- कार्यक्रम में हिंदी भाषा के शैक्षणिक, साहित्यिक एवं सामाजिक पक्षों पर गंभीर विमर्श हुआ।
विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर बराक हिंदी साहित्य समिति, शिलचर की ओर से हिंदी भवन परिसर में स्वर्गीय प्रमिला गोस्वामी स्मृति अकादमिक संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय था— “बराक घाटी में हिंदी की दशा और दिशा”। कार्यक्रम में हिंदी भाषा के शैक्षणिक, साहित्यिक एवं सामाजिक पक्षों पर गंभीर विमर्श हुआ। कार्यक्रम का प्रारंभ समिति के अध्यक्ष उदय शंकर गोस्वामी की अध्यक्षता में प्रदीप प्रज्वलन तथा हनुमान चालीसा पाठ के साथ हुआ।

सुप्रिया चौबे ने दीप प्रज्वलन मंत्र एवं स्वस्तिवाचन पाठ किया हैं। हैं। कार्यक्रम तीन सत्रों में अनुष्ठित किया गया। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में गुरु गुरूचरण विश्वविद्यालय, शिलचर के कुलपति प्रो. निरंजन रॉय को सम्मानित किया गया। उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा कि हिंदी राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन से भविष्य में और अधिक विद्यार्थियों को हिंदी अध्ययन का अवसर मिलेगा।

बराक हिंदी साहित्य समिति के अध्यक्ष श्री उदय शंकर गोस्वामी ने विश्व हिंदी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसकी पृष्ठभूमि 1975 में नागपुर में आयोजित प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन से जुड़ी है तथा वर्ष 2006 से इसे औपचारिक रूप से विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। संगोष्ठी के संयोजक एवं वुमेनस कालेज, शिलचर के प्राचार्य डॉ. सुजीत तिवारी ने अपने वक्तव्य में संगोष्ठी के उद्देश्यों, हिंदी अध्ययन के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं, तथा बराक घाटी के विद्यालयों और महाविद्यालयों में हिंदी पढ़ने-पढ़ाने से जुड़ी चुनौतियों और कठिनाइयों पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य नई पीढ़ी को इन मुद्दों से अवगत कराना है, ताकि सार्थक समाधान की दिशा में ठोस पहल हो सके। कार्यक्रम में अनेक प्रतिष्ठित शिक्षाविदों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें प्रो. पीयूष पांडेय (निदेशक, आईक्यूएसी एवं प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी, असम विश्वविद्यालय), प्रो. रामशंकर (सांख्यिकी विभाग, असम विश्वविद्यालय), सुरेंद्र उपाध्याय (हिंदी अधिकारी, असम विश्वविद्यालय) तथा जवाहर नवोदय विद्यालय, पैलापूल के प्राचार्य विश्वास कुमार कुमार राणा प्रमुख रहे।इस अवसर पर आमंत्रित वक्तव्य डॉ. आकाश वर्मा, अध्यक्ष, हिंदी विभाग, असम विश्वविद्यालय, शिलचर द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसमे पूर्व अध्यक्ष परमेश्वर लाल काबरा ने भी अपना भाषण रखा।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना एवं हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ से हुआ। इस अवसर पर वलार्क प्रकाशन द्वारा प्रकाशित तीन पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया, जिनमें एक सुप्रसिद्ध साहित्यकार अशोक वर्मा द्वारा संपादित कपिल उपाध्यायजी की कविताओं का संकलन भी शामिल था। समिति द्वारा हिंदी के प्रचार-प्रसार में निरंतर सेवा देने के लिए श्री दिलीप कुमार सहित पाँच विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। दिलीप कुमार ने बराक घाटी में हिंदी की विकास यात्रा पर प्रेरक विचार प्रस्तुत किए।

साथ ही, असम सरकार के ‘युवा लेखक पुरस्कार’ से सम्मानित रचनाकारों को भी मंच से अभिनंदित किया गया। समिति के सचिव प्रदीप कुमार कुर्मी ने जानकारी दी कि किस प्रकार समिति के प्रयासों से पुरस्कार श्रेणी में हिंदी भाषा को सम्मिलित कराया गया। अकादमिक सत्र में शोध-आधारित उत्कृष्ट पत्रों का पाठ हुआ, जिसकी अध्यक्षता प्रो. आकाश वर्मा, प्रो. रामशंकर एवं श्री सुरेंद्र उपाध्याय ने संयुक्त रूप से की। सत्र में विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षाविदों और शोधार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही।

कार्यक्रम में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ गीत एवं नृत्य भी आकर्षण का केंद्र रहीं। समिति के महासचिव प्रदीप कुमार कुर्मी, संगोष्ठी के मुख्य संयोजक डॉ. सुजीत तिवारी, सह – संयोजक युगल किशोर त्रिपाठी के नेतृत्व में आयोजित संगोष्ठी में बराक घाटी के हिंदी के लिए समर्पित रहने वाले व्यक्तियों जिनमें दिलीप कुमार, फूलमती कलवार, राजकुमारी मिश्र, राजकुमार दुबे, श्रीमती अलका राणा को सम्मानित किया।

गया। इसके साथ ही असम सरकार द्वारा युवा लेखक सम्मान से पुरस्कृत लेखक राजदीप राय, चंद्र कुमार ग्वाला और सर्वेश स्वर्णकार को सम्मानित किया गया। दूसरे सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम किए गए, जिसमें कई बालक बालिकाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शित किया। तीसरे सत्र में निर्धारित विषय पर संगोष्ठी हुआ, जिसमें संगीता रविदास,अंबर पांडेय, राजदीप राय और सिलचर विमेंस कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ रंजीत यादव ने अपने अपने शोधपत्र उपस्थापित किए। अंत में शोधपत्र उपस्थापित करने वालों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

राष्ट्रगान जन गण मन से कार्यक्रम की समाप्ति किया गया। कार्यक्रम में समिति के उपाध्यक्ष क्रमशः कन्हैयालाल सिंगोदिया, अरुण कुमार महतो, सह – सचिव श्रीमती बिंदु सिंह, कार्यालय सचिव प्रमोद जायसवाल, सांगठनिक सचिव राजन कुंवर, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा सचिव श्रीमती कमला सोनार, अंतरिम अंकेक्षक अनंतलाल कुर्मी, कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती किरण त्रिपाठी, श्रीमती सविता जायसवाल, सुवचन ग्वाला, बंशीलाल भाटी, सांवरमल काबरा, लालल प्रसाद ग्वाला, अनूप पटवा, श्रीमती अपर्णा तिवारी सहित शताधिक व्यक्तिजन उपस्थित थे। असम विश्वविद्यालय में राजभाषा विभाग में हिंदी अनुवादक पृथ्वीराज ग्वाला, सुप्रिया चौबे, मेघा कानू, प्रियल सिंह, दिव्यांशी पांडेय, मनीष पांडेय,अम्बर पाण्डेय,राहुल कानू,नीतीश तिवारी, पिंकी पांडेय आदि की उपस्थिति रही।
योगेश दुबे


