Monday, September 7, 2026

मणिपुर के जिरीबाम में हिंसा, 5 की मौत: घर में घुसकर बुजुर्ग की हत्या; फिर कुकी-मैतेई के बीच फायरिंग में 4 की जान गई

राज्य में तनाव को देखते हुए सभी स्कूलों-कॉलेजों को बंद कर दिया गया है

 

मणिपुर में फिर हिंसा भड़क गई है। असम के कछार जिले के लखीपुर विधानसभा क्षेत्र से सटे मणिपुर के जिरिबाम में शनिवार को अलग-अलग दो घटनाओं में 5 लोगों की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, पहली घटना जिला हेडक्वार्टर से करीब सात किलोमीटर दूर हुई। संदिग्ध पहाड़ी उग्रवादियों ने एक घर में घुसकर बुजुर्ग को सोते समय गोली मार दी। मृतक की पहचान कुलेंद्र सिंघा के रूप में हुई।

वह घर में अकेले रहते थे। दूसरी घटना इसके बाद हुई। इसमें कुकी और मैतेई समुदायों के बीच गोलीबारी हुई। इसमें 4 लोगों की मौत हो गई। इलाके में सुबह से लगातार गोलीबारी की खबरें आ रही हैं। मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है। दूसरी तरफ, इंफाल वेस्ट और इंफाल ईस्ट में शुक्रवार (6 सितंबर) देर रात भीड़ ने मणिपुर राइफल्स हेडक्वार्टर पर हमला कर दिया। गुस्साई भीड़ सुरक्षाबलों से हथियार लूटना चाहती थी।

पुलिस ने CRPF जवानों के साथ मिलकर जवाबी कार्रवाई की। उन्होंने पैलेट गन से कई राउंड फायरिंग की। मॉक बम और आंसू गैस के गोले भी दागे।  सुरक्षाबलों और भीड़ के बीच रातभर संघर्ष चला। 5 लोगों के घायल होने की खबर है। उन्हें JNIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अभी तक हथियार या गोला-बारूद लूटे जाने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि दोनों जगहों पर हिंसा में मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ सकती है।

राज्य में तनाव को देखते हुए सभी स्कूलों-कॉलेजों को बंद कर दिया गया है। कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) ने कानून-व्यवस्था लागू करने में सरकार की विफलता के विरोध में काम बंद करने और जनता कर्फ्यू का आह्वान किया है। इंफाल में सुबह से सभी दुकानें बंद हैं। सड़कें और बाजार सुनसान पड़े हैं।  7 दिनों में हिंसा की चौथी घटना, 1 सितंबर से अब तक 8 की मौत मणिपुर में 1 सितंबर से अब तक 7 दिनों के भीतर हिंसा की 4 बड़ी घटनाएं हुई हैं।

7 सितंबर की घटना को छोड़ दें तो अन्य तीन घटनाओं में 3 लोगों की मौत और 12 घायल हुए हैं। 1 सितंबर: करीब एक साल से जारी हिंसा में पहली बार ड्रोन से हमला मणिपुर में मई 2023 से हिंसा जारी है। हालांकि, इस साल सितंबर में पहली बार ड्रोन हमला देखने को मिला। इंफाल वेस्ट जिले के कोत्रुक गांव में 1 सितंबर को उग्रवादियों ने पहाड़ी के ऊपरी इलाके से कोत्रुक और कडांगबांड घाटी के निचले इलाकों में फायरिंग की और ड्रोन से हमला किया। इसमें 2 लोगों की मौत और 9 घायल हुए थे ।

मणिपुर में इंफाल जिले के सेजम चिरांग गांव में सोमवार (3 सितंबर) की शाम उग्रवादियों ने ड्रोन अटैक किए। इसमें एक महिला समेत 3 लोग घायल हो गए। पुलिस ने बताया कि यह दो दिन में दूसरा ड्रोन अटैक है। उग्रवादियों ने रिहायशी इलाके में ड्रोन से 3 विस्फोटक गिराए, जो छत को तोड़ते हुए घरों के अंदर फटे। उग्रवादियों ने पहाड़ी की चोटी से गोलीबारी भी की।

मणिपुर के बिष्णुपुर जिला स्थित मोइरांग में शुक्रवार (6 सितंबर) को पूर्व मुख्यमंत्री मैरेम्बम कोइरेंग के घर पर हमला हुआ था। कुकी उग्रवादियों ने दोपहर 3 बजे पूर्व CM के घर पर रॉकेट बम फेंका था। इस हमले में 1 एक बुजुर्ग की मौत हो गई, जबकि 5 लोग घायल हो गए। कांग्रेस नेता मैरेम्बम कोइरेंग राज्य के पहले मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वे 1963 से 1967, 1967 में 200 दिन और 1968 में 3 बार मणिपुर के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनका निधन 27 दिसंबर 1994 को हो हुआ था।

इस घटना से कुछ घंटे पहले मोइरांग से 4 किमी दूर ट्रोंगलाओबी इलाके में रॉकेट बम से हमला हुआ था। इसमें 2 इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। मोइरांग में पहली बार बंदूक-बम से हमला हुआ है। मणिपुर में 3 मई, 2023 से कुकी और मैतेई समुदाय के बीच आरक्षण को लेकर हिंसा चल रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हिंसा में अब तक 226 लोगों की मौत हो चुकी है। 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। 65 हजार से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ चुके हैं।

मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इंफाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं। मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए।

समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाई कोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए।

मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी काे युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है।

यह सब खुलेआम हो रहा है। इन्होंने नागा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया। बाकी दोनों जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इंफाल घाटी में हैं। ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा। मणिपुर के 60 विधायकों में से 40 विधायक मैतेई और 20 विधायक नगा-कुकी जनजाति से हैं। अब तक 12 CM में से दो ही जनजाति से रहे हैं।

एजेंसी

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