मानव तस्करी का पर्दाफाश, नाबालिग से शादी करने वाला राजस्थान के लीला राम गिरफ्तार
असम के चाय बागानों की गरीब नाबालिग लड़कियों को नौकरी का झांसा देकर बाहरी राज्यों में बेचा जा रहा। कछार पुलिस ने इसका पर्दाफाश किया है। कछार पुलिस ने दो नाबालिग लड़कियों को राजस्थान से मुक्त कराया है। बराक चाय श्रमिक यूनियन के पास एक मामला सामने आया था। पुलिस को इसकी जानकारी दी गई, जिसके बाद कार्रवाई हुई। कछार पुलिस ने असम से बाहर राजस्थान से दो नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया।
लड़कियों को नौकरी का झांसा देकर ले जाया गया था और बेच दी गई थी। इनमें से एक एक लड़की को अधेड़ उम्र वाले व्यक्ति ने ख़रीदा और उससे शादी कर ली, जो अब गिरफ्तार कर लिया गया। कछार पुलिस ने ट्रांजिट रिमांड पर असम ले आई है। पुलिस अधीक्षक नुमाल महत्ता ने मीडिया को बताया कि कलाइन पुलिस स्टेशन अंतर्गत घुमड़ा ( जलालपुर के पास ), तालकर ग्रांट निवासी एक व्यक्ति ने 24 जनवरी 2025 को एफआईआर दर्ज कराया था।
एफआईआर में दो महिलाओं रुपाली दत्ता और गंगा गंजु पर उनकी 15 वर्षीय बेटी चन्नू ( बदला हुआ नाम ) और पड़ोस की मिल्ली ( 15 वर्ष, बदला हुआ नाम ) को नौकरी का झांसा देकर असम से बाहर ले जाने का आरोप लगाया गया। ट्रेन से हैदराबाद ले जाते समय मिल्ली को कुछ अनहोनी का शंका हुआ और वह मौका पाकर उनके चंगुल से भागने सफल रही। गुवाहाटी पहुँचने के बाद पूरा मामला सामने आया। जबकि चन्नू को राजस्थान, जयपुर ग्रामीण, मनपुरा निवासी 49 वर्षीय लीला राम को बेच दिया गया।
कछार पुलिस राजस्थान के मनपुरा जाकर चन्नू को छुड़ाया और लीलाराम को गिरफ्तार कर लिया। चन्नू की तरह बेची गई श्रीभूमि जिले के पाथरकांदी इलाके की एक युवती को भी छुड़ाया गया। उसे भी काम का लालच दिया गया और फिर मनपुरा इलाके में बेच दिया गया। राजस्थान पुलिस की मदद से कछार पुलिस को कामयाबी मिली। इस घटना के आधार पर पुलिस ने अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस सबके बीच एक दिन चन्नू ने अपने माता-पिता को एक मोबाइल नंबर से फोन किया। हालांकि, उनकी बातचीत नहीं हो पाई।
उससे पहले ही फोन लाइन कट गई और “स्विच ऑफ” हो गई। इस फोन नंबर के आधार पर पुलिस यह पता लगाने में सफल रही कि कॉल राजस्थान के मनपुरा से की गई थी। इस बार कछार पुलिस की एक टीम मनपुरा गई और वहां की पुलिस की मदद से चन्नू को ढूंढ निकाला। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि इस पूरी घटना के पीछे एक अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह का हाथ है। जो विशेष रूप से असम के विभिन्न जिलों के चाय बागान क्षेत्रों से युवा लड़कियों को अच्छी नौकरी का लालच देकर दूसरे राज्यों में ले जाकर बेच देते हैं।
कई लडकियां रेड लाइट में भी झोंक दी जाती। कछार पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया और एक विशेष टीम को राजस्थान भेजा था। जयपुर ( ग्रामीण ) के पुलिस अधीक्षक आनंद शर्मा ने असम पुलिस का पूरा सहयोग किया। कछार पुलिस ने कलाइन, घुमड़ा, तालकर की एक लड़की को मुक्त कराया। इसी दौरान एक अन्य लड़की को भी मुक्त कराया गया, जो श्रीभूमि के पाथरकांडी, अदमतिला की थी। 9 दिसंबर 2024 से वह लापता थी।
पुलिस आरोपी को लीला राम को ट्रांजिट रिमांड के लिए जयपुर में स्थानीय अदालत में पेश करने के बाद हवाई मार्ग से सिलचर वापस आई। पुलिस ने खुलासा किया कि फरार महिलाएं रूपाली दत्ता और गंगा गंजू के तकनीकी विश्लेषण के दौरान, यह पता चला है कि वे दोनों ऊपरी असम, निचले असम और मध्य असम के विभिन्न लोगों के साथ लगातार संपर्क में हैं, खासकर चाय बागान क्षेत्र में, जिन्हें वे दोनों दलाल के रूप में शामिल कर रहे हैं।
पूरे असम राज्य में उनके और अन्य सह-सहयोगियों द्वारा मानव तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क चलाया जा रहा है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक लीला राम एक ईंट भट्टा का मज़दूर है। 49 वर्ष होने के बाद भी उसकी शादी नहीं हो रही थी। शादी के लिए मानव तस्करों से संपर्क किया और चार लाख रुपए में लड़की को ख़रीदा था।
बराक चाय श्रमिक यूनियन के महासचिव राजदीप ग्वाला ने बताया कि कछार जिले के एसपी ने उचित समय पर कार्रवाई कर दो लड़कियों को मुक्त कराया है। पुलिस से गिरोह के सरगना को पकड़ने और चाय बागान की बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।


