Sunday, September 6, 2026

बराक घाटी के लगभग 25 फीसदी चाय बागानों में बोनस देने की प्रक्रिया है लंबित,…तो ये है कारण

  • पालोरबंद चाय बागान के श्रमिक समुदाय को लेकर यूनियन ने जताई चिंता 

असम की बराक घाटी में स्थित चाय बागानों में बोनस दिए जाने की प्रक्रिया जारी है। कई दिन पहले जिला प्रशासन, बागान प्रबंधन और श्रमिक यूनियन तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों की हुई बैठक में इस बात पर जोर दिया गया था कि श्रमिकों का बोनस समय पर भुगतान हो जाना चाहिए। इस क्रम में विभिन्न चाय बागानों में बोनस जारी करने करने की प्रक्रिया संपन्न हो गई है या जारी है।

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बोनस के संबंध मीडिया को जानकारी जानकारी देते हुए बराक चाय श्रमिक यूनियन के साधारण संपादक राजदीप ग्वाला। 

बहरहाल कुछ चाय बागानों में बोनस अभी जारी नहीं किया गया, चूँकि श्रमिकों ने दुर्गा पूजा से ठीक एक सप्ताह पहले देने को कहा है। उन्हें डर है कि बोनस पहले मिल जाने से रुपये खर्च हो जाएंगे, ऐसे में पूजा का आनद किरकिरा हो जाएगा। हालांकि एक सत्य यह भी है कि चाय उद्योग की वर्तमान स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। दुनिया के विभिन्न देशों में युद्ध की स्थिति, प्रतिस्पर्धी बाजार, इन सबका असर बराक घाटी के चाय उद्योग पर पड़ा है।

फिलहाल, दुर्गा पूजा को लेकर मजदूरों के उत्साह में कोई कमी नहीं है। बोनस की रकम हाथ में आते ही, वे अपने बच्चों और बच्चियों के लिए कपड़ों की खरीदारी के साथ पूदुर्गोत्सव का आनंद लेने के बारे में सोचने लगे हैं। इस बीच, कई चाय बागनों में श्रमिकों को उनका बोनस मिल गया है। मालूम हो कि सरकार ने बराक घाटी के चाय श्रमिकों को बोनस भुगतान के लिए 10 सितंबर तक की समय सीमा तय की थी। यह समय सीमा कल, बुधवार को समाप्त हो गई। अभी तक सभी बागानों में बोनस का भुगतान नहीं किया गया है।

बराक चाय श्रमिक यूनियन के साधारण संपादक राजदीप ग्वाला ने बताया कि बराक घाटी में लगभग 213 चाय बागान हैं। इनमें से करीब 75 फीसदी बागानों ने बुधवार को तय समय सीमा तक बोनस का भुगतान कर दिया है या फिर बातचीत के जरिए बोनस दर तय करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। करीब 25 फीसदी बागानों में बोनस दर तय करने की प्रक्रिया अभी लंबित है। उन्होंने कहा कि हालांकि इस पर बातचीत चल रही है और उन्हें उम्मीद है कि यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद बोनस का पैसा जल्द ही श्रमिकों तक पहुंच जाएगा। यूनियन का प्रयास है श्रमिकों को एक अच्छा बोनस मिल सके, ताकि दुर्गोत्सव आनंद उनका दोगुना हो सके। प्रशासन और बागान प्रबंधन के साथ संवाद कर बोनस प्रक्रिया को संपन्न कराने में जुटे है।

राजदीप ने कहा कि हालांकि कुछ बागानों में बोनस दर तय हो गई है, लेकिन श्रमिक अभी इसे स्वीकार नहीं करना चाहते। उनका तर्क है कि अगर उन्हें इतनी जल्दी पैसा मिल गया तो वह कुछ ही दिनों में खत्म हो जाएगा। इसलिए वे चाहते हैं कि पूजा से एक हफ्ते पहले बोनस का पैसा उन्हें सौंप दिया जाए। उदाहरण के तौर पर उन्होंने बड़खोला के बालाछोड़ा और लखीपुर के दिलकुश जैसे कुछ बागानों का नाम लिया। उनके मुताबिक, अगर श्रमिक चाहें तो प्रबंधन इन बागानों में अभी बोनस का भुगतान कर देंगे। लेकिन श्रमिक ख़ुद चाहते हैं कि कुछ दिनों बाद उन्हें यह मिल जाए, ताकि वे उस पैसे से पूजा का सही से आनंद ले सकें।

जिन बागानों में बोनस का फैसला हो चुका है या दर निर्धारण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उनमें कुछ बागान जैसे थालीग्राम, माटीछोरा, दयापुर, चंडीघाट और कुंभीग्राम आदि में अधिकतम 20 प्रतिशत बोनस दर तय की गई है। उन्होंने कहा कि कछार के बोरोकाई बागान में इस वर्ष बोनस की कोई संभावना नहीं है। क्योंकि वह बागान पिछले साल बंद हो गया था। फिर भी, जो नए मालिक आगे आए हैं, यूनियन ने उनसे अनुरोध किया है कि वे पूजा के अवसर पर श्रमिकों को कम से कम कुछ पैसे तो दें। इसके साथ ही पालोरबंद बागान को लेकर भी चिंताएं हैं।

क्योंकि इस बागान में श्रमिकों का लंबे समय से भविष्य निधि ( पीएफ ) बकाया है। उन्हें नियमित फ़ोन आ रहे हैं, कुछ हफ़्तों का राशन भी बकाया है। इस बीच, पालोरबंद के प्रबंधन ने कहा है कि वे सबसे कम 8.33 प्रतिशत की दर से ही बोनस दे सकते है। उक्त चाय बागान के श्रमिक समुदाय इस बात से कतई सहमत नहीं हैं। पालोरबंद बागान के बारे में राजदीप ने बताया कि श्रमिकों ने अपनी चिंताएं व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि पालोरबंद चाय से होकर भारतमाला परियोजना के तहत सड़क बन रहा, भारतमाला परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहित की गई हैं। चाय बागान प्रबंधन को इसके लिए सरकार से बड़ी रकम मिली है। बराक चाय श्रमिक यूनियन ने ज़िला आयुक्त से अनुरोध किया था कि श्रमिकों के बकाये का भुगतान करने से पहले बागान प्रबंधन को भारतमाला के लिए अधिग्रहित भूमि का पैसा न दिया जाए।

लेकिन सुनने में आया है कि रकम का भुगतान हो चुका है। अगर यह भुगतान न हुआ होता, तो इस पैसे से श्रमिकों दिए जा सकते थे। यूनियन अब भी मांग कर रहा है कि भारतमाला परियोजना के लिए मिली राशि से श्रमिकों का बोनस एवं अन्य बकाया दिया जाए। राशन और तलब भी जारी किया जाना चाहिए।

योगेश दुबेपूर्वोत्तर हलचल

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