Monday, September 7, 2026

सड़कों के विस्तार व नालों के निर्माण में आ रही बाधाओं पर विधायक चक्रवर्ती ने कहा, भूमि सीमांकन हेतु स्टेट सर्वे को लिखा है पत्र, पटवारियों के एक वर्ग की भूमिका पर उठ रहे सवाल 

विवेकानंद रोड व कठल रोड में रुकावट के कारण बताये 

सिलचर की विभिन्न इलाकों में नालों के निर्माण या सड़क विस्तार के लिए सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, भूमि विभाग के पटवारियों के एक वर्ग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जिस तरह से उन्होंने भूमि को चिह्नित किया है या कर रहे हैं, उसके बारे में शिकायतों का कोई अंत नहीं है। ऐसी स्थिति में स्थानीय विधायक दीपायन चक्रवर्ती ने राज्य सर्वेक्षण प्राधिकरण को पत्र लिखा है और उन्होंने आग्रह किया है कि सिलचर आकर भूमि की पहचान करने में भूमिका निभाए।

सोमवार को मीडिया से बात करते हुए विधायक ने विशेष रूप से विवेकानंद रोड व कठल रोड का मुद्दा उठाते हुए कहा कि क्षेत्र के कई निवासियों ने इन दोनों क्षेत्रों में भूमि के सीमांकन को लेकर सवाल उठाए हैं। विधायक ने अप्रत्यक्ष रूप से पटवारियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि वर्षों पहले की गलतियां आज भारी पड़ रही। बिना नाम लिए उन्होंने कांग्रेस शासनकाल के दौरान हुई भूल का जिक्र किया। भूमि सीमांकन प्रक्रिया में पटवारियों ने शिकायतों की पहचान की प्रक्रिया में कुछ लोगों को छूट दे दी थी। दीपायन ने कहा कि शिकायत करने वालों की तरह वह भी पहचान प्रक्रिया को लेकर संशय में हैं।

इसलिए इस बार उन्होंने उन दो क्षेत्रों में भूमि चिन्हित करने के लिए पुनः “राज्य सर्वेक्षण प्राधिकरण” को पत्र लिखा है। विधायक दीपायन ने कहा कि मौजूदा सरकार सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए कृतसंकल्प है। हालांकि, यह भी एक तथ्य है कि पूर्व में जिन पटवारियों या संबंधित विभागीय कर्मचारियों ने हेराफेरी कर सड़क और नालों की जमीन बेची है, उनमें से कई अभी भी काम कर रहे हैं। यद्यपि वर्तमान सरकार की कार्य संस्कृति के कारण कई लोगों की मानसिकता बदल गई है, फिर भी कुछ लोग अभी भी ऐसे हैं जो पहले वाली चालाकी और हेराफेरी पर ही चल रहे हैं। वे सरकारी जमीन बेचने की मानसिकता को नहीं बदल सके। उनकी गतिविधियों पर संदेह है, इसलिए चेतावनी दी गई है।

इस समूह के काम का परिणाम है पूरा विभाग बदनाम हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पटवारी जिस तरह से जमीन की निशानदेही करते हैं, उसके आधार पर संबंधित विभाग नालियों या सड़कों का काम करता है। यदि कोई पटवारी अनैतिक कारणों से चिह्नांकन प्रक्रिया में हेराफेरी करता है और उसके आधार पर कार्य हो जाता है, तो वह सरकारी भूमि लंबे समय तक अतिक्रमण से मुक्त नहीं हो सकेगी। जिसके चलते “राज्य सर्वेक्षण प्राधिकरण” को पत्र लिखकर इन चीजों को आकर सत्यापन करने को कहा गया है।

उन्होंने यह भी दृढ़ प्रतिबद्धता व्यक्त की कि जबरन स्थानांतरण के मामले में किसी को भी विशेष सुविधाएं देने का कोई सवाल ही नहीं उठता। विधायक ने कहा कि राज्य में डॉ. हिमंत विश्व शर्मा सरकार में कोई भी अधिकारी, कर्मचारी नियम विरुद्ध कार्य किया तो उसके खिलाफ ज़रूर कार्रवाई होगी। डॉ. हिमंत विश्व शर्मा सरकार ही है, जब भू – माफियाओं को भी बख्शा नहीं गया है।

योगेश दुबे

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