Monday, September 7, 2026

मुख्यमंत्री ने कहा, स्वतंत्रता संग्राम में चाय बागान के श्रमिकों रहा बहुत बड़ा योगदान, मुलुक चलो आंदोलन के इतिहास को याद रखना चाहिए 

  • अमर बलिदानी मंगल पांडेय और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रतिमा का भव्य अनावरण 
  • सिलचर शहर में जल्द शुरू होगा फ्लाईओवर का काम 

असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में बराक घाटी में स्थित चाय बागान के श्रमिकों का बहुत बड़ा योगदान रहा है। यह याद रखना होगा कि असम की धरती, बराक घाटी की चाय बागानों में अंग्रेजो के खिलाफ ‘मुलुक चलो आंदोलन’ हुआ था।

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चाय श्रमिकों ने अपना जो बलिदान दिया है, इस इतिहास को हमेशा याद रखना चाहिए। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने रविवार को सिलचर महानगर में दो महान स्वतंत्रता सेनानियों के प्रतिमा का अनावरण किया। शहर के रंगीरखाड़ी में नेताजी सुभाष चंद्र बोस और घुंघुर बाईपास चौक पर स्थापित अमर बलिदानी मंगल पांडेय की प्रतिमा का अनावरण किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश के पहले शहीद स्वतंत्रता संग्रामी, 1857 क्रांति के वीर नायक मंगल पांडेय ने ब्रिटिशों के खिलाफ जो विद्रोह किया, उसके बाद पुरे देश में सिपाही विद्रोह की गूंज सुनाई दी। सिर्फ बीस वर्ष की आयु में मंगल पांडेय ने अपना बलिदान दिया था। उनसे प्रेरित होकर देश में कई स्थानों पर ब्रिटिशों के विरुद्ध सिपाही विद्रोह हुआ। बराक घाटी में भी सिपाही विद्रोह हुआ।

मुख्यमंत्री ने श्रीभूमि जिले के मालेगढ़ में हुए सिपाही विद्रोह स्थल का जिक्र किया। सिपाही विद्रोह के ऐतिहासिक तथ्य को साझा करते हुए कहा कि 26 लोग शहीद हुए थे और पांच अंग्रेज सैनिक भी मारे गए। वहीं चाय बागानों में “मुलुक चलो आंदोलन” अंग्रेजो के खिलाफ बड़ा संग्राम था। बड़ी संख्या में लोगों ने अपना बलिदान दिया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस इतिहास को स्मरण रखना चाहिए। मुलुक चलो आंदोलन चाय श्रमिकों द्वारा किया गया आंदोलन था। इतिहास को भूलना नहीं चाहिए, बल्कि हमें प्रेरणा लेनी चाहिए।

एक मंगल पांडेय सिपाही विद्रोह कर अपना बलिदान देकर हर भारतीय को आजादी की लड़ाई के लिए प्रेरित किया। परिणाम स्वरुप बराक घाटी में भी सिपाही विद्रोह और मुलुक चलो आंदोलन जैसा संग्राम हुआ था। मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के नायक, वीर मंगल पांडे की प्रतिमा को सिलचर शहर में अनावरण करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। हम लोग स्वाधीन देश के नागरिक है और स्वाधीनता हमारा अधिकार है।

इसलिए सिलचर में स्थापित दो महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस और अमर बलिदानी मंगल पांडेय की प्रतिमा आने वाले दिनों में युवा पीढ़ी को देश भक्ति के लिए प्रेरणा देने का काम करेगा ऐसा उन्हें आशा है। बहुत सही समय पर इस अंचल में उचित स्थान पर प्रतिमा स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री ने इस इस दौरान यह भी कहा कि अगले दो महीने बाद पुनः सिलचर प्रवास पर आने वाले है।

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सिलचर शहर में ट्रैफिक जाम से निजात मिले उसके लिए फ्लाईओवर निर्माण के लिए आधारशिला रखेंगे। फ्लाईओवर के लिए 700 करोड़ मंजूर किए गए हैं। अढ़ाई वर्ष में फ्लाईओवर बन जाएगा यह वादा किया।

मंच पर एनआईटी, सिलचर के निदेशक दिलीप कुमार वैद्य, जीसी स्टेट विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. निरंजन राय, असम के दो मंत्री कौशिक राय, कृष्णेंदु पाल, सांसद परिमल शुक्लवैद, कृपानाथ मल्लाह, राज्यसभा सांसद कणाद पुरकायस्थ, विधायक क्रमशः दीपायन चक्रवर्ती, मिहिर कांति सोम, निहार रंजन दास, विजय मालाकार, कछार के जिला आयुक्त मृदुल यादव, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नुमाल महत्ता, कछार भाजपा के अध्यक्ष रूपम साहा, जिला परिषद के अध्यक्ष कंकन नारायण सिकदर सहित, शहीद मंगल पांडेय मूर्ति स्थापना समिति के अध्यक्ष उदय शंकर गोस्वामी, सलाहकार अमिताभ राय, कार्यकारी अध्यक्ष मानव सिंह, महासचिव प्रदीप कुमार कुर्मी मौजूद रहे।

समारोह में विशिष्ट गणमान्य और शहीद मंगल पांडेय मूर्ति स्थापना समिति के अन्य पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता उपस्थिति थे। मूर्ति स्थापना समिति के अध्यक्ष उदय शंकर गोस्वामी ने अपने स्वागत भाषण में प्रतिमा स्थापना से जुड़ी बातें और मंत्री कौशिक राय की विशेष भूमिका को रखा। मुख्यमंत्री के हाथो प्रतिमा का अनावरण होना सौभाग्य बताया। समिति द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा को मंगल पांडेय की कैनवास फोटो और गणेश की प्रतिमा भेंट की गई। आमंत्रित अतिथियों को भी मंगल पांडेय की तस्वीर भेंट की गई। इस अवसर पर दिन दयाल उपाध्याय और श्रीमंत शंकरदेव पर  लिखी गई दो पुस्तकों का विमोचन हुआ। मुख्यमंत्री को सुनने के लिए भारी भीड़ उमड़ी।

योगेश दुबे पूर्वोत्तर हलचल

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