- समिति का पुनर्गठन, सरकार से ओबीसी दर्जा देने की मांग को आगे बढ़ाया गया
प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी पूज्यपाद संत शिरोमणि महात्मा गणिनाथ जयंती समारोह धूमधाम से मनाई गई। शिलचर स्थित हिंदी भवन में मध्यदेशीय वैश्य समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में संत गणिनाथ के द्वारा सामाजिक, धार्मिक तथा आध्यात्मिक उत्थान, के लिए किए गए कार्यों के बारे में चर्चा के साथ – साथ स्वजातीय बंधुओं का सामाजिक, आर्थिक व शैक्षिक विकास हेतु विचार – विमर्श किए गए। मध्यदेशीय वैश्य समाज के मेधावी विद्यार्थियों का, ‘राधा मोहन कानू स्मृति’ एवं ‘राज नारायण कानू’ स्मृति पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।
VIDEO
समारोह में बराक उपत्यका के मध्यदेशीय वैश्य महासभा , बराक उपत्यका शाखा के वरिष्ठ, महिला तथा युवा समिति की कार्यकारिणी का पुनर्गठन किया गया। मध्यदेशीय वैश्य सभा, बराक शाखा के अध्यक्ष बाबुल नारायण कानू ने बताया कि सुबह बजे झंडोत्तोलन एवं अभ्युदय गान हुआ। उसके बाद बाबा गणिनाथ जी का पूजन एवं प्रसाद वितरण के अलावा अभिनन्दन समारोह का आयोजन किया गया।

बाबा गणिनाथ जी के जीवन चरित्र पर परिचर्चा, संगठन के गतिविधियों पर विचार – विमर्श हुआ।इस अवसर पर बाबुल नारायण कानू द्वारा सम्पादित बराक उपत्यका के मध्यदेशीय वैश्य (कानू) समाज का कुछ तथ्यात्मक विवरण किताब का विमोचन किया गया। सभा में मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए सरकार से ओबीसी दर्जा देने की मांग को आगे बढ़ाया गया। बाबुल नारायण कानू ने कहा कि उनका समाज अधिकतर चाय बागान से है, ऐसे में शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के लिए सरकारी स्तर पर इस समाज के लिए ध्यान दिया जाना चाहिए।

समारोह में असम प्रदेश अध्यक्ष अनिल गुप्ता, महामंत्री सरोज कुमार गुप्ता,संरक्षक छोटेलाल गुप्ता, प्रदेश युवा समिति अध्यक्ष जयप्रकाश कानू, विवेक गुप्ता, आनंद गुप्ता, अजय कुमार गुप्ता समारोह आयोजन समिति के अध्यक्ष श्यामा प्रसाद कानू, चतुर्भुज साह, दुर्गा प्रसाद कानू,मनोज कानू, मुरलीधर कानू, उमाशंकर बनिया, रंजीत अग्रहरि, नन्दलाल बनिया,विजय कानू, संजीव कानू अनिरुद्ध कानू, मोतीलाल कानू, सीमा कुमार,विजय प्रसाद कानू, गायत्री कानू आदि मंचासीन थे।
समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। जिसमें मेघा कानू ने कान्हा को लेकर एवं बिहू नृत्य प्रस्तुत किया। सभा के अन्त में हालही में जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए बीएसएफ जवान के याद में एक मिनट मौन धारण कर शान्ति व सद्गति कामना की गई। अंत में राष्ट्रगान के बाद सभा समाप्ति की घोषणा की गयी।


