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पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन का 17वां दो दिवसीय प्रांतीय अधिवेशन सिलचर में आरंभ, रविवार को समापन

अखिल भारतीय मारवाड़ी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार लोहिया ने कहा कि राष्ट्र की अर्थव्यवस्था और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में मारवाड़ी समाज का अभूतपूर्व योगदान है। सिलचर में पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन के 17वें दो दिवसीय प्रांतीय अधिवेशन के खुला सत्र को संबोधित करते हुए उपरोक्त बात कही।
शाम को राजीव भवन में आयोजित खुला सत्र, सम्मान और सांस्कृतिक समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मारवाड़ी समाज के लोग देश-विदेश में जहां भी रहते हैं, अपनी संस्कृति के प्रचार-प्रसार में मारवाड़ी समाज का अभूतपूर्व योगदान है। मारवाड़ी समाज के लोग देश-विदेश में जहां भी रहते हैं, अपनी संस्कृति के आचार – व्यवहार का ध्यान रखते हैं। उद्यमशीलता और दानशीलता से विशिष्ट पहचान बनाई है।

मारवाड़ी समाज अहिंसक, शाकाहारी, परिश्रमी है। मारवाड़ी समाज की पहचान पूरे विश्व में है। वहीं सम्मेलन के गठन के संबंध में जानकारी उन्नत की। सम्मेलन का उदय ही असम की धरती पर हुआ है। संगठन जनसेवा कर रही है। सामाजिक कुरीतियों को दूर करने पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम अभियान चलाया। भ्रूण हत्या के खिलाफ बड़ा अभियान किया। शिक्षा पर अधिक जोर दिया और बेटियों को शिक्षित बनाया जा रहा। सिलचर में आयोजित अधिवेशन से अभिभूत हैं। आठ लाइन कविता में समारोह की प्रशंसा की। सम्मेलन सदस्यों ऊर्जा भरते हुए कहा कि मारवाड़ी जीरो से हीरो बने है।

राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश पति तोदी ने कहा हम राजनीति के क्षेत्र पीछे नहीं रहे हैं। देश के विभिन्न राज्यों में राजनीति में सक्रिय रूप से जुड़े हैं। बड़ी संख्या में विधायक मारवाड़ी समाज से है। हम मजबूत स्थिति में हैं। पूर्वोत्तर के प्राकृतिक सौंदर्य देखने के लायक है। पर्यटन की अपार संभावना है। सत्र में एक और प्रमुख पदाधिकारी मधुसूदन सिकरिया ने कहा कि राष्ट्रीय अधिवेशन में जब भी शिरकत करते हैं, तो पूर्वोत्तर सर्वश्रेष्ठ प्रांतों में से एक के रूप चर्चा में रहता है। पूर्वोत्तर इकाई बहुत अच्छा काम कर रही।

इसके पूर्व मंच पर राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार लोहिया, महामंत्री कैलाश पति तोदी मधुसूदन सिकरिया, पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष कैलाश काबरा, महामंत्री विनोद लोहिया सह अशोक कुमार अग्रवाल, ओमप्रकाश खंडेलवाल, विनोद गोधा सहित सिलचर मारवाड़ी सम्मेलन के स्वागत अध्यक्ष बुधमल वैद, सिलचर शाखा अध्यक्ष मूलचंद वैद, महिला शाखा अध्यक्ष सुंदरी देवी पाटवा को विराजमान कराया गया। मंच पर आसीन अतिथियों को साफा पहनाया गया। राजस्थानी अंग वस्त्र और मोमेंटो प्रदान कर सम्मान किया गया। बुधमल वैद ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि सिलचर की शांत एवं सौम्य धरती पर सम्मेलन का अधिवेशन का आयोजन गर्व की बात है।

उन्होंने पूर्वोत्तर के अलग अलग स्थानों से पहुंचे अतिथियों का स्वागत किया। मूलचंद वैद ने कहा कि एक समय था कि लोग सिलचर में अपनी बेटियों का व्याह नहीं करते थे,लेकिन आज अधिवेशन हो रहा। सिलचर समिति अच्छा काम कर रही। बराक घाटी के दो प्रमुख शहरों लखीपुर, बदरपुर के रूप में दो नई समिति की घोषणा हुई। सुंदरी देवी पाटवा ने कहा कि एक एक व्यक्ति से समाज का गठन होता है। संगठित होकर रहना है। समाज अच्छा है व्यक्ति अच्छा है। प्रांतीय कार्यकारिणी का भी सम्मान हुआ।

शिक्षा के क्षेत्र में स्व. धर्मचंद शिक्षा पुरस्कार डॉ. सुनीता अग्रवाल, साहित्य एवं सांस्कृतिक समन्वय के क्षेत्र में स्व. नंदकिशोर माहेश्वरी पुरस्कार उमेश जी, राजनीति के क्षेत्र में स्व. मुरलीधर सुरेका पुरस्कार विजय खेमानी, पत्रकारिता के क्षेत्र में जीएल अग्रवाल पुरस्कार ओंकार पारीख, उत्कृष्ट संस्था के क्षेत्र में श्री मारवाड़ी हिंदी पुस्तकालय और रूपकुंवर ज्योति प्रसाद अग्रवाल लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार मरणोपरांत स्व. शुभकरण जी शर्मा को दिया गया।

मालूम हो कि सुबह शहर के एक रिसॉर्ट में आयोजित अधिवेशन की शुरुआत झंडोत्तोलन से हुआ। विदित हो कि मारवाड़ी सम्मेलन,सिलचर शाखा और मारवाड़ी सम्मेलन,सिलचर महिला शाखा के आतिथ्य में अधिवेशन हो रहा। दीप प्रज्वलन में पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष कैलाश काबरा, महामंत्री विनोद लोहिया, मारवाड़ी सम्मेलन, सिलचर शाखा के अध्यक्ष मूलचंद वैद, मंत्री पवन राठी, सिलचर महिला शाखा की अध्यक्षा सुंदरी देवी पाटवा, मंत्री हीरा लाल अग्रवाल, स्वागत अध्यक्ष तथा मुख्य प्रायोजक बुधमल वैद, स्वागत मंत्री प्रदीप सुराणा, सह प्रायोजक महावीर प्रसाद जैन, बिमल गोधा सहित प्रदेशीय कारकारिणी समिति के पदाधिकारियों की उपस्थिति रही।

पूर्वोत्तर मारवाड़ी सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार लोहिया, राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश पति तोदी भी हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रांतीय अध्यक्ष कैलाश काबरा ने सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने, मद्यपान-मुक्त वैवाहिक कार्यक्रम, व्याह लगन दिन में करने सह अनेक सुझावों को रखा। उनका मानना था कि सनातन संस्कृति पर जोर देना है। शादी समारोह दिन में होने से वैवाहिक कार्यक्रम मद्यपान मुक्त और खर्च का बोझ भी घटेगा। उन्होंने कहा कि असम में तेजी से विकास हो रहा।

ऐसा लग रहा अगले पांच – दस वर्षों में बहुत आगे बढ़ जाएगा। ऐसे में समाज के जो युवा पढ़ लिख कर आते है, उन्हें असम में ही आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देना चाहिए। समाज के उद्यमी इस दिशा में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। सम्मेलन स्वयं समाज के उद्योगपतियों, व्यापारियों से बातचीत कर पहल को सार्थक करने पर ध्यान दिया जाएगा। वहीं मारवाड़ी समाज जो अपने लड़के – लड़कियों की शादी समाज के बीच कर रहे, इसमें कोई बुराई नहीं है। अग्रवाल समाज जैन समाज में और माहेश्वरी समाज अग्रवाल समाज में शादी कर रहे तो समर्थन किया जाना चाहिए। मध्यस्थता की कोई ज़रूरत नहीं है।
वह स्वयं आगे बढ़कर रिश्ते की बात कर अपने बच्चों की शादी कर सकते है। इसका लाभ यह होगा कि मारवाड़ी समाज की लड़कियां कुंवारी नहीं बैठी रहेंगी। उन्होंने सांगठनिक समितियों के विस्तार, गतिविधियों, उपलब्धियों समेत सिलचर मारवाड़ी भवन की स्थापना हेतु विचार प्रकट किए। उल्लेखनीय है कि अधिवेशन में लगभग 250 प्रतिनिधि हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। सिलचर मारवाड़ी सम्मेलन के सभी इकाइयां अधिवेशन को सफल बनाने में सहयोग कर रहे ह। इस दो दिवसीय अधिवेशन का समापन आगामी कल रविवार को होगा।
योगेश दुबे



झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन में बहुत सी अनियमितताएं दिख रही है, जांच करने पर संभव है और भी गड़बड़ी सामने आए। गलत तरीके से आमसभा एवं चुनाव करवाने का प्रयास किया जा रहा है।
इतना होने पर भी, राष्ट्रीय पदाधिकारियों की चुप्पी हतप्रभ करने वाली है, शर्मनाक है।
Accha ji