- एक स्थान पर मुख्यमंत्री के साथ नजर आए मंत्री कौशिक राय और पूर्व विधायक राजदीप ग्वाला

आखिरकार, भाजपा में राजदीप ग्वाला के साथ चल रही उलझनें खत्म होती दिख रही हैं। पिछले कुछ महीनों से पार्टी से कुछ दूर चल रहे राजदीप रविवार को मुख्यमंत्री डॉ हिमंत विश्व शर्मा के कई कार्यक्रम में शामिल होते दिखे। मुख्यमंत्री का बराक चाय श्रमिक यूनियन कार्यालय में आना राजनीतिक जानकारों के लिए एक नए आकलन करने पर बाध्य कर दिया है। वर्ष 2026 के चुनाव के अलग संकेत दे रहे। यूनियन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि शनिवार, 6 दिसंबर को असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा बराक चाय श्रमिक यूनियन कार्यालय का दौरा किया।

यूनियन कार्यालय में लाल कार्पेट बिछाकर उनका स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री के साथ मंत्री कौशिक रॉय और कृष्णेंदु पाल, विधायक मिहिर कांति सोम, दीपायन चक्रवर्ती, कमलाख्या डे पुरकायस्थ, विजय मालाकार और अन्य नेता उपस्थित थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों का उत्तरीय से अभिनंदन किया गया।मुख्यमंत्री को उपहार भी भेंट किए गए। महासचिव राजदीप ग्वाला ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने चाय श्रमिकों को भूमि पट्टा प्रदान करने के सरकार के हालिया निर्णय के लिए मुख्यमंत्री को बधाई दी और आभार व्यक्त किया। सह साधारण सम्पादक रवि नूनिया ने मुख्यमंत्री को अनुरोध किया कि बैठक में चाय समुदाय की जाति के लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे का समाधान किया जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि चाय श्रमिकों को उनकी सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद भविष्य निधि, ग्रेच्युटी, डीएलआई आदि जैसी उनकी देय राशि मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने चाय श्रमिकों को एक महीने के भीतर उनका बकाया दिलाने के लिए कानून बनाकर समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने विभिन्न वक्ताओं द्वारा यूनियन के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की माँग को स्वीकार किया और इसके लिए उचित उपायों पर चर्चा की। इसके अलावा, बैठक में यूनियन परिसर में महिला छात्रावासों और स्किल सेन्टर की परियोजनाओं को अपनाने की माँग की गई। अपने भाषण के संदर्भ में, उन्होंने बराक के दिवंगत मंत्री और श्रमिक नेता दिनेश ग्वाला को याद किया और एक श्रमिक नेता के रूप में राजदीप ग्वाला की प्रशंसा की।
बैठक में यूनियन के महासचिव राजदीप ग्वाला, संयुक्त महासचिव रवि नुनिया, खिरोद कर्मकार, बिपुल कुर्मी, बाबुल नारायण कानू, सचिव सुरेश बड़ाईक, सह सचिव दुर्गेश कुर्मी, उषा सिंह, बसंती चक्रवर्ती, मधुमिता पटवा, विशुद्धानंद महतो, किशोर रविदास, सुरजीत कर्मकार, सुदीप ग्वाला, बिरसा उरांग, ललन प्रसाद ग्वाला, जयदीप ग्वाला, अनुप बर्मा, विश्वजीत कोइरी, गंगासागर (बिजू) कर्मकार, विक्रम ग्वाला, सिउसागर गोंड, शिवचरण रविदास, रूपा सिंह और अन्य लोग उपस्थित थे। यूनियन के संयुक्त महासचिव ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसकी जानकारी दी।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस से भाजपा में शामिल होने के बाद, राजदीप को पिछले विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला था। तब से पार्टी से उनकी दूरी बढ़ती जा रही थी। अक्टूबर में, जब मुख्यमंत्री बराक घाटी के दौरे पर आए थे, तो राजदीप एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए एक बार जाने के अलावा किसी कार्यक्रम में नहीं दिखे थे। हालांकि, शनिवार रात सिलचर में बराक चाय श्रमिक यूनियन कार्यालय में मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद स्थिति बदल गई। रविवार को मुख्यमंत्री के गुवाहाटी लौटने से पहले, राजदीप उनके हर कार्यक्रम में पूरे जोश के साथ शामिल होते दिखे।
राजदीप मुख्यमंत्री को एयरपोर्ट तक छोड़ने के लिए उनकी कार में भी गए। सूत्र बताते हैं कि पार्टी की तरफ से राजदीप को शनिवार रात बराक चाय श्रमिक यूनियन कार्यालय में आने का मैसेज भेजा गया था। राजदीप यूनियन के महासचिव हैं, इसलिए वे कुछ दूसरे अधिकारियों के साथ ऑफिस में मौजूद हैं। रात करीब 9 बजे मुख्यमंत्री, मंत्री कौशिक रॉय और कृष्णेंदु पाल, विधायक दीपायन चक्रवर्ती, मिहिर कांति सोम और विजय मालाकार के साथ भाजपा की श्रीभूमि जिला कमेटी के अध्यक्ष संजीव बनिक के साथ कार्यालय पहुंचे।
यह एजेंडा मुख्यमंत्री के शेड्यूल में नहीं था। खबरों के मुताबिक, करीब डेढ़ घंटे चली इस खास बैठक में चाय मजदूरों की अलग-अलग दिक्कतों के साथ-साथ राजदीप को भाजपा का टिकट मिलने पर भी डिटेल में बात हुई। सूत्रों ने बताया कि राजदीप आखिरकार लखीपुर के बजाय उधारबंद से चुनाव लड़ने के लिए मान गए हैं। वैसे, पार्टी 2021 के विधानसभा चुनाव में उधारबंद से राजदीप को टिकट देना चाहती थी। लेकिन कुछ कारणों की वजह से मामला बन नहीं पाया। पिछले अक्टूबर में मुख्यमंत्री ने बराक वैली का दौरा किया और लखीपुर से कौशिक रॉय को फिर से चुनाव लड़ाने का पक्का वादा किया, जिससे यह दूरी और भी बढ़ती दिख रही थी। इन सबके बीच, राजनीतिक गलियारों में उन्हें लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
ये चर्चाएं 20 नवंबर को चाय समुदाय को जनजाति बनाने के आंदोलन के इर्द-गिर्द एक और मोड़ ले गईं। यूनियन भी आदिवासी छात्र संगठन (आसा) के साथ मिलकर इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। राजदीप को बदनाम करने के लिए भाजपा में पहले से ही हलचल थी। 20 नवंबर के आंदोलन के बाद यह हलचल और बढ़ गई। जिसका नतीजा शनिवार रात को हुई मीटिंग थी। इससे सारी बर्फ पिघल गई। सूत्र ने बताया कि राजदीप 2021 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं बन सके क्योंकि उन्हें अपनी पसंद की सीट से टिकट नहीं मिला था। तब भी उन्होंने पार्टी का विरोध नहीं किया था। पार्टी लीडरशिप यह बात अच्छी तरह समझती थी। इसलिए उन्हें समझा-बुझाकर पार्टी की गतिविधियों में फिर से सक्रिय होने के लिए मनाया गया। सूत्र ने यह भी कहा कि पार्टी के टॉप लीडरशिप ने उनसे पक्का वादा किया है कि राजदीप विधायक बन सकें।


