Saturday, April 18, 2026

लखीपुर विधानसभा क्षेत्र के दिलखुश चाय बागान में करम पूजा सम्मेलन का हुआ भव्य आयोजन 

  • आदिवासी चाय जनगोष्ठी करम पूजा एवं सांस्कृतिक सम्मेलन, केंद्रीय समिति, बराक उपत्यका, ने किया समारोह

कछार जिले के लखीपुर विधानसभा क्षेत्र में चाय बागानों में करम पूजा मनाई गई जा रही। चाय श्रमिकों से जुड़े विभिन्न संगठनों द्वारा विविध चाय बागानों में करम पूजा का आयोजन चल रहा। इस क्रम में गत कल बुधवार की देर शाम लखीपुर क्षेत्र के दिलखुश चाय बागानों में करम पूजा पर भव्य समारोह हुआ।

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चाय बागान के श्रमिकों और उनके परिवारों की उपस्थिति रही। बच्चियों ने झुमुर नृत्य किया। चाय बागान की पारंपरिक लोक – संस्कृति को आगे बढ़ाया गया। दिलकुश चाय बागान में आदिवासी चाय जनगोष्ठी करम पूजा एवं सांस्कृतिक सम्मेलन, केंद्रीय समिति, बराक उपत्यका ने समारोह किया। उक्त समारोह में पूर्व विधायक तथा बराक चाय श्रमिक यूनियन के साधारण संपादक राजदीप राय, भाजपा नेता और राज्य के मंत्री एवं लखीपुर विस क्षेत्र के विधायक कौशिक राय के प्रतिनिधि के रूप में संजय ठाकुर, पूर्व मंत्री अजीत सिंह समेत अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही।

विविध कार्यक्रम हुए। आमंत्रित अतिथियों का भव्य एवं चाय बागान की संस्कृति अनुरूप स्वागत एवं सम्मान भी हुआ। मंच पर आसीन अतिथियों ने करम पूजा और चाय बागान की भाषा – संस्कृति सहित अन्य कई प्रमुख विषयों पर विचार प्रकट किए। मालूम हो कि करम पूजा प्रकृति और समुदाय का सम्मान करने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह उत्सव कृषि समृद्धि, सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देता है।

इस दौरान पारंपरिक झुमुर नृत्य और गीतों का आयोजन किया जाता है। करम वृक्ष की एक शाखा को पूजा के दौरान पवित्र माना जाता है, जिसे ‘करम शाखा’ कहते हैं।  यह त्योहार ‘माँ धरती’ और करम देवता को समर्पित है, जो भरपूर फसल और पारिवारिक कल्याण के लिए प्रार्थना करते हैं। यह चाय जनजाति की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है और समुदायों को एक साथ लाता है। यह चाय जनजाति की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है और समुदायों को एक साथ लाता है।

झुमुर नृत्य: रात भर ढोल और मदल की थाप पर झुमुर नृत्य किया जाता है, जो सामुदायिक जीवन और खुशी का प्रतीक है। इसके बाद समुदायों द्वारा नृत्य और गायन का आयोजन किया जाता है। यह पर्व चाय समुदाय के अस्तित्व, आस्था और समुदाय की गाथा का प्रतीक है, जो उन्हें अपनी जड़ों और प्रकृति से जोड़ता है। यह परंपरा चाय के बागानों के फलते-फूलते रहने के साथ-साथ फलती-फूलती रहती है। संक्षेप में कहा जाए, तो चाय बागानों में करम पूजा एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन है जो प्रकृति की लय, सामुदायिक एकता और चाय समुदायों की समृद्ध विरासत का उत्सव मनाता है।

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