Saturday, September 5, 2026

वीर लचित बोरफुकन की शौर्य की वजह से आज असम भारत का है अभिन्न हिस्सा : रूपम नंदी पुरकायस्थ

  • आक्सा ने मनाया ‘वीर लचित बोरफुकन की 403 वीं जयंती

ऑल कछार करीमगंज हैलाकांदी स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आक्सा) ने वीर लचित बोरफुकन की 403 वीं जयंती मनाया। इस अवसर पर गुरुचरण राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति निरंजन राय, भारत सेवाश्रम संघ, सिलचर प्रभारी के गुण सिंधु महाराज,जिला क्रीड़ा संघ के अध्यक्ष शिवव्रत दत्त, आक्सा के मुख्य सलाहकार रूपम नंदी पुरकायस्थ, असम विश्वविद्यालय, बांग्ला विभाग के अध्यापक वरुण ज्योति चौधरी, अधिवक्ता रजत घोष, समाजसेवी सीमांत भट्टाचार्य सहित आक्सा संयोजक सैदूर रहमान की उपस्थिति रही।

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सभी वक्ताओं ने वीर लचित बोरफुकन के जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि असम के गौरवशाली इतिहास को युवा पीढ़ी को जानना चाहिए। वीर लचित बोरफुकन की शौर्य की वजह से आज असम और पूर्वोत्तर राज्य भारत का अभिन्न हिस्सा है। वीर लचित बोरफुकन बलिदान से यह शिक्षा मिलती है, प्राथमिकताओं में राष्ट्र प्रथम होना चाहिए। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा की सरकार ने वीर लचित बोरफुकन के बलिदान की कहानी को घर – घर तक पहुंचाने में बड़ा काम किया है। असम में 24 नवंबर 2025 को वीर लाचित बरफुकन की 403वीं जयंती मनाई गई।

सिलचर में आक्सा द्वारा आयोजित जयंती समारोह में बड़ी संख्या में स्कूली छात्र भी मौजूद रहे। यह दिन असम और भारत भर में अहोम सेनापति लचित बोरफुकन के साहस और नेतृत्व को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने 1671 में सराईघाट के युद्ध में मुगलों को हराकर असम की स्वतंत्रता की रक्षा की थी। उनकी वीरतापूर्ण जीत ने उन्हें असम में एक राष्ट्रीय नायक और गौरव का प्रतीक बना दिया। आक्सा वीर लचित बोरफुकन का जयंती हर वर्ष मनाती है और युवा पीढ़ी से बोरफुकन की जीवन का अनुकरण करने के प्रेरित करती है। इस मौके पर कई लोगों का सम्मान भी किया गया।

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