- नरसिंहतोला मैदान में आयोजित धरना – प्रदर्शन में इतनी बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए, सिलचर की ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई
सिलचर महानगर में आज “नो एसटी नो वोट” की गूंज सुनाई दी। ऑल असम आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ असम (आसा) ने आदिवासी और चाय जनगोष्टी के हितों को आगे रखते हुए यहां सिलचर में असम में रहने वाले एसटी/एससी का दर्जा देने सहित कई अन्य मांगों को पुरजोर तरीके से उठाया।
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ऑल असम आदिवासी स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ असम (आसा) द्वारा आयोजित इस आंदोलन में बराक चाय श्रमिक यूनियन, बराक चाय युवा कल्याण समिति, बराक वैली आदिवासी संघ और आदिवासी एवं चाय जनगोष्टी व सांस्कृतिक सम्मेलन, केंद्रीय समिति सह कई अन्य संस्था भी हिस्सा लेते हुए आवाज को बुलंद किया। सिलचर के नरसिंहतोला मैदान में आयोजित धरना प्रदर्शन में इतनी बड़ी संख्या में आदिवासी एवं चाय जनगोष्टी के लोग पहुंच गए थे कि आंदोलनकारियों को संभालने में पुलिस के पसीने छूट रहे थे। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई। सभी प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति हो गई।

इधर आंदोलन में लोग जिला आयुक्त कार्यालय की तरफ कूच करने के लिए प्रयास करने लगे, लेकिन पुलिस उन्हें रोके रखा। जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था। आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियों की भी भागीदारी नज़र आई। कई सूत्री मांगों को पुरजोर तरीके से उठाया गया, जिसमें एसटी / एससी दर्जा देने के अलावा आदिवासी एवं चाय जनगोष्टी को भूमि का स्वामित्व प्रदान करने, ब्रह्मपुत्र घाटी और बराक घाटी में चाय श्रमिकों की दैनिक मजदूरी समान रूप से देने और चाय श्रमिकों को प्रतिदिन 551 रुपया मज़दूरी देने की बात शामिल है।

प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने शांतिपूर्वक एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात को सरकार के समक्ष रखने की कोशिश की। धरना प्रदर्शन में जमकर नारे लगे। “नो एसटी – नो वोट” के नारे लगाए गए। कहा गया यदि उनकी मांगों को अनसुना कर दिया गया, तो आगामी समय में बृहद स्तर पर आंदोलन करने के अलावा कड़े निर्णय लेने के लिए बाध्य हो जाएंगे। आसा, कछार इकाई के अध्यक्ष सिलास मुंडा ने कहा कि सरकार लंबे समय से उनकी मांगों को पूरा करने में देरी कर रही है। अगर 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे राजनीतिक आंदोलन शुरू करने पर मजबूर होंगे। आदिवासी 2026 में भाजपा को वोट नहीं देंगे।

बराक चाय श्रमिक यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि यह आखिरी बार है जब वे सरकार से मांगें पूरी करने की अपील कर रहे हैं। उसके बाद, एक जोरदार आंदोलन शुरू होगा। श्री सिंह ने कहा कि वे टकराव नहीं चाहते, लेकिन अगर सरकार उन्हें मजबूर करती है तो वे टकराव के लिए तैयार हैं। बराक चाय युवा कल्याण समिति के एक अधिकारी गंगासागर कर्मकार ने कहा कि बराक वैली और असम में चाय समुदाय और आदिवासियों को हर तरह से नजरअंदाज किया जाता है।

उन्होंने मांग की कि सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियां 2026 के विधानसभा चुनाव में बराक वैली की 13 सीटों में से कम से कम 5 सीटों पर चाय समुदाय से उम्मीदवार बनाएं। उनके मुताबिक, बराक घाटी में चाय समुदाय का एक भी विधायक नहीं है। इसलिए, बराक घाटी में इस समुदाय की समस्याओं को विधानसभा में ठीक से पेश नहीं किया जाता है। बराक वैली टी ट्राइब्स डेवलपमेंट सोसाइटी के अधिकारी भी आंदोलन में शामिल होते दिखे। उनमें से एक, बाबुल कुमार ने कहा कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आगे एक मज़बूत आंदोलन किया जाएगा, और अगर इसकी वजह से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती है, तो इसके लिए सरकार ज़िम्मेदार होगी।
उनका कहना था कि दो सौ वर्षों से उनके पूर्वज इस धरती, अर्थात चाय बागानों में, को सींचा है। अथक मेहनत से चाय उद्योग को आगे बढ़ाया है। उन्होंने मांग न पूर्ण होने पर चुनाव समय आदिवासी एवं चाय जनगोष्टी के लोग मतदान न देने की धमकी दी। बराक वैली आदिवासी संघ के अध्यक्ष दिलीप कुमार पानीका ने भी यही बात दोहराया। बराक चाय श्रमिक यूनियन के अन्य पदाधिकारी रवि नुनिया, बाबुल नारायण कानू, दुर्गेश कुर्मी, खिरोद कर्मकार सहित अन्य ने प्रमुखता से इस आंदोलन में हिस्सा लेते हुए दिखाई दिए। दोपहर 1 बजे नरसिंहतोला में मजिस्ट्रेट पी चराई के ज्ञापन लेने के बाद कुछ देर तक नारेबाजी होती रही। फिर प्रदर्शनकारी वहां से चले गए।
योगेश दुबे


