Saturday, April 18, 2026

पालोरबंद चाय बागान लॉक आउट, आक्रोश में श्रमिक समुदाय, मंत्री कौशिक राय, यूनियन नेता राजदीप ग्वाला पहुंचकर ली सुध  

  • पूजा से ठीक पहले चाय बागान बंद होने से फूट पड़ा आफत । 
  • मंत्री कौशिक राय और यूनियन नेता राजदीप ग्वाला ने अलग – अलग समय पर चाय बागान के श्रमिकों और पंचायत प्रतिनिधियों के साथ एक आपातकालीन बैठक कर उनकी समस्याओं को सुनने के बाद तात्कालिक समाधान के लिए जोर दिया है। 

कछार जिले के पालोरबंद चाय बागान में श्रमिकों पर आफत फूट पड़ा है। दुर्गापूजा के ठीक पहले चाय बागान लॉक आउट होने से काम करने वाले लगभग दो हज़ार श्रमिकों के आंखो के सामने अंधेरा जैसा छा गया है। श्रमिक समुदाय में बहुत आक्रोश है।

हालात को देखते हुए राज्य के मंत्री कौशिक राय, जिला आयुक्त मृदुल यादव, श्रम विभाग के अधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी नुमाल महत्ता श्रमिकों के बीच पहुंचकर उनकी बात को सुनी। बराक चाय श्रमिक यूनियन के साधारण संपादक राजदीप ग्वाला भी श्रमिकों से मिले। चाय बागान के श्रमिकों और पंचायत प्रतिनिधियों के साथ एक आपातकालीन बैठक में भाग लिया। उनकी समस्याओं को सुनने के बाद तात्कालिक समाधान के लिए जोर दिया है। मालूम हो कि शुरुआत से ही इस बागान के बंद होने की आशंका थी। हालाँकि, किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि दुर्गा पूजा से पहले लॉक आउट हो जाएगा।

लखीपुर थाना क्षेत्र के पालोरबंद चाय बागान में अचानक तालाबंदी की घोषणा ने श्रमिकों की खुशियां छीन ली हैं। मुख्य बागान पालोरबंद में 4 और डिवीजन या आउटपोस्ट बागान हैं। इनमें से पालोरबंद के दो आउटपोस्ट बागान अलीपुर और नारायणपुर लखीपुर थाना क्षेत्रों में हैं। अन्य दो आउटपोस्ट बागान डोलुग्राम और स्कोटपुर उधारबंद थाना क्षेत्रों में हैं। बागानों में स्थायी श्रमिकों की संख्या 1600 से 1700 है। अस्थायी श्रमिकों को मिलाकर यह संख्या लगभग 2,000 होगी। मंगलवार सुबह श्रमिकों ने बागान कार्यालय और विभिन्न गेटों पर ताला लगा देखा।

हालांकि बागान में तालाबंदी का कोई नोटिस नहीं लगा था, फिर भी श्रमिक असमंजस में थे कि क्या करें। बाद में पता चला कि सोमवार रात बागान के निदेशक सीपी अग्रवाल ने कछार जिला आयुक्त, सहायक श्रम आयुक्त और बराक चाय श्रमिक यूनियन को ईमेल के ज़रिए तालाबंदी की घोषणा की सूचना दी थी। बागान में तालाबंदी की घोषणा की आशंका पिछले कुछ समय से जताई जा रही थी। श्रमिक पिछले कुछ समय से भविष्य निधि (पीएफ) में भारी बकाया राशि के साथ-साथ अनियमित राशन और उसकी मांग का सामना कर रहे थे।

6 सितंबर को श्रमिकों ने पालोरबंद चाय बागान में सड़क जाम भी किया था। हालांकि इतना कुछ होने के बावजूद, श्रमिकों को यह अंदाज़ा नहीं था कि पूजा से पहले उन्हें इस तरह से बंद कर दिया जाएगा। आज सुबह जब उन्हें इसकी जानकारी मिली, तो श्रमिकों में खलबली मच गई। बागान की स्थिति चाहे जो भी हो, श्रमिकों को उम्मीद थी कि पूजा के दौरान उन्हें कम से कम कुछ बोनस तो मिलेगा। लेकिन बोनस तो दूर, पूजा से पहले ही बागान बंद कर दिया गया। बागान के मुख्य प्रबंधक चयन डे कुछ दिन पहले छुट्टी पर चले गए थे।

बागान का काम सहायक प्रबंधकों की देखरेख में चल रहा था। उनका कुछ महीनों का वेतन भी बकाया है। इस स्थिति में, सोमवार को सहायक प्रबंधकों ने एक ही बार में मालिक संजीव तुलसियान को अपना त्यागपत्र भेज दिया। फिर, रात में तालाबंदी की घोषणा कर दी गई। तालाबंदी की खबर मिलते ही लखीपुर के विधायक तथा मंत्री कौशिक रॉय बागान पहुंचे। उनके साथ जिला आयुक्त और श्रम विभाग के एक अधिकारी भी थे। कौशिक ने श्रमिकों से चर्चा की और उनकी सभी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।

उन्होंने पालोरबंद सहित फारी बागानों में पूजा के आयोजन के लिए कुल पांच लाख रूपया और श्रमिकों को अलग से अधिक वित्तीय सहायता की घोषणा की। मंत्री राय ने अपने सोशल मीडिया मंच पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए कहा कि आज सुबह पालोरबंद नाच घर पहुंचे और बागान पंचायत और पालोरबंद, अलीपुर नारायणपुर, स्कोटपुर, डोलुग्राम चाय बागानों के चाय श्रमिकों के साथ चर्चा की और उन्हें इस दुर्गा पूजा के दौरान हर संभव मदद का आश्वासन दिया। जिला आयुक्त मृदुल यादव, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नुमाल महत्ता, लखीपुर सह जिला आयुक्त ध्रुबज्योति पाठक, सह जिला पुलिस अधीक्षक पृथ्वीराज राजखोवा और भाजपा जिला उपाध्यक्ष संजय कुमार ठाकुर के साथ कछार जिला परिषद उपाध्यक्ष देबज्योति बाउरी, पालोरबंद क्षेत्रीय पंचायत सदस्य प्रदीप तांती, जीपी अध्यक्ष श्रीमती सविता रुद्र पाल उपस्थित थी।

तालाबंदी की खबर से चिंतित, बराक चाय श्रमिक यूनियन के साधारण संपादक और पूर्व विधायक राजदीप ग्वाला और अन्य यूनियन पदाधिकारी भी उस दिन बागान पहुंचे। उन्होंने बागान के नाच घर में श्रमिकों के साथ उत्पन्न स्थिति और इसे कैसे हल किया जाए, इस पर काफी देर तक चर्चा की चाय बागान अधिकारियों पर लगभग 7.5 करोड़ रुपये मुआवजा बकाया है।

बागान की स्थिति को देखते हुए, यूनियन ने ज़िला आयुक्त से अनुरोध किया था कि इस पैसे का इस्तेमाल मालिक को भुगतान करने के बजाय मजदूरों के बकाये का भुगतान करने में किया जाए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि श्रमिकों के बारे में सोचे बिना, मुआवजे की बड़ी राशि मालिक को दो किस्तों में दे दी गई। श्रमिकों को एक भी रुपए नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि मुआवजे का 10 प्रतिशत अभी भी बकाया है।

उन्होंने मजदूरों को पूजा के लिए कुछ पैसे देने की वकालत की। राजदीप ने यह भी कहा कि दिलखुश और दीदारखुश बागानों में भी पहले ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई थी। मालिकों ने तालाबंदी की घोषणा कर दी थी और भाग गए थे। हालांकि, स्वामित्व परिवर्तन के कारण, दोनों बागान वर्तमान में काफी अच्छी तरह से चल रहे हैं। पालोरबंद बागान के मामले में भी इसी तरह के प्रयास किए जाएंगे। इस बीच, अचानक तालाबंदी की घोषणा से श्रमिकों का गुस्सा चरम पर पहुँच गया है। उन्होंने मालिक संजीव तुलसियान की गिरफ्तारी की मांग की है।

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