- फर्जी चिकित्सकों की धर पकड़ के लिए पुलिस ने तेज किया अभियान
फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ कछार पुलिस ने अभियान को जारी रखा है। इस क्रम में दो और फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया। पिछले 15 दिनों में कछार पुलिस ने कुल 6 फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया हैं। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नुमाल महत्ता ने मंगलवार को मीडिया कर्मियों के साथ बातचीत में इसकी जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि सिलचर के सेकेंड लिंक रोड से पंकज चौधरी और कलाइन से सुबीर चौधरी को पकड़ा है। एसएसपी ने बताया कि दोनों फर्जी डॉक्टर है। इनके पास डॉक्टर होने या चिकित्सा संबंधी कोई भी वैध दस्तावेज नहीं है। लेकिन दोनों ही क्लिनिक खोलकर डॉक्टरी कर रहे थे। पंकज चौधरी फेक नाम से डॉक्टरी कर रहा। जबकि सुबीर चौधरी कछार जिले कलाइन का रहने वाला है और अवैध रूप से क्लिनिक चला रहा था ।
एसएसपी ने अभियान के बारे डिटेल जानकारी साझा करते हुए बताया कि असम मेडिकल रजिस्ट्रेशन काउंसिल (एसीएमआर) के एंटी क्वेकरी एवं विजिलेंस ऑफिसर डॉ. अभिजीत नियोग द्वारा दी गई सूचना और पुष्टि के आधार पर, सिलचर पुलिस स्टेशन, कछार में एक प्राथमिकी दर्ज की गई। प्राथमिकी में, उन्होंने आरोप लगाया कि सिलचर के सेकंड लिंक रोड निवासी पंकज चौधरी अवैध रूप से मेडिसिन स्पेशलिस्ट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और डायबिटीज़ स्पेशलिस्ट के रूप में प्रैक्टिस कर रहे हैं।
आरोप है कि आरोपी दवाइयाँ जारी कर रहा है, साइनबोर्ड लगा रहा है और खुद को एमबीबीएस, एमडी, पीजीटी (गैस्ट्रो) और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से फ़ेलोशिप जैसी योग्यताओं वाला बता रहा है। वह खुद को एक पंजीकृत चिकित्सक होने का दावा करने के लिए पंजीकरण संख्या 24147 का उपयोग कर रहा है। सत्यापन पर, पता चला कि पंजीकरण संख्या 24147 उसका नहीं है। यह नंबर वास्तव में एक अन्य डॉक्टर, डॉ. पंकज चौधरी, पुत्र जगदीश प्रसाद चौधरी, कटरा, गोंडा, उत्तर प्रदेश को आवंटित है, जो एक वास्तविक चिकित्सक हैं।
वास्तविक डॉ. पंकज चौधरी ने 2003 में कज़ाख विश्वविद्यालय, अल्माटी, कज़ाखस्तान से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की, उसी वर्ष भारत में पंजीकरण प्राप्त किया, के.जी. मेडिकल कॉलेज, लखनऊ (2006-2009) से एमडी (जनरल मेडिसिन) और बाद में एम्स, नई दिल्ली से गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में डीएम की डिग्री प्राप्त की। गिरफ्तार पंकज अपने नाम के एक अन्य अतः, अभियुक्तों के कृत्य स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी, जालसाजी, प्रतिरूपण और बिना वैध पंजीकरण के चिकित्सा पद्धति के अंतर्गत आते हैं, जो एनएमसी अधिनियम, 2019 की धारा 34/35/36/37 और असम मेडिकल काउंसिल अधिनियम, 1999 की धारा 18 और 26 के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत दंडनीय हैं।
एक ही नाम का फायदा उठाकर पंकज फर्जीवाड़ा कर रहा। पंकज के पास से जो दस्तावेज मिले है, सभी जन्मतिथि, पिता का नाम या अन्य जानकारी भिन्न भिन्न है। पुलिस उसके सभी दस्तावेज की बारीकी से जांच कर रही। पंकज स्थानीय एक महिला प्रोफेसर से विवाह भी किया है। एसएसपी ने आगे बताया कि एक गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते उन्होंने कलाइन निवासी सुबीर चौधरी के बारे में शिकायत दर्ज कराई, जो खुद को एमबीबीएस डॉक्टर बता रहा था और कलाइन स्थित बसंती फार्मेसी नामक फार्मेसी में लंबे समय से मरीजों का इलाज करके अवैध रूप से प्रैक्टिस कर रहा था।
हालाँकि, उसके पास राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त कोई योग्यता नहीं है। कलाइन स्थित बसंती फार्मेसी में तुरंत छापा मारा गया और सुबीर चौधरी, सिंदौरा, थाना कलाइन निवासी को गिरफ्तार किया गया, जो फार्मेसी के अंदर अपने चैंबर में एक मरीज का इलाज करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। उसके पास से कई आपत्तिजनक सामग्री और दस्तावेज जब्त किए गए हैं। आगे की कार्रवाई शुरू की जा रही है।
योगेश दुबे – पूर्वोत्तर हलचल


