उन्होंने कहा, भाषा से रोजगार के मौके बढ़ते हैं
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा नई दिल्ली में एक न्यूज चैनल के खास कार्यक्रम डायमंड स्टेट्स समिट के ग्रैंड फिनाले में कहा कि कोई भी भाषा सीखने से नुकसान नहीं है बल्कि फायदा ही है। मुख्यमंत्री कोनराड ने कहा कि हिंदी भाषा को सीखने में कोई नुकसान नहीं है।
अपने राज्य की स्थानीय भाषा और हिंदी भी सीखनी चाहिए। मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड 10,000 नर्सों को जापान भेजना चाहते हैं। इसके लिए मेघालय की नर्सों को जापानी भाषा को सिखाने की कोशिश की जा रही है, जबकि देखा जाए तो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन का रुख इसके ठीक खिलाफ है। वो तो राज्य के स्कूलों में हिंदी भाषा को पढ़ाने के खिलाफ हैं। इससे केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का साथ तमिलनाडु की तल्खी भी बढ़ी है। जिससे वाद- विवाद भी हुआ।
तमिलनाडु ने तो अपने बजट में रुपये के प्रतीक चिह्न को भी बदलने का काम किया। तमिलनाडु में जिस तरह से हिंदी को केवल उत्तर भारत की भाषा के तौर पर पेश किए जाने का काम किया जा रहा है, उससे कई इलाकों में तनाव पैदा हो सकता है। मगर मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड ने अपने नजरिये से एक नया दृष्टिकोण पेश किया है, जिसमें भाषा को रोजगार से जोड़ने की कोशिश की गई है।
मुख्यमंत्री कोनराड ने मातृभाषा, हिंदी सहित जितनी हो सके भाषाओं को सीखने की वकालत करते हैं। जिससे भारत में एकता और सांस्कृतिक लेनदेन को बढ़ावा मिल सके. विशेष रूप से हिंदी सीखने से विभिन्न इलाकों में संचार को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे राष्ट्रीय एकीकरण को प्रोत्साहन मिलेगा। किसी भी इंसान की कई भाषाओं को सीखने के फायदों को एक्सपर्ट पहले भी बताते रहे हैं।
बहुभाषावाद इंसानों के अनुभवों को बढ़ावा देता है. जिससे स्मृति, तर्क और यहां तक कि सौंदर्य प्राथमिकताओं पर असर पड़ता है। इसलिए, कई भाषाओं को अपनाने से दुनिया की अधिक सूक्ष्म समझ विकसित हो सकती है और इंसानों में लचीलापन बढ़ता है।


