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राज्य के शिक्षा एवं आदिवासी मामलों के मंत्री डॉ. रनोज पेगु असम विश्वविद्यालय, सिलचर में आयोजित एक कार्यक्रम में हिंदी भाषा के प्रति आदर एवं सम्मान प्रकट करते हुए कहा कि वह अपना वक्तव्य हिंदी में रखना चाहते हैं। मंत्री डॉ. पेगु के इस इच्छा प्रकट पर सबने ताली बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया। मंत्री ने आगे कहा कि बांग्ला और हिंदी दोनों भाषाओं में बोल सकते है।

बराक घाटी के दौरे के दौरान अनेक मर्तबा विभिन्न कार्यक्रमों में बांग्ला में वक्तव्य रखा है, लेकिन आज वह अपना भाषण हिंदी में रखने की कोशिश करेंगे। उल्लेखनीय है कि रविवार को असम विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित स्वतंत्रता सेनानी वीर संभूधन फोंगलो प्रतिमा अनावरण समारोह कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे मंत्री डॉ. रनोज पेगु ने हिंदी में अपना भाषण रखा। हिंदी में रखे गए उनके वक्तव्य को लोगों ने सराहा।
फ़िलहाल इसमें कोई शक नहीं हिंदी अब एक पसंदीदा भाषा बनती जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी हिंदी भाषा की महत्व तथा प्रासंगिकता को अनुभव किया गया है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनेक अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर गौरव पूर्वक हिंदी में संबोधन देकर हिंदी के महत्व को न केवल देश, बल्कि समूचे विश्व के सामने रखने का काम किया है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा को भी अक्सर हिंदी में वक्तव्य रखते दिखाई पड़ते है। ज्ञातव्य हो कि इसके पूर्व उन्होंने प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान राज्य दो अन्य मंत्री नंदिता गोरलोसा और कौशिक राय सहित असम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजीव मोहन पंत, बर्मन दिमासा कछारी विकास परिषद के अध्यक्ष रूपेश खेरसा बर्मन, धोलाई के विधायक निहार रंजन दास, कछार भाजपा के अध्यक्ष रूपम साहा, मणिपुरी विकास परिषद की अध्यक्ष रीना सिंह, दिमासा पीपुल्स काउंसिल एंड अंब्रेला ऑर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष दिलीप नुनीसा आदि की उपस्थिति रही।


