Sunday, September 6, 2026

असम विश्वविद्यालय में बनेगा बड़ा जनजातीय विरासत संग्रहालय, शिक्षा मंत्री डॉ. पेगु ने किया वादा 

  • मंत्री डॉ. पेगु ने स्वतंत्रता सेनानी वीर संभूधन फोंगलो प्रतिमा का किया अनावरण, कहा, मोदी सरकार में जनजातीय समुदाय को सम्मान, अधिकार और न्याय मिलना शुरू हुआ 

असम विश्वविद्यालय सिलचर परिसर में एक बड़ा जनजातीय विरासत संग्रहालय बनेगा। राज्य के शिक्षा एवं जनजातीय मामलों के मंत्री डॉ. रनोज पेगु ने यह वादा किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय विरासत को सम्मानित करने और उसकी रक्षा करने की एक ऐतिहासिक पहल में असम विश्वविद्यालय को एक ‘आदिवासी विरासत संग्रहालय’ समर्पित किया जाएगा, जो स्वदेशी समुदायों की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक परंपराओं के भंडार के रूप में कार्य करेगा।

इसके अलावा असम सरकार ने धोलाई में छात्रों के लिए एक छात्रावास स्थापित करने का निर्णय लिया है। विवि परिसर में वीर संभूधन फोंगलो की 175वीं जयंती पर उनकी प्रतिमा का अनावरण के बाद मंत्री ने उपरोक्त बातें कही। मंत्री डॉ. पेगु ने कहा कि केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद जनजातीय भाइयों को उचित सम्मान, अधिकार और न्याय मिलना शुरू हुआ। देश भर में जनजातीय गौरव दिवस मनाया गया। एक समय था जब जनजातीय बंटे हुए थे।

सभी को एक छतरी के नीचे लाने का काम मोदी सरकार में हुआ है। मंत्री डॉ. पेगु ने कहा कि जनजातीय जहाँ है, आज वही वन सुरक्षित है। दुनिया में आज जलवायु परिवर्तन पर गंभीर रूप में चर्चा हो रही है। विकास तेजी से हो रहा, लेकिन जल, जंगल, पहाड़ ख़तम हो रहा। आज यह दिन आ गए वन कहाँ अधिक सुरक्षित है, मौसम का एक अच्छा वातारवण कहां दिखाई पड़ता है, वहीं जहां जनजातीत लोग निवास करते है। असम में वन कार्बी – आंगलोंग, दिमा हसाओ, बीटीसी सहित कई क्षेत्रों में दिखाई देता है। जनजातीय समुदाय के विकास लिए प्रतिबद्धता दोहराया।

आगे कहा, देश की आजादी की लड़ाई में जनजातीय समुदाय की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मंत्री ने कम आयु में देश के लिए बलिदान देने वाले संभूधन फोंगलो जीवन दर्शन युवाओं के लिए प्रेरणा बताया। इस अवसर राज्य के दो अन्य मंत्री कौशिक राय, नंदिता गोरलोसा, विवि के कुलपति प्रो. राजीव मोहन पंत और बर्मन दिमासा कछारी विकास परिषद के अध्यक्ष रूपेश खेरसा बर्मन, दिलीप नुनीसा, संजय बर्मन आदि की उपस्थिति रही।

मंत्री कौशिक राय ने इतिहास के गुमनाम नायकों को पहचानने और उनका जश्न मनाने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके बलिदान और योगदान को संरक्षित करना भविष्य की पीढ़ियों के बीच गर्व और अपनेपन की भावना को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्वदेशी समुदायों के कल्याण के लिए असम सरकार की अटूट प्रतिबद्धता और राज्य के विकासात्मक रोडमैप में उनके उचित स्थान को सुनिश्चित करने के लिए उसके ठोस प्रयासों की सराहना की।

जबकि मंत्री नंदिता गोरलोसा ने आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने में सांस्कृतिक संरक्षण और शिक्षा की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार समावेशिता को बढ़ावा देने और हाशिए पर पड़े समुदायों के उत्थान के अपने मिशन में दृढ़ है। विवि के कुलपति प्रो. पंत ने अपने संबोधन में कहा कि आज का दिन गौरवपूर्ण है। देश के बलिदानियों को उचित सम्मान देना हम सभी कर्तव्य है। रूपेश खेरसा बर्मन ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए दिमासा भाषा – संस्कृति संरक्षण और महापुरुषों के जीवनी को सामने लाने पर बल दिया।

Popular Articles