‘कर्मचारियों और दलालों का एक सिंडिकेट वर्षों से बाहरी मरीजों को बिना निर्धारित शुल्क चुकाए मेडिकल सेंटर में लाकर एमआरआई और सीटी स्कैन कर हर दिन हजारों रुपये की हेराफेरी कर रहा था’
सिलचर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसएमसीएच) में भी भ्रष्टाचार जड़ें जमाने लगी है। रेडियोलॉजी विभाग में भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है। एसएमसीएच ने चार स्थाई ( परमानेंट ) कर्मचारियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस दिया है जबकि छह संविदा कर्मचारियों को बर्खास्त (टर्मिनेटेड) किया है। भ्रष्टाचार की जांच के लिए एसएमसीएच ने पुलिस थाने में मामला भी दर्ज कराया है। फिलहाल तकनीशियन की अभाव में एमआरआई सेवा प्रभावित हुआ है।
एमआरआई सेंटर के मुख्य द्वार पर ताला जड़ा गया

एमआरआई गुरुवार से बंद कर दिया गया है। वैकल्पिक रूप से, चिकित्सा परिसर के भीतर असम कैंसर केयर फाउंडेशन के सिलचर कैंसर सेंटर में एमआरआई की व्यवस्था की गई है। संविदा कर्मचारियों की छंटनी की गई है, उनमें विश्वजीत दास, सरोज दास, अब्दुल वाहिद चौधरी, बापन देव, अब्दुल मुनीम लश्कर और लवली बेगम लश्कर शामिल हैं। ये 6 लोग कॉन्ट्रैक्ट वर्कर थे। वहीं 4 स्थाई कर्मियों को ”शो-केस” किया गया है। जिनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, उनके नाम कमरुल इस्लाम लस्कर, विनय छेत्री, समद अहमद लस्कर और शंकर देव है।
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मालूम हो कि इसके पूर्व मेडिकल पैथोलॉजी विभाग के सेंट्रल कंपोजिट लेबोरेटरी (सीसीएल) में भ्रष्टाचार का पता चलने के बाद पिछले जुलाई में 6 संविदा कर्मियों मुजीबुर रहमान मझारभुइया, पॉलंग रंगमई, ब्रह्मानंद कुर्मी, सौमेन घोष, अजीज शेख और रासु चंद्र दास की छंटनी कर दी गई थी। अब रेडियोलॉजी विभाग में सीटी स्कैन और एमआरआई कराने के नाम पर भ्रष्टाचार उजागर में आया है। दो सितंबर को हुई गवर्निंग बॉडी की बैठक में यह सवाल उठाया गया था। अगले दिन, 3 सितंबर को, रेडियोलॉजी विभाग के 6 अनुबंध पर रखे कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का आदेश दिया गया और 4 स्थायी कर्मचारियों को ‘कारण बताओ’ दिया गया।
एसएमसीएच के अधीक्षक प्रो. (डॉ.) देव कुमार चक्रवर्ती ने बताया कि जिन 6 संविदा कर्मियों को नौकरी से टर्मिनेटेड किया गया है, वे मरीजों की एमआरआई करने का काम करते थे। एमआरआई करने में तकनीशियन के रूप में लगे हुए थे।

वहीं जिन 4 स्थायी कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है, उन्हें भी इसी काम के लिए लगाया गया था। चूंकि आरोप वित्तीय भ्रष्टाचार के हैं, इसलिए इन चारों को भी फिलहाल एमआरआई करने की ड्यूटी से हटा दिया गया है। फिलहाल एमआरआई सेवा बंद है क्योंकि कोई अन्य स्टाफ उपलब्ध नहीं है। हालांकि, मरीजों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े, इसके लिए मेडिकल परिसर में ही स्थित असम कैंसर केयर फाउंडेशन के सिलचर कैंसर सेंटर में एमआरआई की व्यवस्था की गई है।

इसके अलावा एमआरआई कराने के लिए नए अनुबंध के आधार पर उपयुक्त स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी। इस नियुक्ति का विज्ञापन पहले ही हो चुका है। साक्षात्कार अगले शनिवार को आयोजित किया जाएगा। उपयुक्त नए स्टाफ की नियुक्ति होने तक मेडिकल एमआरआई मशीनें बंद रहेंगी। उस स्थान पर विकल्प के तौर पर कैंसर सेंटर में एमआरआई किया जाएगा।

बहरहाल एसएमसीएच की नज़र में जो मामला सामने आया है उनमे यह आरोप है कि कर्मचारियों और दलालों का एक सिंडिकेट वर्षों से बाहरी मरीजों को बिना निर्धारित शुल्क चुकाए मेडिकल सेंटर में लाकर एमआरआई और सीटी स्कैन कर हर दिन हजारों रुपये की हेराफेरी कर रहा था। शिकायत के मुताबिक मेडिकल इंडस्ट्री के अंदरूनी और बाहरी दलालों से मिलकर बने सिंडिकेट ने कई सालों तक इसी तरह भ्रष्टाचार कर अरबों रुपये हड़पे हैं। मेडिकल की आंतरिक जांच में यह भ्रष्टाचार सामने आने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने भ्रष्टाचार की जांच शुरू कर दी है।
Yogesh Dubey


