Saturday, April 18, 2026

बराक हिंदी साहित्य समिति ने हर्षोल्लास से मनाई संत तुलसीदास की जयंती 

  • समिति के अध्यक्ष उदय शंकर गोस्वामी अध्यक्षता में मुख्य वक्ता के रूप में एफए डिग्री कॉलेज के सहायक अध्यापक डॉ. संतोष मिश्रा की रही उपस्थिति

बराक हिंदी साहित्य समिति प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी हिंदी भवन में संत तुलसीदास की जयंती हर्षोल्लास से मनाई। सर्वप्रथम समिति के महासचिव प्रदीप कुमार कुर्मी  ने अध्यक्ष उदय शंकर गोस्वामी और मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित एफए कॉलेज के सहायक अध्यापक डॉ. संतोष मिश्रा को मंच पर आसीन कराया। संयुक्त सचिव युगल किशोर त्रिपाठी के हाथों मुख्य वक्ता को अंग वस्त्र भेंट कर उनका सम्मान किया गया ।

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समिति के अध्यक्ष उदय शंकर गोस्वामी, उपाध्यक्ष क्रमशः कन्हैयालाल सिंगोदिया, दुर्गेश कुर्मी, महासचिव प्रदीप कुमार कुर्मी, संयुक्त सचिव युगल किशोर त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष सांवरमल काबरा सहित समिति की सह सचिव श्रीमती बिंदु सिंह, कार्यालय सचिव प्रमोद जायसवाल, कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती किरण त्रिपाठी, श्रीमती अपर्णा तिवारी, श्रीमती सबिता जायसवाल, प्रचार सचिव योगेश दुबे सहित समिति के सदस्य अनूप पटवा, गोपाल कोइरी, श्रीमती सुपर्णा तिवारी आदि की उपस्थिति में संत तुलसीदास की प्रतिकृति पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर पुष्पांजलि की गई।

तत्पश्चात सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ हुआ। श्रीमती अपर्णा तिवारी ने चौपाई का पाठ किया। कक्षा नौवीं की छात्रा मानस्वी दुबे ने संत तुलसीदास की दोहा और उसका अर्थ भी सुनाया। समिति के पूर्व सांस्कृतिक सचिव अनूप पटवा ने संत तुलसीदास की एक चौपाई और राम – केवट प्रसंग पर, एक भजन की प्रस्तुति दी। मुख्य वक्ता डॉ. संतोष मिश्रा ने अपने संबोधन में संत तुलसीदास के जीवनी और उनके द्वारा रचित ग्रंथों पर प्रकाश डाला।

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समिति के अध्यक्ष उदय शंकर गोस्वामी ने अपने संबोधन में कहा कि गोस्वामी तुलसीदास को नमन करते हैं, जिन्होंने समाज के कल्याण और आध्यात्मिक उत्थान के लिए अद्वितीय कार्य किए हैं। आज हम एक ऐसे ही महाज्ञानी और संत की जयंती पर एकत्रित हुए हैं, जिनकी रचनाएं भारतीय संस्कृति और सनातन की अमूल्य धरोहर हैं।

महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी की, जो भगवान श्रीराम के परम भक्त और श्रीरामचरितमानस जैसे कालजयी ग्रंथ के रचयिता थे। उन्होंने अपने काव्य और लेखन के माध्यम से प्रभु श्रीराम के आदर्शों और जीवन चरित्र को अवधी भाषा में जन-जन तक पहुंचाया। श्रीरामचरितमानस जैसे कालजयी ग्रंथ हिन्दुओं को धर्म से जोड़कर संगठित रखने का भी काम किया।

अध्यक्ष श्री गोस्वामी ने कहा कि समिति अपने कार्यालय में एक पुस्तकालय बनाने पर जोर देगा। कहा, पुस्तकालय में संत तुलसीदास के रचित ग्रंथों के आलावा और अन्य धार्मिक ग्रंथ एवं हिंदी साहित्य पुस्तकों को भी रखे जाएंगे, ताकि आज की युवा पढ़कर संस्कारी बन सके। समिति के उपाध्यक्ष कन्हैयालाल सिंगोदिया ने समारोह को संबोधित करते हुए तुलसीदास की जीवनी पर आधारित कुछ मूल्यवान जानकारी साझा की।अंत में श्रीमती अपर्णा तिवारी, श्रीमती किरण त्रिपाठी, श्रीमती सबिता जायसवाल और सुपर्णा तिवारी ने गोस्वामी तुलसीदास जी के दोहा और छंद का पाठ किया।

महासचिव प्रदीप कुमार कुर्मी ने कुशल संचालन के साथ – साथ धन्यवाद ज्ञापन किया। विदित हो कि संत तुलसीदास जी को ‘रामचरितमानस’ और हनुमान चालीसा के भी रचयिता के रूप में जानते हैं। वह भगवान राम के प्रति अपनी अनंत भक्ति के लिए जाने जाते हैं।

योगेश दुबे पूर्वोत्तर हलचल

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