Monday, September 7, 2026

शिलकुड़ी चाय बागान अंतर्गत चलता बस्ती के नतून टीला एलपी स्कूल की एसएमसी ने प्रधान शिक्षक को प्रवेश से रोका, आवंटन चावल, इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रांट फंड में हेरफेर और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के आरोप 

  • भोजन बनाने हेतु जलावन बच्चों से मंगाए जाने का भी आरोप मढ़ा गया

कछार जिले के सालछपरा शिक्षा खंड अंतर्गत चलता बस्ती ( शिलकुड़ी चाय बागान अधीन इलाका ) में स्थित 1446 नंबर नतून टीला एलपी स्कूल में भ्रष्टाचार का मामला उठा है। शिक्षा विभाग मूकदर्शक बनी हुई। सालछपरा शिक्षा खंड अधिकारी से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

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स्कूल प्रबंधन समिति ने आरोप लगाया है कि आवंटन चावल, इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रांट फंड में हेरफेर और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है। तीन महीने का आवंटन चावल और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ग्रांट रुपये का कोई हिसाब नहीं है। इसके अलावा दोपहर को भोजन बनाने हेतु जलावन बच्चों से मंगाए जाने का भी आरोप मढ़ा गया। कई अन्य गंभीर आरोप भी मढ़े गए।

समिति के अध्यक्ष बिंदु भर, उपाध्यक्ष सुदाम भर, सदस्य राम कुमार ग्वाला, गोपाल भर, वार्ड मेंबर उत्तम लाल श्रीवास्तव के नेतृत्व में उपस्थित छात्र अभिभावकों ने सुबह साढ़े सात बजे प्रधान शिक्षक मनोज दास को स्कूल में प्रवेश करने से रोक दिया। मांग की गई कि शिक्षा अधिकारी को बुलाकर आवंटन चावल और ग्रांट रूपए का हिसाब दिया जाए। इसके अलावा अन्य उठाए गए विषयों को सुना जाए। स्कूल के प्रधान शिक्षक को स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि अपने कार्यालय में जाएं, अधिकारियों से बात करें और स्कूल प्रबंधन समिति ने जो भी समस्याओं को उठाया है उसके समाधान करने करने में अपनी भूमिका निभाएं।

इस दौरान इन लोगों ने जमकर नारे बाजे की। विरोध को देखते हुए प्रधान शिक्षक दास को वापस लौटना पड़ गया। वर्ष 1976 में स्थापित नतून टीला एलपी स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्य राम कुमार ग्वाला ने कहा कि विद्यालय सालछापरा शिक्षा खंड अंतर्गत आता है। 2025 में फरवरी महीने के बाद पिछले वर्ष के, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर, तीन महीने का आठ कुंटल से अधिक चावल इस स्कूल के लिए जारी हुआ था, जिसमें केवल चार कुंटल 19 किलो ही आया था। शेष साढ़े चार कुंटल चावल का कोई हिसाब नहीं है।

इस मुद्दे को संबंधित अधिकारी तक जानकारी साझा किया गया। इन लोगों ने जोरशोर से इस विषय को उठाया था। सप्ताह में तीन दिन प्रत्येक बच्चों को एक अंडा खिलाने की बात थी,लेकिन केवल आधा – आधा अंडा खिलाया गया। इस स्कूल में 140 से 150 छात्र है। बच्चों को भोजन खिलाने में भी भ्रष्टाचार किया जाना बताया। सब्जी बनाने में मसाले में भी भ्रष्टाचार की बात की। कहा गया सब्जी पकाने में आवश्यकता अनुसार मसाला नहीं दिया जा रहा। खाना पकाने में जलावन यानि लकड़ी लाने में बच्चों को लगाया जाता है। बच्चे पढ़ाई करने की बजाय चूल्हा जलाने में लकड़ी लाने में लग,जाते।

वर्ष 2024 में स्कूल के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 50 हजार ग्रांट हुआ था, जिसका कोई हिसाब नहीं है। कहां खर्च हुआ, कितना व्यय हुआ इसका कोई हिसाब नहीं है। वर्ष 2025 की जनवरी, फ़रवरी और मार्च के लिए चावल जारी हुआ या नहीं, यदि जारी हुए तो उसकी जानकारी भी नहीं दिया गया। इसके अलावा 2025 में स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जो रुपया ग्रांट हुआ है अभी तक पहुंचा नहीं है और बताया भी नहीं जा रहा। उपरोक्त विषयों को संबंधित अधिकारी से लेकर जिला आयुक्त तक कई मर्तबा ज्ञापन के माध्यम से दी गई है।

प्रदेश के मंत्री कौशिक राय के समक्ष भी उठाया गया है, उन्होंने उनके पत्र को डीसी को फार्वडिंग किया, लेकिन उसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है।  इसके पूर्व सालछपरा के ब्लॉक अधिकारी को सब कुछ बताया गया था। पत्र के माध्यम से भी स्कूल में क्या चल रहा है अवगत कराया गया था। ब्लॉक अधिकारी मौके पर पहुंचकर थोड़ा जायजा भी लिया था। ग्वाला ने कहा कि उन लोगों की शिकायत यही है कि स्कूल में चल रहा सही से जांच हो और दोषी प्रधान हेडमास्टर खिलाफ कार्रवाई हो।

इस पूरे प्रकरण में कोई और भी शामिल है तो उसके विरुद्ध भी कार्रवाई की जानी चाहिए। स्कूल समिति चाहती है कि छात्रों के भविष्य और उनके स्वास्थ्य के साथ कोई खिलवाड़ न हो। सरकार जब छात्रों के उज्जवल भविष्य के लिए सुविधाएं दे रही है और स्कूल में बच्चे पढ़ने आए व उनके बेहतर स्वास्थ्य हेतु भोजन भी खिला रही, तो फिर एक प्रधान शिक्षक को इसमें कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए।

राम कुमार ग्वाला ने बताया कि एसएमसी ने स्कूल में जो हुआ, जो हो रहा या छात्रों के भविष्य के साथ जो खिलवाड़ किया जा रहा उन मुद्दों को उठाने का काम किया है, लेकिन अफ़सोस प्रधान शिक्षक ने अपनी गलतियों को ढकने के लिए एसएमसी के खिलाफ ही असम विश्वविद्यालय पुलिस चौकी मामला दर्ज कर रखा है। एसएमसी ने शिक्षा खंड अधिकारी, जिला आयुक्त से जांच की मांग की। बराक घाटी विकास विभाग के मंत्री कौशिक राय से भी ठोस कदम उठाने की मांग दोहराई।

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