संबोधित करते हुए पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ जी
- सनातनी हिन्दुओं अपने पुरुषार्थ पर भरोसा करो तभी बचोगे
पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा- जब से सृष्टि की रचना हुई तब से है सनातन, यह पंथ नहीं, धर्म दुनिया में सिर्फ एक ही धर्म है, सनातन। इसके उदय के कोई प्रमाण नहीं। मगर इस्लाम, क्रिश्चियन आदि तथाकथित धर्मों के जन्म के प्रमाण हैं। जो जन्मे हैं उन्हीं का अंत भी होगा। मगर सनातन धर्म अजन्मा है। जो जन्मा ही नहीं वह अमर है। यह कहना है प्रसिद्ध राष्ट्रवादी विचारक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ का। उन्होंने यह बल देते हुए कहा कि सनातनी हिन्दुओं अपने पुरुषार्थ पर भरोसा करो तभी बचोगे।
वह रविवार को सिलचर, मेहरपुर, सनसिटी में स्थित “हंसी ख़ुशी” सभागार में हिन्दीभाषी चाय जनसमुदाय मंच द्वारा “पूर्वोत्तर भारत में सनातन धर्म पर संकट, समस्या और समाधान” विषय पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि सनातन का अर्थ साइंस है। इसमें धर्म का तात्पर्य माता-पिता, गुरु आदि धर्म से है। जातियां कर्म प्रधान थीं। करीब एक हजार सालों में इसे तोड़-मरोड़ा गया। हजारों साल पहले ऋषि-मुनियों ने जो बातें धर्मग्रंथ, वेद, पुराण, उपनिषदों में कहीं थीं, अब नासा उसे सही ठहरा रहा है।
पृथ्वी से चांद तक की दूरी, धार्मिक प्रतीकों की वैज्ञानिक अवधारणा है। जिस कालखंड में यह जानकारियां दी गई उस दौरान अगर लोगों को सीधे-सीधे समझाते तो शायद वह माना नहीं जाता। इसलिए उन्होंने इसे प्रतीकों से जोड़ा। पूजा-पाठ से जोड़ा। प्रणाम, चरण स्पर्श, तुलसी, पीली की पूजा, नदियों को मां कहने के पीछे यही वजह रही। मगर तथाकथित धर्मों के लोग इसे हिंदू धर्म को पूजावादी बताते हैं। कहा जाता है कि ‘इस्लाम इज द रिलीजन ऑफ पीस’, इसमें पीस का अर्थ क्या है, यह अब तक तमाम लोग नहीं समझ सके। इसलिए सारे धर्म बराबर होने की बात गलत है। जो सभी धर्म समान बताते हैं वे लालची लोग हैं। जिनके लिए निज हित राष्ट्र से ऊपर है।
राष्ट्र और देश के कथन में काफी अंतर है। राष्ट्र विस्तृत संकल्पना और देश भूमि का टुकड़ा है। उन्होंने आगे कहा कि हम ब्राह्मण, ठाकुर, शूद्र, वैश्य सब घर की चारदीवारी के अंदर तक, बाहर सड़क पर निकलने के बाद हमारी पहचान केवल सनातनी होनी चाहिए। पुष्पेंद्र जी बेबाकी से बात को रखा। पुष्पेंद्र जी ने कहा कि मुंबई, बंगाल और दिल्ली के कुछ शिक्षण संस्थानों में जो पुस्तक पढ़ाई जा रही है। उनमें दिए गए संदर्भ गलत हैं। मगर सालों से इनका कोई विरोध नहीं हो रहा। हिंदू सो रहा है, उसे जागना होगा।
पुष्पेंद्र ने कहा कि हिंदू नवविवाहित जोड़े अब ताजमहल घूमने जाते हैं। जहां क्लिंटन ने फोटो खिंचवाई थी, वहीं फोटो खिंचवाते हैं। ताजमहल किसने बनवाया और क्या किया यह सभी को पता है। ऐसी जगह जाना ही नहीं चाहिए। अगर घूमने ही जाना है तो रामसेतु जाना चाहिए। प्रभु राम और सीता के प्रेम का प्रतीक है। भगवान राम की पूरी कहानी को पढ़े – समझे। आज कल के तथाकथित साधु संत व कथावाचक भगवान राम की पूरी कहानी नहीं बताते। हिंदू जड़ से परे हटकर पत्तों को पानी दे रहे हैं। जड़ को अगर पानी दें तभी हिंदू धर्म सुरक्षित हो सकेगा।
वर्तमान में युवा डिग्री, पद, प्रतिष्ठा, कपड़े जिनके अच्छे हों, उन्हें ज्ञानवान समझते हैं। जबकि शिक्षा और ज्ञान का कोई तालमेल नहीं है। पुष्पेंद्र ने कहा कि हिंदुओं के पास संभलने के लिए अब वक्त कम है। आने वाली पीढ़ियों को बचाना है तो नई पीढ़ी को सच बताना ही होगा। उन्हें संविधान की अवधारणा, देश की आजादी के पीछे का षड्यंत्र, महात्मा गांधी और पंडित जवाहर लाल नेहरू की कूटनीति, हिंदुओं को धर्म से भटकाने की साजिश आदि का सच बताना होगा। देश किसके हाथों में सुरक्षित है, इसे पहचानने की क्षमता पीढ़ियों को देनी होगी ताकि देश की बागडोर सही हाथों में रहे।
पुष्पेंद्र जी ने राजनीति पर कटाक्ष किया। जनप्रतिनिधियों, नेताओं से मूल मुद्दे पर काम करने के लिए दबाव बनाए। सनातनी संगठित हो जाए, तो हर वह कार्य होगा, जो हमारे में है। कांग्रेस, विशेष कर नेहरू परिवार पर जमकर हल्ला बोले, कहा, एक व्यक्ति ने अपनी महत्वाकांक्षी के लिए कई ऐसे अनैतिक काम किए जिसे स्वीकार्य नहीं किया जा सकता। हिंदू जगेगा तो राष्ट्र का निर्माण होगा। आश्चर्य जताते हुए कहा- लोग 2 किलो चावल-गेहूं के बदले ऐसी सरकार चुनते हैं, जिससे भविष्य सुरक्षित नहीं।
मालूम हो कि हिन्दीभाषी चाय जनसमुदाय मंच के अध्यक्ष उदय शंकर गोस्वामी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में कार्यकारी उपाध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह, असम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राजीव मोहन पंत, एनआईटी, सिलचर के डायरेक्टर प्रो. दिलीप कुमार वैश्य, यूएसटीएम विश्वविद्यालय से प्रो. जीडी शर्मा, विश्व हिंदू परिषद् के दक्षिण असम प्रान्त के अध्यक्ष सांतनु नायक, रोजकांदी चाय बागान के महाप्रबंधक ईश्वर भाई उबाड़िया, भारतीय चाय मज़दूर संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक उरांग की उपस्थिति रही। इसके पूर्व मुख्य अतिथि पुष्पेंद्र जी मंच पर उपस्थित अन्य अतिथियों के साथ दीप प्रज्वलित किए। भारत माता की प्रतिमा पर पुष्पांजलि की। अंजनी दीक्षित दीप मंत्र व स्वस्ति वाचन किया।
मेघा कानू ने गणेश वंदना पर नृत्य किया। जबकि हनुमान चालीसा पाठ और स्वागत गीत सबिता जायसवाल, बिंदु सिंह, किरण त्रिपाठी, कमला सोनार, सुपर्णा तिवारी, अंजनी दीक्षित ने किया। मंच के अध्यक्ष उदय शंकर गोस्वामी ने मुख्य अतिथि पुष्पेंद्र जी को अंग वस्त्र, जपी और असम राज्य चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। मानपत्र का पाठ मनीष पांडेय ने किया।
बराक हिंदी साहित्य समिति, टी वन फाउंडेशन, असम विश्वविद्यालय समेत विभिन्न संगठनों द्वारा अंग वस्त्र भेंट कर पुष्पेंद्र जी का सम्मान किया गया। डॉ. रंजन सिंह, कंचन सिंह, प्रदीप गोस्वामी, युगल किशोर त्रिपाठी, रंजीत साहू, प्रमोद जायसवाल, जयप्रकाश गुप्ता, बिप्लव राय, राजीव कुमार राय, मानव सिंह आदि द्वारा आमंत्रित अतिथियों को अंग वस्त्र भेंट कर सम्मान कराया गया। स्वागत भाषण उदय शंकर गोस्वामी और धन्यवाद ज्ञापन अवधेश कुमार सिंह ने किया। योगेश दुबे ने कुशल संचालन किया। पुष्पेंद्र जी को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
सिलचर के विधायक दीपायन चक्रवर्ती, उधारबंद के विधायक मिहिर कांति सोम, भाजपा के जिला अध्यक्ष रूपम साहा, महासचिव अमिताभ राय, गोपाल राय, उद्योपति महावीर प्रसाद जैन, राजेंद्र अग्रवाल, परमेश्वर लाल काबरा, दिलीप कुमार, ध्रुव नारायण गुप्ता, प्रदीप कुर्मी, रूपतारा दीक्षित, नीलम गोस्वामी, अनंतलाल कुर्मी सहित अलग – अलग क्षेत्रों, स्वास्थ्य, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक, सांस्कृतिक संगठनों से प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। बराक घाटी के चाय बागानों से भी अच्छी संख्या सुनने के लिए आई थी।
योगेश दुबे