Saturday, August 8, 2026

फाइज़र ने असम में कैंसर की समय रहते पहचान को नई दिशा दी: टाटा कैंसर केयर फाउंडेशन के साथ साझेदारी ने पार किया 10 लाख लाभार्थियों का आंकड़ा

  • असम, झारखंड, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा में यह साझेदारी अब तक 10 लाख से अधिक लाभार्थियों तक पहुंच चुकी है

गुवाहाटी। फाइज़र ने आज टाटा कैंसर केयर फाउंडेशन (टीसीसीएफ) के साथ अपनी साझेदारी की इस उपलब्धि का उत्सव मनाया। असम, झारखंड, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा में यह साझेदारी अब तक 10 लाख से ज़्यादा लाभार्थियों तक पहुंच चुकी है और इसने कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने, बीमारी की समय रहते पहचान और अग्रिम मोर्चे की स्वास्थ्य सेवा क्षमता मज़बूत करने का काम किया है। मुख, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के लिए अब तक 9,93,000 से ज़्यादा स्क्रीनिंग हो चुकी हैं, करीब 25,000 स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, और समुदाय स्तर पर रेफरल की व्यवस्था को भी मज़बूत किया गया है, ताकि संदिग्ध मामलों की समय रहते पहचान हो और लोगों तक समय पर उपचार पहुंच सके।

इस मील के पत्थर को यादगार बनाने के लिए फाइज़र और टीसीसीएफ ने गुवाहाटी में एक हितधारक सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें सरकार, सार्वजनिक, निजी और विकास क्षेत्र के सभी नेता एक मंच पर आए, अब तक के असर पर चर्चा की और इस पर भी विचार-विमर्श किया कि समुदाय की अगुवाई वाली कैंसर रोकथाम और समय रहते पहचान को आगे कैसे मज़बूत बनाया जाए। इस अवसर पर श्री अशोक सिंघल, माननीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री, असम सरकार, मौजूद रहे। साथ ही स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, अटल अमृत अभियान सोसाइटी और फाइज़र के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा एनसीडी, आशा और राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।

भारत में कैंसर आज भी स्वास्थ्य के मोर्चे पर एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। साल 2022 में ही 14 लाख से ज़्यादा नए मामले सामने आए, और हर दस में से करीब एक व्यक्ति को 75 साल की उम्र से पहले कैंसर होने का खतरा है। असम की गिनती आज भी भारत के उन राज्यों में होती है जहां कैंसर के मामले सबसे ज़्यादा पाए जाते हैं। इसकी वजह तंबाकू का सेवन, जीवनशैली से जुड़े कारक और इलाके के जोखिम पैटर्न हैं।

डॉ. सिद्धार्थ सिंह, आईएएस, आयुक्त एवं सचिव, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग, असम सरकार तथा निदेशक, असम कैंसर केयर फाउंडेशन, ने कहा,“असम ने ऐसे भागीदारों के साथ मिलकर एक मज़बूत स्वास्थ्य तंत्र खड़ा करने में बड़ी प्रगति की है, जो सबके लिए सुलभ और समान स्वास्थ्य सेवा के राज्य के सपने से पूरी तरह मेल खाते हैं। कैंसर एक बड़ी चुनौती है, इसलिए जागरूकता, समय रहते पहचान और समय पर उपचार बेहद ज़रूरी हैं। मुझे प्रसन्नता है कि असम सरकार, टाटा कैंसर केयर फाउंडेशन और फाइज़र के इस साझा प्रयास ने निवारक स्वास्थ्य सेवा और समुदाय आधारित पहलों की पहुंच और बढ़ाई है। हम इस प्रतिबद्धता की सराहना करते हैं और असम के लोगों का स्वास्थ्य बेहतर बनाने के लिए इन प्रयासों को आगे ले जाने के लिए तैयार हैं।”

मीनाक्षी नेवतिया, कंट्री प्रेसिडेंट, फाइज़र इंडिया, ने कहा,”फाइज़र की मरीज़ों के प्रति प्रतिबद्धता सिर्फ उस विज्ञान तक सीमित नहीं है जो हमारी अभूतपूर्व दवाओं के पीछे है, बल्कि हम अपने देश में समुदाय के स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाना भी उतनी ही अपनी ज़िम्मेदारी मानते हैं। जागरूकता, स्क्रीनिंग, क्षमता निर्माण और रेफरल जैसी व्यवस्थाओं को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़कर सरकार और निजी क्षेत्र का सहयोग कैंसर की रोकथाम को मज़बूत बना सकता है, समय रहते बीमारी की पहचान संभव बना सकता है, और समुदायों में स्वास्थ्य के बेहतर परिणाम ला सकता है। हम असम सरकार, टाटा कैंसर केयर फाउंडेशन और अपने उन सभी भागीदारों के आभारी हैं, जो इस अभियान में हमारे साथ जुड़े हुए हैं, और जिनके सहयोग से हम मिलकर 10 लाख लाभार्थियों तक पहुंच पाए हैं।”

असम में फाइज़र-टीसीसीएफ साझेदारी से सामुदायिक जुड़ाव कार्यक्रमों, शिक्षण संस्थानों और सामुदायिक संगठनों के माध्यम से चलाई गई जागरूकता पहलों से 3,50,000 से ज़्यादा लोगों तक पहुंच बनी है। मुख, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर की करीब 2,80,000 स्क्रीनिंग हुई हैं, इनमें से 1,700 से ज़्यादा मामलों में रेफरल हुआ और करीब 350 मामलों में कैंसर की पुष्टि हुई, जिससे बीमारी समय रहते पकड़ में आई और लोगों को समय पर उपचार मिल सका। 5,700 से ज़्यादा अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है, इनमें सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), बहुउद्देशीय कार्यकर्ता (एमपीडब्ल्यू), आशा कार्यकर्ता, आयुष चिकित्सक, सामान्य चिकित्सक और दंत चिकित्सक शामिल हैं। इससे कैंसर की स्क्रीनिंग, रेफरल और उपचार के बाद की निगरानी की स्थानीय क्षमता और मज़बूत हुई है।

डॉ. कैलाश शर्मा, मुख्य सलाहकार, टाटा कैंसर केयर फाउंडेशन एवं निदेशक, असम कैंसर केयर फाउंडेशन, ने कहा, “कैंसर की देखभाल में असली बदलाव उपचार शुरू होने से बहुत पहले ही आना शुरू हो जाता है। कैंसर के परिणाम बेहतर बनाने का सबसे बड़ा अवसर बीमारी को समय रहते पकड़ने और लोगों तक सही समय पर सही देखभाल पहुंचाने में छिपा है। इन बरसों में फाइज़र के साथ हमारी साझेदारी ने समुदाय में जागरूकता बढ़ाई है, स्क्रीनिंग का विस्तार किया है और कई राज्यों में स्थानीय स्वास्थ्य सेवा क्षमता खड़ी की है। साथ मिलकर हमने यह दिखा दिया है कि समुदाय की अगुवाई वाले साझा प्रयास कैंसर की देखभाल तक पहुंच को कैसे बेहतर बना सकते हैं और लंबे समय तक टिकने वाला असर कैसे छोड़ सकते हैं।”

यह उपलब्धि फाइज़र, टाटा कैंसर केयर फाउंडेशन, असम कैंसर केयर फाउंडेशन और सरकारी भागीदारों की उस साझा प्रतिबद्धता को सामने लाती है, जो लोगों, राज्य और स्वास्थ्य सेवा तंत्र पर कैंसर की देखभाल का बोझ हल्का करने के लिए है। आगे भी यह पहल समुदाय की अगुवाई वाली कैंसर रोकथाम को मज़बूत बनाती रहेगी, बीमारी की समय रहते पहचान को और सुलभ बनाएगी और ऐसी मज़बूत स्वास्थ्य प्रणाली खड़ी करेगी जो पूरे भारत में कैंसर से जुड़े परिणामों को बेहतर बनाए।

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