- भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ी
सिलचर नगर निगम चुनाव को लेकर रंगपुर के वार्ड नंबर 4 में प्रत्याशी चयन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सत्तारूढ़ दल की प्रत्याशी शिवानी रानी दास के खिलाफ दो निर्दलीय उम्मीदवारों—मानसी शुक्ल वैद्य और मोनिका मंडल—के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक हो गया है।
गुरुवार शाम संवाददाताओं से बातचीत के दौरान दोनों निर्दलीय प्रत्याशियों ने अपने चुनावी मैदान में उतरने की पृष्ठभूमि और अपनी राजनीतिक स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
मानसी शुक्ल वैद्य ने दावा किया कि वह पिछले करीब 33 वर्षों से भाजपा की सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में पार्टी से जुड़ी हुई हैं। वार्ड नंबर 4 से वह पार्टी के टिकट की प्रमुख दावेदारों में शामिल थीं। हालांकि, अंतिम समय में पार्टी ने शिवानी रानी दास को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। इसके बाद स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में बदलाव आया।
मानसी के अनुसार, पार्टी के इस निर्णय से इलाके के कई लोगों और भाजपा समर्थकों में नाराजगी देखने को मिली। स्थानीय जनता और समर्थकों के आग्रह पर उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान और अवसर मिलना चाहिए।
वहीं, मोनिका मंडल भी स्थानीय लोगों के समर्थन का दावा करते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरी हैं। दोनों निर्दलीय उम्मीदवार फिलहाल वार्ड के विभिन्न इलाकों में जनसंपर्क और प्रचार अभियान में जुटी हुई हैं।
प्रेस वार्ता के दौरान निर्दलीय प्रत्याशियों ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़े कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर दूसरी पार्टियों से आए लोगों को अधिक महत्व दिया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर भाजपा की ओर से इस रिपोर्ट के तैयार होने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वार्ड नंबर 4 में अब मुकाबला सत्तारूढ़ दल की प्रत्याशी शिवानी रानी दास और दो निर्दलीय उम्मीदवारों मानसी शुक्ल वैद्य तथा मोनिका मंडल के बीच दिखाई दे रहा है। ऐसे में भाजपा के परंपरागत समर्थक मतों में संभावित बंटवारा चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
चुनावी प्रचार के जोर पकड़ने के साथ ही रंगपुर के वार्ड नंबर 4 में राजनीतिक तापमान बढ़ता जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वार्ड की जनता सत्तारूढ़ दल के प्रत्याशी पर भरोसा जताएगी या फिर निर्दलीय उम्मीदवारों में से किसी एक को अपना समर्थन देगी? चुनाव परिणाम के साथ ही यह भी स्पष्ट होगा कि 33 वर्षों से पार्टी के साथ जुड़ी मानसी शुक्ल वैद्य की बगावत भाजपा के लिए कितनी चुनौती साबित होती है।
चंद्रशेखर ग्वाला सिलचर

