- बराक वैली चाय जनगोष्ठी उन्नयन समिति लखीपुर में 19 चाय बागानों में कर रहा करम पूजा सम्मेलन
लखीपुर विधानसभा क्षेत्र के देवान चाय बागान में करम पूजा पर नाच घर में भव्य सम्मेलन का आयोजन किया गया। बराक वैली चाय जनगोष्ठी उन्नयन समिति द्वारा आयोजित सम्मेलन में समिति के अध्यक्ष डॉ. रतन कुमार, साधारण संपादक प्राण ज्योति मिश्रा, मंत्री कौशिक राय के प्रतिनिधि के रूप में मौजूद संजय ठाकुर, जिला परिषद सदस्य बिजोयेता महतो, संपादक दुलन बाउरी सहित स्थानीय चाय बागान के प्रबंधन व अन्य की उपस्थिति रही।
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रतन कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि चाय बागानों में करम पूजा का आयोजन कम होने लगे थे। चाय बागनों में युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे थे। लेकिन मंत्री कौशिक राय ने करम पूजा को चाय बागानों में पुनर्जीवित कर दिया है। इस बार लखीपुर में 19 चाय बागानों में करम पूजा का आयोजन बराक वैली चाय जनगोष्ठी उन्नयन समिति द्वारा किया जा रहा। गत 3 सितंबर को शुरू हुआ था। आयोजन का सिलसिला जारी है। उनका संगठन चाय बागान के श्रमिकों के हितों के लिए काम कर रही है।
लखीपुर में कौशिक राय के विधायक बनने के बाद से क्षेत्र के चाय बागानों की भाषा, संस्कृति को आगे बढ़ाया जा रहा है। करम पूजा से लेकर टुसु पूजा तक के आयोजन हो रहे। सभी चाय बागानों में इसका आयोजन हो रहा और युवा पीढ़ी को उनके पूर्वजों की संस्कृति को जीवित रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है। मालूम हो कि करम पूजा प्रकृति और समुदाय का सम्मान करने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व चाय समुदाय के अस्तित्व, आस्था और समुदाय की गाथा का प्रतीक है, जो उन्हें अपनी जड़ों और प्रकृति से जोड़ता है।

यह परंपरा चाय के बागानों के फलते-फूलते रहने के साथ-साथ फलती-फूलती रहती है। संक्षेप में कहा जाए, तो चाय बागानों में करम पूजा एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन है जो प्रकृति की लय, सामुदायिक एकता और चाय समुदायों की समृद्ध विरासत का उत्सव मनाता है। पारंपरिक झुमुर नृत्य और गीतों का आयोजन किया जाता है। संजय ठाकुर और बिजोयेता महतो ने अपने संबोधन में मंत्री कौशिक राय का जिक्र किया और कहा कि लखीपुर के समस्त चाय बागानों के श्रमिकों के उत्थान और शिक्षा, स्वास्थ्य, क्रीड़ा, सांस्कृतिक क्षेत्र में विकास करने के साथ – साथ युवाओं को आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा।
बराक वैली चाय जनगोष्ठी उन्नयन समिति के संपादक दुलन बाउरी ने करम पुजा सम्मेलन पर विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए कहा कि,असम में चाय जनजाति समुदाय द्वारा मनाई जाने वाली करम पूजा एक महत्वपूर्ण कृषि उत्सव है, जो भाद्रपद (अगस्त-सितंबर) के महीने में भादो एकादशी तिथि से मनाया जाता है। यह पृथ्वी माता को समर्पित है, और कृषि समृद्धि और परिवारों की खुशहाली की कामना के लिए मनाई जाती है।
इस त्योहार में करम वृक्ष की पूजा की जाती है, जिसे समुदाय पवित्र मानता है। इसमें नृत्य, गीत और पारंपरिक अनुष्ठान शामिल होते हैं, और यह युवावस्था, शक्ति और प्रकृति की प्रचुरता का प्रतीक है। हमारे बराक घाटी के विभिन्न चाय बागानों में भाद्रपद महीने में पूरी श्रद्धा और मर्यादा के साथ करम पूजा का पर्व मनाया जाता है। इस अवसर पर व्रती लोग श्रद्धा के साथ कदम वृक्ष के छांव में करम पूजा का आयोजन करते हैं।
कहीं कहीं वृक्ष के अभाव में कदम के टहनी लाकर उसे स्थापित किया जाता है और पूजन किया जाता है। इस कड़ी में चाय बागान के लोगों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक झुमुर नृत्य, गीत का आंनद उठाया जाता है। भादो एकादशी से एक दिन पहले युवा समूह जंगल में जाते हैं और करम वृक्ष की शाखाएं, फल और फूल इकट्ठा करते हैं, जिसे वे सिंदूर और चावल के गुंडियों से चिह्नित करते हैं।करमैती (व्रती लड़कियां) नदी से बालू लाती हैं और बालू भरी टोकरी में बीज बोकर सात धान्य (जैसे गेहूं, चना आदि) उगाती हैं, जिन्हें ‘जावा’ कहते हैं।
योगेश दुबे / चंद्रशेखर ग्वाला


