- बराक चाय श्रमिक यूनियन भी श्रमिक समाज के ख़ुशी में हुआ सम्मिलित
- सरकार की बड़ी पहल, संशोधन विधेयक पारित, चाय बागान श्रमिकों को मिलेगा भूमि का अधिकार
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शुक्रवार को चाय बागानों में हर्षोल्लास दिखाई दिया। महिलाएं झुमुर नृत्य कर कर रही थी। पुरुष वर्ग आनंद से लबरेज था। युवा अपने उज्जवल भविष्य को लेकर आश्वस्त दिखाई पड़ा। बूढ़े बुजुर्ग अपने पुराने अतीत की यादों से बाहर निकलकर नए सपनों के बीज की बुवाई कर रहा था। वजह एक ही था। असम सरकार ने एक लंबे समय से चली आ रही सामाजिक असमानता को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
राज्य विधानसभा में शुक्रवार को दि आसाम फिक्सेशन ऑफ सीलिंग ऑन लैंड होल्डिंग्स (अमेंडमेंट) एक्ट, 2025 पारित कर चाय समुदाय के लोगों को जमीन का हक दिलाने की डॉ. हिमंत विश्व शर्मा सरकार ने ऐतिहासिक पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि इस संशोधन विधेयक के पारित होते ही चाय बागान मालिकों की गुलामी के शिकंजे से राज्य के लगभग 3 लाख चाय श्रमिक मुक्त हो जाएंगे। इसके तहत श्रमिक लाइनों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी से बसे चाय श्रमिक परिवारों को जमीन का पट्टा मिलेगा।
संबंधित चाय श्रमिक परिवार 20 साल तक अपनी जमीन किसी को बेच नहीं सकेंगे और इस अवधि के बाद बेचना चाहें भी तो उसी श्रमिक लाइन के किसी अन्य चाय समुदाय के परिवार को ही बेच सकेंगे। इससे उक्त जमीन चाय समुदाय के लोगों के पास ही रहेगी। मंत्री केशव महंत ने सदन में दि आसाम फिक्सेशन ऑफ सीलिंग ऑन लैंड होल्डिंग्स (अमेंडमेंट) एक्ट, 2025 को पारित करने का प्रस्ताव रखा। सत्तापक्ष और विपक्षी पार्टियों ने बहस में भाग लिया। राजस्व मंत्री केशव महंत ने सदन भा को संशोधन विधेयक लाने की सरकार की मंशा पर प्रकाश डाला और कहा कि आजादी के लंबे समय बाद मौजूदा सरकार ने सन 1956 के कानून में संशोधन लाने की पहल की है। विभागीय मंत्री के जवाब के बाद अध्यक्ष ने या ध्वनिमत से विधेयक को पारित किए जाने की घोषणा की।
राज्य विधानसभा में पारित “असम भूमि धारण सीमा निर्धारण (संशोधन) अधिनियम, 2025” के तहत अब चाय बागानों में रहने वाले मजदूर परिवारों को उनके आवासीय भूमि पर वैधानिक स्वामित्व प्राप्त होगा। सरकार ने इस सुधार को “ऐतिहासिक सुधारात्मक कदम” बताया है, जो राज्य के लाखों चाय श्रमिकों के जीवन में स्थायी परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री ने इस कानून को चाय जनजातियों के प्रति दशकों से चली आ रही अन्यायपूर्ण स्थिति को सुधारने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार चर क्षेत्रों में भी सर्वे कर रही है और पात्र निवासियों को उचित समय पर भूमि अधिकार प्रदान किए जाएंगे। साथ ही, नए स्वामित्व वाले परिवारों को घर निर्माण हेतु अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने की घोषणा भी की गई।
इस सुधार के माध्यम से पहली बार चाय मजदूर परिवार अपने घरों के कानूनी मालिक बनेंगे। इससे उनके सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मजबूती मिलेगी, जीवन-स्तर सुधरेगा और स्थायी बसावट को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम असम की भूमि नीति में संरचनात्मक बदलाव का प्रतीक है, जो राज्य की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण श्रमिक समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल साबित होगी। असम सरकार ने राज्य विधानसभा में एक ऐसा बिल लाया, जो उनके दुख दर्द को खत्म करने वाला माना जा रहा। मालूम हो कि इस बिल के ज़रिए चाय बागान के मजदूरों को ज़मीन का मालिकाना हक़ दिया जाएगा। यह उन ज़मीनों पर होगा जहाँ वे सालों से रह रहे हैं।
डॉ. हिमंत विश्व सरकार ने यह बिल राज्य विधानसभा में पेश कर दिया। यह बिल चाय बागान के मजदूरों को ज़मीन का हक़ दिलाएगा। बराक घाटी की चाय बागानों में उत्साह दिखाई दिया। चाय श्रमिकों के चेहरे पर मुस्कुराहट स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहे थे। उनके उत्साह को दोगुना करने के लिए चाय श्रमिक से जुड़े यूनियनों भी शामिल हुए। असम सरकार द्वारा असम विधानसभा में शुक्रवार को चाय श्रमिकों को भूमि का अधिकार प्रदान करने का ऐतिहासिक बिल पेश करने का दृश्य लाइव टेलीकास्ट करने के लिए चाय बागान मैनेजमेंट को चाय बागान पंचायत से वार्तालाप कर व्यवस्था का निर्देश दिया था।
बराक चाय श्रमिक यूनियन के साधारण संपादक राजदीप ग्वाला ने बराक घाटी के सभी चाय श्रमिक भाई बहनों को लाइव टेलीकास्ट देखने के लिए अनुरोध किया। साधारण संपादक राजदीप ग्वाला के अनुरोध पर श्रमिक समाज लाइव टेलीकास्ट को देखा और वह अपनी ख़ुशी को साझा किया। यूनियन के प्रतिनिधि भी कई बागानों में पहुंचे और श्रमिक समाज की ख़ुशी की पल में सम्मिलित हुए। कहा गया कि चाय श्रमिकों को भूमि का अधिकार देने का यह सिद्धांत युगान्तकारी है, बराक चाय श्रमिक यूनियन ने असम सरकार के मुख्यमंत्री डॉ हिमंत विश्व शर्मा को को इस सिद्धांत लेने के लिए साधुवाद देते हुए आभार व्यक्त किया है।
विदित हो कि जिला प्रशासन ने भी समस्त चाय बागानों के मैनेजमेंट को अपने-अपने यहां श्रमिकों को लाइव टेलीकास्ट दिखाने का निर्देश दिया था। लाइव टेलीकास्ट की समुचित व्यवस्था की गई थी। असम के मंत्री कौशिक राय ने अपने विधानसभा क्षेत्र का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था, जिसमें महिलाएं झुमुर नृत्य के साथ लोकगीत गा रही थी। मंत्री राय अपने इस पोस्ट में लिखा कि लखीपुर इलाके में ख़ुशी का पल है। उनके जीवन खुशियां भरने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा का बहुत बहुत आभार व्यक्त करते है।
राज्य के चाय विभाग सहित श्रम मंत्री रुपेश ग्वाला ने इस बिल को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अपने अधिकार पाने के लिए 200 साल की प्रतीक्षा करनी पड़ी। उनके पास भी अपने घर का कोई दस्तावेज नहीं। लेकिन आज इसे समझने का किसी ने प्रयास किया है, तो वह मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा है। मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा के इस ऐतिहासिक कदम से श्रमिक समाज घरों में ख़ुशी का माहौल है। मुख्यमंत्री डॉ. शर्मा भी दोहरा चुके है कि सरकार इस समुदाय के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। वे उनके सांस्कृतिक, शैक्षिक और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए कई कदम उठा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि असम में चाय उद्योग के 200 साल पूरे हुए है। इसके पूर्व फरवरी में हुए एक कार्यक्रम में भाग लेने वाले करीब 8,000 ‘झुमोइर’ (एक तरह का लोक नृत्य) कलाकारों को सम्मानित किया गया। हर कलाकार और प्रशिक्षक को 25,000 रुपये दिए गए। वहीं, विशेषज्ञ समिति के सदस्यों को 50,000 रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे गए। मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि इस तरह का सम्मान चाय बागान समुदाय को सशक्त बनाता है। यह असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी दुनिया के सामने लाता है।


