- पीपुल्स पल्स रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन के ताजा ट्रैकर पोल
- एनडीए 90 सीटों के आंकड़े को छूने की संभावना, एआईयूडीएफ से मुस्लिमों का मोह भंग
- बराक घाटी में 13 में से 8-10 सीट जीत सकती है भाजपा
गुवाहाटी, ( योगेश दुबे ) । असम विधानसभा चुनाव, 2026 के लिए विपक्ष की सभी तैयारियां धरी – धरी की रह जाने वाली है, चूंकि भाजपा बहुमत के साथ जीत की हैट्रिक लगाने की राह पर है। पीपुल्स पल्स रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन के ताजा ट्रैकर पोल के मुताबिक कांग्रेस को वनवास और काटने होंगे, जबकि सत्तारूढ़ भाजपा मजबूती के साथ सत्ता में पुनः वापसी करती दिखाई पड़ रही। डॉ. हिमंत विश्व शर्मा बतौर मुख्यमंत्री जनता की पहली पसंद बने हुए है।

पीपुल्स पल्स रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन के राजनीतिक विश्लेषक, निदेशक डॉ. राजन पांडेय गुवाहाटी में आज, 3 जनवरी 2026, एक संवाददाता सम्मेलन कर सर्वे के पहले चरण के बारे में जानकारी दी।15 नवंबर से 31 दिसंबर, 2025 तक किए गए इस सर्वे में भाजपा को 126 सदस्यीय वाली विधानसभा में 69-74 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बताया गया है, जिससे वह अकेले ही बहुमत का आंकड़ा पार कर सकेगी। एनडीए सहयोगी के साथ मिलकर, इस गठबंधन के 90 सीटों के आंकड़े को छूने की उम्मीद है, जो बिखरे हुए विपक्षी माहौल के बीच एक शानदार जीत का संकेत है। इन नतीजों से पता चलता है कि असम में भाजपा की पक्की पकड़ है, जो रणनीतिक गठबंधन, कल्याणकारी पहल और बड़े पैमाने पर सामुदायिक समर्थन पर बनी है।

राजनीतिक विश्लेषक और पीपल्स पल्स रिसर्च ऑर्गनाइजेशन के निदेशक डॉ. राजन पांडे ने यह रिपोर्ट तैयार की है। यह ट्रैकर पोल एक अहम मौके पर असम के मतदाताओं की नब्ज को पकड़ता है। भाजपा का प्रदर्शन न सिर्फ सत्ता में होने के फायदे दिखाता है, बल्कि अलग-अलग मतदाता समूह के साथ गहरा रिश्ता भी दिखाता है। जबकि इसके उलट कांग्रेस में सामुदायिक नेतृत्व की कमी को झेल रही। वहीं एआईयूडीएफ और यूपीपीएल जैसी पार्टियां, जो अपना वजूद बचाने की कोशिश कर रही हैं, बिखरी हुई हालत में है, ऐसे में एनडीए की जीत का रास्ता साफ दिखता है। सर्वे में एक चौकाने वाली बात यह है है कि मुस्लिमो की रहनुमा कहे जानी वाली एआईयूडीएफ से मुस्लिम मतदाताओं का मोह भंग हो रहा है।

मुस्लिम मतदाता का झुकाव कांग्रेस की तरफ बढ़ा रहा। राज्य में बराक घाटी से भाजपा 13 में से 8-10 जीत सकती है। ऊपरी असम में एनडीए के दबदबे की उम्मीद है, लेकिन विपक्ष को थोड़ी बढ़त मिलेगी। मध्य असम में आदिवासी इलाकों में एनडीए मजबूती हुई, लेकिन कांग्रेस की भी मामूली उपस्थिति रहेगी। निचले असम में सीमा परिसीमन से एनडीए की मजबूत स्थिति में आ गई है, यही नहीं बीटीएडी काउंसिल में भाजपा – बीपीएफ जीत का लाभ मिलेगा। सर्वे में 2023 का सीमा परिसीमन भाजपा के पक्ष में है, क्योंकि इससे उसका उनका आधार मजबूत होगा और मुस्लिम वोट कम होंगे। कांग्रेस अंदरूनी लड़ाई और उम्मीदवारों की कमी से जूझ रही है। एआईयूडीएफ की गिरावट और गहरी हो रही है। भाजपा की सांगठनिक ताकत, विकास और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने वाले लाभार्थी सत्तरूढ़ एनडीए की स्थिति को मजबूत कर रहा है। असम में हिंसा, जाने – माने हस्तियों की मौते, एसटी की मांगें, नौकरियां और महंगाई जैसे मुद्दे भाजपा प्रभावित करती नहीं दिख रही।
अनुमानित सीटों की गिनती में, भाजपा 69-74 सीटों के साथ सबसे आगे है। विपक्षी कांग्रेस 25-29 सीटें जीतने का अनुमान है। एनडीए के सहयोगी असम गण परिषद (अगप ) 8-11 और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) 8 -10 सीटों के साथ गठबंधन की ताकत को और बढ़ाते हैं। छोटी पार्टियों की उम्मीदें कम है। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) को 0-2 सीटें, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) को 0-2, रायजोर दल को 1-2, असम जातीय परिषद (एजेपी) को 0-1, सीपीआई (एम) को 0-1, और निर्दलीय/अन्य को 0-1 सीटें मिलने का अनुमान है।
यह अनुमान एनडीए को 64 सीटों की बहुमत सीमा से काफी ऊपर रखता है, जिससे भाजपा तीसरी बार अपने दम पर सरकार बना सकती है। यह राज्य में कांग्रेस के ऐतिहासिक तीन बार के सिलसिले को दिखाता है। सर्वे इसका श्रेय भजपा की अपने कोर वोट आधार को बनाए रखने और नए जनसांख्यिकीय में विस्तार करने की क्षमता को देता है। वोट शेयर की बात करें तो, भाजपा को 39 प्रतिशत मत मिलने का अनुमान है, जो कांग्रेस के 37 प्रतिशत से 2 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि यह अंतर कम है, लेकिन असम के छोटे चुनावी माहौल में यह काफी अहम है, जहां मामूली बदलाव भी सीटों में काफी बढ़ोतरी में बदल सकते हैं। दूसरी पार्टियों के अनुमानों में अगप को 7 प्रतिशत, बीपीएफ को 5.5 प्रतिशत, यूपीपीएल को 1.2 प्रतिशत,एआईयूडीएफ को 2.5 प्रतिशत, रायजोर दल को 0.9 प्रतिशत, एजेपी को 0.7प्रतिशत, सीपीआई एम) को 0.8 प्रतिशत और अन्य को 5 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। कांग्रेस के वोट शेयर में बढ़ोतरी ज्यादातर एआईयूडीएफ के कमजोर होने की वजह से हुई है, जिसमें मुस्लिम वोटरों का झुकाव 2024 के लोकसभा चुनावों में देखा गया था। हालांकि, सीमा परिसीमन, एनडीए के मजबूत सामाजिक गठबंधन और कमजोर विपक्षी जैसे जैसे फैक्टर कांग्रेस को वोटों को सीटों में बदलने से रोकते हैं।

सर्वे में बतौर मुख्यमंत्री के रूप में डॉ. हिमंत विश्व शर्मा जनता की पहली पसंद बने हुए है। जनता किसे मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है, उसमें मौजूदा मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा 30 प्रतिशत समर्थन के साथ सबसे आगे हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल 28 प्रतिशत समर्थन के साथ थोड़े आगे हैं। कांग्रेस सांसद और पार्टी प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई 27 प्रतिशत समर्थन के साथ उनके ठीक पीछे हैं, जो पार्टी की बड़ी मुश्किलों के बावजूद उनकी व्यक्तिगत अपील को दिखाता है। देबब्रत सैकिया (3प प्रतिशत), हग्रामा मोहिलरी (1 प्रतिशत), अतुल बोरा (1 प्रतिशत), दिलीप सैकिया (1 प्रतिशत), बदरुद्दीन अजमल (1 प्रतिशत), और अखिल गोगोई (1 प्रतिशत) जैसे अन्य काफी पीछे हैं, जबकि 7 प्रतिशत लोग अभी तय नहीं कर पाए हैं या दूसरों को पसंद कर रहे हैं। हालांकि सर्वे गौरव गोगोई की जनप्रियता मुख्यमंत्री की दौड़ में एक चुनौती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कांग्रेस पार्टी को उतना समर्थन मिला है। डॉ. शर्मा की बढ़त, हालांकि थोड़ी कम है, लेकिन महिला महिला मतदाता के समर्थन से और शक्तिशाली हुई है। आदिवासियों पुरुषों की पसंद सोनोवाल की तरफ झुकी हुई है।


