- बराक हिंदी साहित्य समिति के प्रतिनिधिमंडल का भी हुआ सम्मान
पूर्वोत्तर हिन्दी साहित्य अकादमी का ग्यारहवां स्थापना दिवस सिलचर, अम्बिकापट्टी स्थित बोराइल होम स्टे में भव्य रुप से मनाया गया। कार्यक्रम में अकादमी की अध्यक्षा रीता सिंह ‘सर्जना’ की अध्यक्षता में साहित्य, कला एवं समाजसेवा से जुडे. अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मूलचंद वैद तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में सुभदा पाडेय और कांता राय मौजूद रहीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ उद्घाटन सत्र के साथ हुआ। सभापति एवं अतिथियों के आसन ग्रहण तथा दीप प्रज्ज्वलन न के बाद सरस्वती बंदना एवं बंदेमातरम् की प्रस्तुति दी गई। स्वागत भाषण सीमा सिंह ‘स्वस्तिका’ ने प्रस्तुत किया, जबकि कार्यक्रम के उद्देश्यों पर मधु पारख ने प्रकाश डाला। इस अवसर पर चित्रकला प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं प्रदर्शन भी किया गया। सचिव प्रतिवेदन कल्पना देवी आत्रेय ने प्रस्तुत किया। इसके उपरांत अकादमी की पत्रिका का विमोचन एवं बराक घाटी के प्रख्यात साहित्यकार, अनुवादक अशोक वर्मा द्वारा अनूदित पुस्तक ‘पंच प्रदीप” का विमोचन किया गया।
पत्रिका की संपादक रीता सिंह ‘सर्जना’ ने अपने विचार व्यक्त करते हुए साहित्यिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढाने की प्रतिबद्धता जताई। सम्मान समारोह एवं उपाधि अलंकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान कांता राय, बिर्ख खडक़ा डुवर्सेलि, हरि लुईटल, योगेश दुबे, समीन सेन डेका, बिनय कुमार बुद्ध, अभिजीत गोतानी, मेघा दास, मूलचंद वैद, सीमा सिंह ‘स्वस्तिका’ तथा मधु पारख को सामाजिक, कलात्मक एवं साहित्यिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इसके साथ ही बराक-ब्रम्हपुत्र को एक सूत्र में पिरोते हुए, बराक हिंदी साहित्य समिति के पदाधिकारियों को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर बराक हिन्दी साहित्य समिति के तरफ से कार्यकारी अध्यक्ष मूलचंद बैद, उपाध्यक्ष दुर्गेश कुर्मी, महासचिव प्रदीप कुमार कुर्मी, पूर्व उपाध्यक्ष तथा वर्तमान कार्यकारिणी सदस्य बाबुल नारायण कानू , शिक्षाविद और लेखक सन्तोष कुमार चतुर्वेदी सहित अन्य लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन मधु पारख ने किया। कार्यक्रम में समूचे भारत से विशेषकर असम के बहुत से कवि साहित्यकार उपस्थित थे। दूसरे सत्र में ‘लघुकथा’ विषय पर परिचचर्चा आयोजित की गई। इस सत्र की मुख्य अतिथि भोपाल स्थित लघुकथा शोध केंद्र की निदेशक कांता राय रहीं। कार्यक्रम का संचालन रीता सिंह ‘सर्जना’ ने किया।
इसके पश्चात बहुभाषी कवि सम्मेलन एवं भव्य काव्य महोत्सव का आयोजन किया गया। विभिन्न भाषाओं के कवियों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति देकर साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कवियों में शुभदा पांडेय, रीता सिंह सर्जना, मधु पारख, विनय कुमार बुद्ध, हरि लुइटेल, विष्णु शास्त्री, सागर सापकोटा, देबोलीना राय, अनिमा माहेला, चंद्र कुमार ग्वाला, सरोज तापड़िया, तनु पौडवाल, डोली शाह, श्रुति गिरि, द्वारिका प्रसाद का नाम शामिल है। कवि सम्मेलन का संचालन सीमा सिंह ‘स्वस्तिका’ ने किया। समारोह का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ।

