- डॉ. सुजीत तिवारी और प्रो. हिमाद्री शेखर दास ने बताए, ऐसा क्यों और कब होता है
आज और गत कल सूर्य के पास बना घेरा कौतूहल विषय बना हुआ है। लोग इसकी तस्वीर और वीडियो बनाकर सोशल मंचों पर साझा भी कर रहे हैं। इस प्रकार का अदभुत नजारा होगा, स्वाभाविक है लोग अपने मोबाइल में कैद करना चाहेंगे। कुछ लोग रैंबो, तो कुछ लोगों सूर्य की किरणों से बने घेरा कह रहे।
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विज्ञान के छात्रों के लिए भी इसको लेकर दिलचस्पी दिखाई दी। लिया गया वीडियो और तस्वीर असम की कछार जिले का है। असम की कई जिलों में आज सूरज के चारों तरफ एक गोलाकार घेरा देखने को मिला। यह नजारा बिल्कुल अद्भुत था, लोगों ने इसकी तस्वीरें लीं और सोशल मीडिया पर जमकर शेयर करने लगे। चलिए आज इन सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर यह बनता कैसे है और इसे विज्ञान की भाषा में क्या कहा जाता है? इसके साथ ही हम आपको यह भी बताएंगे कि क्या यह सिर्फ सूरज के साथ ही होता है।
इस संदर्भ में जानने के प्रयास में सामने आया दरअसल, यह एक सामान्य खगोलीय परिघटना है जिसे विज्ञान की भाषा में सोलर हालो या फिर सन रिंग भी कहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा वातावरण में मौजूद हेक्सागोनल क्रिस्टल के कारण होता है । दरअसल जब वातावरण में मौजूद पानी की बूंदों पर प्रकाश पड़ता है तो उसके विकिरण के कारण यह घटना घटती है। कई बार इस गोले में इंद्रधनुष की तरह कई रंग भी दिखाई देते हैं।

डा॰ सुजीत तिवारी, (M.Sc.,M.Phil.Ph.D. प्रिन्सिपल, वुमेनस कालेज सिलचर और पूर्व एसोसिएट प्रोफेसर, भौतिक शास्त्र ,करीमगंज कॉलेज) का कहना था कि जब ऊँचाई पर स्थित वायुमंडलीय परतों में साईरस बादल (Cirrus Clouds) उपस्थित होते हैं, तो इन बादलों में मौजूद बर्फ के छोटे-छोटे क्रिस्टल सूर्य के प्रकाश से टकराते हैं। यह प्रकाश जब बर्फ के क्रिस्टलों से अपवर्तित (refracted) होता है, तो वह 22 डिग्री के कोण पर मुड़कर एक वृत्ताकार प्रकाश-वृत्त बना देता है।
डा॰ सुजीत तिवारी

यही प्रकाशवृत्त हमें सूर्य के चारों ओर एक इंद्रधनुषी आभामंडल यानी “हैलो” के रूप में दिखाई देता है। भावनात्मक रूप से यह दृश्य कुछ यूं कहा जा सकता है: “जब आकाश के बर्फीले कणों से सूर्य की किरणें खेलती हैं, तो प्रकृति अपनी कूंची से आकाश कैनवास पर स्वर्गीय चित्र उकेरती है। सूर्य के चारों ओर जो आलोकमंडल बनता है, वह हमें ब्रह्मांड की रहस्यमयी सुंदरता और विज्ञान की चमत्कारी शक्ति की याद दिलाता है।”
यह घटना न केवल वैज्ञानिक रूप से रोचक है, बल्कि हमें यह भी सिखाती है कि जब प्रकृति और प्रकाश मिलते हैं, तो अद्भुत सौंदर्य की रचना होती है। यह एक प्राकृतिक खगोलिय घटना है और इसमें घबराहट और सकुन अपसकून जैसी कोई बात नही है। मौसम में कुछ परिवर्तन होता है, इससे इनकार नहीं कर सकते, लेकिन स्थान के हिसाब से निर्भर करता हैं।
असम विश्वविद्यालय के प्रो• हिमाद्री शेखर दास ( Prof. Himadri Sekhar Das, Department of Physics Assam University, Silchar) ने कहा कि यह जो आज सूरज के पास एक रहस्यमय रोशनी का घेरा देखा गया, इसे Halo कहा जाता है। यह अद्भुत दृश्य वास्तव में प्रकृति का एक आश्चर्यजनक प्रकाशीय चमत्कार है।
Prof. Himadri Sekhar Das

उनका कहना था कि जब सूरज की रोशनी बहुत ऊँचाई पर मौजूद सिरोस्ट्रेटस (cirrostratus) बादलों में मौजूद बर्फ के क्रिस्टलों से होकर गुजरती है, तब प्रकाश के अपवर्तन और प्रसारण के कारण सूरज के चारों ओर एक चमकीला गोल घेरा बनता है – इसे ही Halo कहा जाता है। यह अक्सर 22 डिग्री के कोण पर दिखाई देता है, इसलिए इसे 22-degree halo भी कहते हैं। यह दृश्य कई बार बारिश के संकेत के रूप में भी देखा जाता है।



Original photograph was taken by Mr Sagarmoy Das, retired HOD, civil engineering Silchar polytechnic. Original photograph is much more beautiful which is lying with me.🙏