Monday, September 7, 2026

सिलचर में भारत बंद का रहा मिलाजुला असर, ट्रेड यूनियन की महिला सदस्यों ने किया विरोध प्रदर्शन

  • ट्रेड यूनियन एकजुट होकर सरकार की नीतियों का विरोध किया

भारत बंद के दौरान सिलचर में ट्रेड यूनियन की महिला सदस्यों ने आंदोलन किया। सड़कों पर उतरी और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि अधिक देर प्रदर्शन नहीं कर सकीं, पुलिस ने महिला सुरक्षाबलों की मदद से सबको हिरासत में ले लिया। हालांकि बाद में रिहा कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रव्यापी भारत बंद का असर सिलचर शहर में मिलाजुला दिखाई दिया। बैंकिंग, इंश्योरेंस, पोस्टल सेवाएं प्रभावित हुई।

बैंक, व्यापारिक प्रतिष्ठान, शैक्षणिक संस्थान बंद रहे। ट्रांसपोर्ट सेवा बंद रहे। सड़कों पर हैवी व्हीकल नदारद दिखी। हालांकि ऑटो रिक्शा और ई रिक्शा सरपट दौड़ते नजर आए। जिला मुख्यालय और सरकारी प्रतिष्ठान खुले रहे। मालूम हो कि सुबह वामपंथ यूनियन से जुड़े बड़ी संख्या में लोग विरोध प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरे थे, लेकिन पुलिस ने सभी को हिरासत में ले लिया।

वहीं दूसरी तरफ शहर के क्लब रोड में स्थित खुदीराम मूर्ति के सामने प्रदर्शनकारी एकत्रित हुए, लेकिन बड़ी संख्या में तैनात पुलिस कर्मियों ने सबको बस और सूमो में भरकर ले गए। सिलचर में विरोध करने यूनियन की महिला सदस्य निकली थीं। ऐसे में महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें किसी तरह नियंत्रण कर पाई। बैंकिंग सेक्टर से जुड़े कर्मचारी कर रहे एक दिन का कार्य बहिष्कार और हड़ताल पर रहे। इसका असर सिलचर के बैंकिंग सेक्टर से जुड़े कामों पर साफ तौर पर देखने को मिला।

हड़ताल के कारण विभिन्न बैंकों में सुबह से ही लोग बिना काम कराए ही वापस लौटने को मजबूर हुए। हड़ताल के चलते सार्वजनिक सेवाएं, बैंकिंग व्यवस्था आंशिक रूप से प्रभावित हुईं। 10 ट्रेड यूनियनों ने देशव्यापी हड़ताल की। इस हड़ताल में बैंकिंग, बीमा, कोयला खनन, राजमार्ग और निर्माण जैसे क्षेत्रों में कार्यरत 25 करोड़ से अधिक कर्मचारी देशव्यापी शामिल होने का दावा किया गया।

गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों में एसयूसीआई (कम्युनिस्ट) पार्टी के जिला सचिव भवतोष चक्रवर्ती और विभिन्न ट्रेड यूनियनों व श्रमिक संगठनों की ओर से सुब्रत नाथ, हैदर हुसैन चौधरी, विद्युत देब, सुरजीत घोष, दुलाली गांगुली आदि शामिल थे। ट्रेड यूनियन एकजुट होकर सरकार की नीतियों का विरोध कर रहा है, जो श्रमिकों और आम जनता के हितों की उपेक्षा कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचा रही है।

बैंक कर्मियों की मांग है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और बैंकों के निजीकरण पर रोक लगाई जाए। बीमा क्षेत्र में 100 फीसद एफडीआई का प्रस्ताव वापस लिया जाए। श्रमिक संगठनों के अधिकारों का संरक्षण किया जाए। क्रोनी कैपिटलिज्म (सांठगांठ आधारित पूंजीवाद) पर लगाम लगे। बेरोजगार, भ्रष्टाचार, महंगाई जैसे मुद्दे को भी उठाया।

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