जिन्हें खुद भी नहीं पता कि वे एचआईवी पॉजिटिव हैं। जब तक हम उन्हें पहचान नहीं पाएंगे, तब तक हम इस बीमारी को नहीं रोक पाएंगे। राष्ट्रीय स्तर पर, मेघालय एचआईवी प्रसार में मिज़ोरम, नागालैंड, मणिपुर, मध्य प्रदेश और तेलंगाना के बाद छठे स्थान पर है। पूर्वोत्तर में, मेघालय शीर्ष तीन में नहीं है, लेकिन प्रमुख जिलों में बढ़ते रुझान चिंता का विषय हैं।


