Saturday, April 18, 2026

“पूर्वोत्तर भारत में हिंदी शिक्षण : चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ” विषय पर एक-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन, शिक्षक अपने कर्तव्यों का करें निर्वाह  : प्रो. पार्थ सारथी पांडेय 

  • पूर्वोत्तर भारत में हिंदी शिक्षण कीवास्तविक चुनौतियों और संभावनाओं पर हुआ गहन व सार्थक विमर्श

मिजोरम हिंदी ट्रेनिंग कॉलेज, आइज़ोल में 14 नवंबर 2025 को केंद्रीय हिंदी संस्थान, शिलोंग केंद्र (मुख्यालय—आगरा) के संयुक्त तत्वावधान में “पूर्वोत्तर भारत में हिंदी शिक्षण : चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ” विषय पर एक-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. पार्थ सारथी पांडेय, क्षेत्रीय निदेशक, केंद्रीय हिंदी संस्थान, शिलोंग केंद्र, विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. दिनेश कुमार चौबे, अध्यक्ष, हिंदी विभाग, पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय तथा प्रो. संजय कुमार,अध्यक्ष, हिंदी विभाग, मिज़ोरम विश्वविद्यालय आमंत्रित थे।

इस अवसर पर कॉलेज की प्राचार्याडॉ. जूडी ललएङवारी ने मुख्य अतिथि प्रो. पार्थ सारथी पाण्डेय, विशिष्ट अतिथि प्रो. दिनेश कुमार चौबे एवं प्रो. संजय कुमार का स्वागत-अभिनंदन पुष्प-गुच्छ एवं अंगवस्त्र देकरकिया। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत स्वागत गान से हुआ। संगोष्ठी के समन्वयकएवं मिज़ोरम हिंदी ट्रेनिंग कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ललमुआनओमा साइलो नेस्वागत उद्बोधन में हिंदी शिक्षा के विस्तार हेतु इस आयोजन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। बीज-वक्तव्य मिज़ोरम विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अश्वेषवर्मा ने प्रस्तुत किया।

मुख्य अतिथि प्रो. पार्थ सारथी पाण्डेय ने अपने विस्तृत भाषण में हिंदी शिक्षण की चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर सारगर्भित विचारव्यक्त किए। उन्होंने मेघालय, मिजोरम एवं त्रिपुरा के सुदूर क्षेत्रों में हिंदीशिक्षकों के प्रशिक्षण से प्राप्त अपने अनुभवों को व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हिंदीजन-गण की भाषा है तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र में हिंदी को लोग सहर्ष स्वीकार कर रहेहैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिंदी के प्रयोग में वृद्धि में स्थानीय हिंदी शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। यह तभी संभव है जब शिक्षक अपने कर्तव्यों केप्रति अटल हों।

उन्होंने कहा कि चुनौतियां ही संभावनाओं की दिशा-निर्देशिका होती हैं, इसलिए चुनौतियों को सकारात्मक रूप में लेने की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथिप्रो. डी.के. चौबे ने पूर्वोत्तर भारत में हिंदी की बढ़ती स्वीकृति और इसके भविष्यकी दिशा पर अपने महत्त्वपूर्ण विचार साझा किए। विशिष्ट अतिथि प्रो. संजय कुमार नेमिज़ोरम के संदर्भ में हिंदी शिक्षण की चुनौतियों एवं संभावनाओं पर चर्चा की। प्राचार्या डॉ. जूडी ललएङवारी ने अध्यक्षीय भाषण देते हुए संगोष्ठी की सार्थकता परजोर दिया। उद्घाटन सत्र के अंत में डॉ. मरीना ललथ्लामुआनी ने धन्यवाद ज्ञापनप्रस्तुत किया तथा कार्यक्रम का संचालन डॉ. अजय कुमार रंजीत द्वारा किया गया।

उद्घाटन समारोह केपश्चात प्रथम तकनीकी सत्र आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता मिज़ोरम विश्वविद्यालय के वरिष्ठ आचार्यप्रो. संजय कुमार ने की। इस सत्र में डॉ. कंचन वर्मा (लेडी श्रीराम कॉलेज,दिल्ली विश्वविद्यालय), जे.पी. पाण्डेय (IRPS, संघ लोक सेवा आयोग), डॉ. श्वेता द्विवेदी (शिक्षा विभाग, मिज़ोरम विश्वविद्यालय), डॉ. सुषमा कुमारी (हिंदी विभाग, मिज़ोरम विश्वविद्यालय) तथा डॉ. ललिरनकिमी (गवर्नमेंटआइज़ोल कॉलेज) ने अपने-अपने शोध-विषयों पर महत्त्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए। सत्रके अंत में प्रो. संजय कुमार ने अध्यक्षीय टिप्पणी प्रस्तुत की तथा डॉ. वानललपारीचिनझा, असिस्टेंट प्रोफेसर, MHTC ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

दोपहर में आयोजित द्वितीय सत्र की अध्यक्षता डॉ. अश्वेष वर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, मिज़ोरम विश्वविद्यालय ने की। इस सत्र में डॉ. कैथीरौह्लुपुई, असिस्टेंट प्रोफेसर, गवर्नमेंट आइज़ोल कॉलेज, श्रीमती लललोमजुआली हाउजार, असिस्टेंटप्रोफेसर, मिज़ोरम हिंदी ट्रेनिंग कॉलेज, सुश्री ङूरनुनसाङी,शोधार्थी,मिज़ोरम विश्वविद्यालय, डॉ. मरीना ललथ्लामुआनी, असिस्टेंट प्रोफेसर, मिज़ोरम हिंदी ट्रेनिंग कॉलेजतथा डॉ. सी. मलसोमत्लुआंगी, असिस्टेंट प्रोफेसर, मिज़ोरम हिंदी ट्रेनिंग कॉलेजने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। अंत में अध्यक्षीयटिप्पणी डॉ. अश्वेष वर्मा ने दी तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ललछुआनओमा ने किया।

संगोष्ठी के अंतिमचरण में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसका संचालन श्रीमती लललोमजुआली, असिस्टेंट प्रोफेसर, मिज़ोरम हिंदी ट्रेनिंग कॉलेज ने किया। इस अवसर पर मिज़ोरम हिंदी ट्रेनिंग कॉलेजके विद्यार्थियों ने सामूहिक गीत, एकल गीत तथा बांसुरी वादन प्रस्तुत किया। चकमा और मिजो सांस्कृतिक नृत्यों ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। मिज़ोरम हिंदी ट्रेनिंग कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अजय कुमार रंजीत द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया और डॉ. एलिज़ाबेथी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम कासफल समापन हुआ।

पूरे आयोजन में मिज़ोरम हिंदी ट्रेनिंग कॉलेज के शिक्षकों, विद्यार्थियों और अन्य अतिथियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता उल्लेखनीय रही, जिसने इस राष्ट्रीय संगोष्ठी को सफल,सार्थक और यादगार बना दिया। इस एक-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य फल यह रहा कि पूर्वोत्तर भारत में हिंदी शिक्षण कीवास्तविक चुनौतियों और संभावनाओं पर गहन व सार्थक विमर्श हुआ। विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने हिंदी शिक्षण के सैद्धांतिक वव्यावहारिक पक्षों को स्पष्ट करते हुए नए समाधान प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों में हिंदी शिक्षण के प्रति उत्साह, जागरूकता और नई दिशा में कार्य करने की प्रेरणा उत्पन्न हुई। संगोष्ठी ने शोध, संवाद और सहयोग की नई संभावनाएँ खोलीं तथा मिज़ोरम सहितपूरे पूर्वोत्तर में हिंदी शिक्षा के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई।

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