Monday, September 7, 2026

मंत्री रुपेश ग्वाला की दो टूक, चाय बागानों के मालिक पक्ष अपनी तकलीफों के साथ श्रमिकों की परेशानियों को भी तो समझे

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असम के श्रम एवं चाय जनजाति कल्याण मामलों के मंत्री रुपेश ग्वाला ने चाय बागानों में श्रमिकों को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बागान मालिकों के रवैये पर दुख जताया और दो टूक शब्दों में कहा है कि मालिक पक्ष केवल अपनी तकलीफें बताता है, लेकिन मज़दूरों की परेशानी, दुःख दर्द समझने का भी प्रयास करें।

मंत्री ग्वाला लखीपुर के लाबक चाय बागान खेल मैदान में आयोजित बराक चाय श्रमिक यूनियन के हीरक जयंती समारोह को संबोधित करते हुए यह बाते कही। मंत्री ग्वाला ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा चाय उद्योग और इससे जुड़े सभी लोगों के हितों को लेकर संजीदगी से काम कर रहे हैं। मालिक पक्ष और श्रमिक समाज दोनों की बेहतरी के लिए सरकार काम कर रही है। बागान के मालिकों से उनकी थोड़ी नाराजगी है।

इस अवसर पर चाय बागानों के कई मालिक प्रतनिधिगण भी बैठे थे। मंत्री ने श्रमिकों से जुड़े विभिन्न समस्याओं को उजागर करते हुए मालिक पक्ष से गंभीर होने की अपील की। चाय उद्योग चला रहे लोग अपनी समस्याओं को बयां करते है लेकिन वह उनसे कहना चाहते हैं कि श्रमिक समुदाय की समस्याओं के प्रति भी गंभीर हो। एक श्रमिक जब खुश रहेगा, सेहतमंद रहेगा, उसका पारिवारिक संसार सही से चलेगा तभी वह अच्छे से काम करेगा। इस लहाज़ से उद्योग भी अच्छे से चल सकेगा।

किन्तु जब श्रमिक को वेतन कम मिलेगा और पीएफ और ग्रेच्युटी नहीं मिलेगा, ऐसे में कहाँ से आप एक श्रमिक से अच्छे से काम करने की उम्मीद कर सकते है। ताली एक हाथ से नहीं बजती यह मालिक पक्ष को भी विचार करना होगा। मालिक पक्ष बोलते हैं बागान अच्छे से नहीं चल रहा। एक सभा में उन्होंने कहा था, यदि यह सत्य है तो वह दूसरे को हेंडओवर करा देते हैं। सभा चार लोग बागान लेने के लिए तैयार हो गए। राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा मालिक पक्ष के साथ भी हैं। चाय उद्योग को खड़ा करने, बंद फैक्ट्री को पुनर्जीवित करने के लिए प्रयासरत है।

बसर्ते मालिक पक्ष को भी एक सोच के साथ आगे आना होगा। केवल वे अपनी दुखड़ा सुनाएंगे और श्रमिक समुदाय के दुःख को नहीं समझेंगे तो समस्या होगी। चाय बागानों के मालिक से यही आशा रखते हैं कि अच्छे सोच के साथ आगे आएं और श्रमक समुदाय के हितों का ध्यान रखे। मंत्री ग्वाला ने कहा कि सिलचर दौरे के दौरान उन्होंने यह अनुभव किया ब्रह्मपुत्र से कहीं अधिक बराक घाटी में समस्याएं है। अनेक बागान बंद है।

कई बागान अच्छे से नहीं चल रहे। विभिन्न बागानों में श्रमिकों को तय मज़दूरी नहीं मिल रहा। कुछ बागानों के पीएफ फंड ही नहीं जमा हुए है। उन्होंने गत कल सिलचर में कछार जिला आयुक्त कार्यालय में एक बैठक कर समीक्षा की। बैठक में डीसी, श्रम अधिकारी, बागान के मालिक पक्ष, श्रमिक यूनियन, संबंधित विभागों के पदाधिकारीगण सहित मंत्री और विधायकों की उपस्थिति थी। चाय उद्योग चलायमान रखना है और श्रमिकों की समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जा रहा। वह जब से मंत्री बने है उनका प्रयास है कि सभी जिलों में एक बैठक कर मूल समस्याओं समाधान की दिशा में बढ़ा जा सके।

योगेश दुबे

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